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आर्थिक मंदी के दौर में राजनीतिक दलों ने की इतनी कमाई, वो कैसे !

देश की आर्थिक हालत भले ही कितनी भी बिगड़ी हो, नेताओं की जेब अक्सर भरी ही रहती है. तभी तो जब पूरी जनता इकोनॉमी के निचले स्तर से झटके में है, फिर भी क्षेत्रीय पार्टियां मौज उड़ा रही हैं.

आर्थिक मंदी के दौर में राजनीतिक दलों ने की इतनी कमाई, वो कैसे !
मालामाल हो रहे हैं देश के राजनीतिक दल

नई दिल्ली:  “एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स” यानी एडीआर ने मंगलवार को एक आंकड़ा जारी किया, जो संभवतः क्षेत्रीय पार्टियों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. क्या है ये आंकड़ा और आखिर क्यों बन सकता है ये समाजवादी पार्टी(SP), जदयू(JDU), टीडीपी(TDP) और डीएमके(DMK) के लिए सिरदर्द ? 

मालामाल हुए क्षेत्रीय दल
दरअसल, एडीआर ने सभी राज्य-स्तरीय दलों के सम्पति व ऋण का ब्यौरा जारी किया. जिसमें पार्टियों के 2017-18 वित्तीय वर्ष में उनकी संपत्ति कितनी है, वो दर्शाया गया है. आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की संपत्ति सबसे अधिक 583.29 करोड़ है. इसके अलावा दक्षिण भारत की तीन पार्टियां डीएमके, एआईडीएमके और टीडीपी क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर है. डीएमके के  191.64 करोड़ एआईडीएमके के 189.54 करोड़ और टीडीपी के 131.59 करोड़ की संपत्ति का आंकड़ा दिखाया गया है.

समाजवादी पार्टी ने की भारी कमाई
2016-17 में 39 क्षेत्रीय दलों की कुल संपत्ति 1267.81 करोड़ थी, जो 2017-18 में 41 दलों को मिला कर 1320 करोड़ तक पहुंच चुका है. वहीं, 2016-17 में 40.33 करोड़ का ऋण भी 2017-18 में 61.61 करोड़ तक पहुंच गया है. समाजवादी पार्टी की संपत्ति तो सभी दलों की कुल संपत्ति का 46 प्रतिशत है. अब इससे बड़ा समाजवाद का उदाहरण और क्या होगा. 

जदयू-जेडीएस भी रेस में
यहीं नहीं बिहार के मुख्यमंत्री की पार्टी जदयू की संपत्ति एक वर्ष में तीन गुणा बढ़कर 13.78 करोड़ हो चुकी है. वहीं कर्नाटक की जेडीएस और तेलांगना की टीआरएस की संपत्ति दो गुणा बढ़कर क्रमशः 15.44 करोड़ और 29.04 करोड़ पर आ पहुंची है. बड़े क्षेत्रीय दलों में शिवसेना एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके कुल आय में कमी आई है.