अरे ओ सांबा! किस चक्की का आटा खाता है ये भैंसा

महंगे और आकर्षक पालतू पशुओं की सूची में भीम अकेला नहीं है. इसके पहले भी कुछ भैंसे अपना नाम कमा चुकाे हैं. इनका खान-पान, पालने और देखभाल में होने वाला भारी खर्च और इनकी वजह से पालक को हर साल होने वाली लाखों की आमदनी इनको चर्चाओं में बनाती है. राजस्थान के पुष्कर मेले में लोग भीमकाय भैंसे भीम को देखने पहुंच रहे हैं.

अरे ओ सांबा! किस चक्की का आटा खाता है ये भैंसा

पुष्करः इस समय राजस्थान में पुष्कर मेले की धूम है. यहां राजस्थान का लोकरंग, खानपान, शिल्प और गीत-संगीत तो अपने छटा बिखेर ही रहे हैं, मेले में लगे बाजारों की रौनक भी कुछ कम नहीं है. इन्हीं चकाचौंध भरी रोशनी के बीच शामिल है, पुष्कर का पशु मेला. इस साल वहां उन्नत नस्ल के ऐसे पशु शामिल होने आए हैं जो खेती-किसानी या व्यापार के लिए मुफीद तो हैं ही साथ ही वे अपने शाही रुतबे के लिए भी मशहूर हैं. आज के दौर में जहां आदमी खालिस घी, तेल और मेवा-मिश्री से वंचित रह जा रहा है, वहीं पुष्कर मेले में एक भैंसा है जो अपने राजसी अंदाज के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. 

15 करोड़ का भीम, कीमत सुन आंखें फैली रह जाती हैं
मेले में एक भैंसा आया है, नाम है भीम. जैसा नाम है वैसा ही भीमकाय भी है. 6 साल की उम्र में ही इस भैंसे ने अच्छा कद पा लिया है. भैंसे के मालिक जवाहर जांगिड़ हैं. उन्होंने बताया कि इस सेहतमंद शरीर की वजह है भीम का खानपान और उनकी देखभाल. जवाहर भैंसे को रोजाना करीब एक किलो घी, करीब आधा किलो मक्खन, शहद, दूध और काजू-बादाम खिलाते हैं. मुर्रा नस्ल के इस भैंसे का वजन करीब 1300 किलोग्राम है. इसके खाने-पीने और देखभाल में हर महीने करीब सवा लाख रुपये का खर्च आता है. इसके अलावा एक किलोग्राम के सरसों के तेल से इसकी मालिश भी की जाती है.

करीब 6 फीट ऊंचाई और 14 फीट लंबाई वाले इस पालतू की देखभाल के लिए 4 लोग लगाए गए हैं. मुर्रा नस्ल के इस भैंसे का इस्तेमाल भैंस के गर्भधारण के लिए किया जाता है ताकि ज्यादा दूध देने वाली भैंस पैदा हों. इसलिए इसकी कीमत 15 करोड़ रुपये लगाई गई है. इस भैंसे को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुट रही है.

भीम अकेला नहीं है
महंगे और आकर्षक पालतू पशुओं की सूची में भीम अकेला नहीं है. इसके पहले भी कुछ भैंसे अपना नाम कमा चुकाे हैं. इनका खान-पान, पालने और देखभाल में होने वाला भारी खर्च और इनकी वजह से पालक को हर साल होने वाली लाखों की आमदनी इनको चर्चाओं में बनाती है. उत्तर प्रदेश के मेरठ में लगने वाला पशु मेला और बिहार के सोनभद्र में लगने वाला पशु मेला इन पशुओं से गुलजार रहा है. इन पर भी डालते हैं एक नजर

युवराज भी है खास
हरियाणा के एक किसान हैं कर्मवीर. उनकी प्रसिद्धि का कारण है उनका भैंसा युवराज, जो कहीं भी जाता है तो कर्मवीर के हिस्से में तारीफ आती है. वजह है कि युवराज की भारी-भरकम कीमत, जिसे पशु व्यापारी 9 करोड़ तक लगा चुके हैं. हालांकि कर्मवीर इसे बेचना नहीं चाहते हैं.

दरअसल इस भैंसे के जरिये वह हर साल 40 से 50 लाख रुपये की आमदनी करते हैं और ऐसे में नौ करोड़ रुपये बहुत कम लगते हैं. इस भैंसे की देखरेख भी युवराजों की तरह ही होती है. उसे हर दिन दूध, अनाज, फल और सूखे मेवे दिए जाते हैं. युवराज का वजन करीब 1600 किलोग्राम और लंबाई 6.5 फीट है. यह मुर्रा नस्ल का भैंसा है. देश में होने वाले विभिन्न पशु मेलों में वह इसे लेकर जरूर जाते हैं.

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हीरा-मोती दो भाई
मुंशी प्रेमचंद की कहानी, दो बैलों की कथा तो आपने पढ़ी-सुनी होगी. इसी नाम के दो भैंसे ओम प्रकाश की जान हैं. ओम प्रकाश बताते हैं कि दोनों की देखरेख में प्रतिदिन 10 हजार तक खर्च होते हैं. इन्हें दस-दस किलो दूध पिलाया जाता है. दोनों को 700-700 ग्राम घी दिया जाता है.

इसके अलावा चना, बिनौला, दली हुई सरसों तथा फल भी इन दोनों के खानपान में शामिल हैं. गर्मियों में दोनों को बादाम भीगो कर खिलाया जाता है. सर्दी में एक बार तथा गर्मियों में तीन बार इनके नहाने का क्रम है. हीरा- मोती दोनों ही सगे भाई हैं. इनकी मां अभी तक 27 कटड़े दे चुकी है. इनमें अंतिम कटड़े हीरा-मोती ही हैं. हीरा पांच साल का और मोती की उम्र 4 साल है. 

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रांझा को बहुत मानते हैं साहिब सिंह
रांझा नाम के इस भैंसे की कीमत 5 करोड़ है. इसे भी हरियाणा से खरीदा गया था. मुर्रा नस्ल के इस भैंसे को इसके मालिक साहिब सिंह बड़े प्यार से रखते हैं और इसकी देखभाल पर भारी-भरकम खर्च भी करते हैं. वह बताते हैं कि यह भैंसा देसी घी पीता है और 10 लीटर दूध भी इसकी डाइट में शामिल है.

इसके शुक्राणुओं से इंजेक्शन बनाए जा सकते हैं. रोजाना दो किलो तेल से इसकी मालिश की जाती है. पांच किलो चने व सोयाबीन, पांच किलो बिनौले, पांच किलो खल इसकी खुराक है. इस का एक दिन खर्च 1500 से 2000 रुपये हैं. अभी रांझा की उम्र तकरीबन साढ़े चार साल है. 

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