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जंगली भालू हुए ईश्वर के भजन के दीवाने, कभी नहीं देखा होगा ऐसा अनोखा नजारा

मध्य प्रदेश के शहडोल में इन दिनों जंगली भालू ईश्वर के भजन के दीवाने हो गए हैं. जंगल में अकेले कुटिया बनाकर रहने वाले एक संन्यासी के भजन से भालुओं का एक परिवार बेहद प्रभावित हुआ है. यह भालू परिवार साधु बाबा के भजन गाना शुरु करते ही जंगलों से आकर उनके चरणों में बैठ जाता है. भजन समाप्त होने के बाद यह भालू परिवार प्रसाद खाकर लौट जाता है.  

जंगली भालू हुए ईश्वर के भजन के दीवाने, कभी नहीं देखा होगा ऐसा अनोखा नजारा

शहडोल: ईश्वर की भक्ति मनुष्यों को ही नहीं बल्कि जंगली जानवरों को भी आकर्षित करती है. मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जंगलों में ऐसा ही अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा है. 
भगवान का भजन सुनने आते हैं जंगली भालू
शहडोल जिले में घने जंगलों के बीच झोपड़ी बनाकर रहने वाले एक संन्यासी के पास हर रोज भालुओं का एक परिवार आता है. ये सभी उनके भजन गाने की आवाज सुनकर आते हैं. जब तक साधु महाराज भजन गाते हैं. तब वह पूरी शांति से बैठकर सुनते हैं. जिसके बाद साधु बाबा भजन समाप्त करके भालुओं के परिवार को प्रसाद बांटते हैं. जिसे ग्रहण करके ये सभी भालू वापस जंगलों के बीच अपने घर लौट जाते हैं. ये दिलचस्प घटना पिछले कई दिनों से लगातार हो रही है. 

कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं भालू
भालू एक जंगली जानवर है. यह मनुष्यों पर हमला कर देता है. लेकिन खास बात ये है कि सीताराम नाम के ये साधु बाबा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर जैतपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत खड़ाखोह के जंगल में सोन नदी के समीप राजमाड़ा में पिछले 17 साल से अपनी कुटिया बनाकर रह रहे हैं. वह जंगल में एकांत के बीच ईश्वर का भजन करते हैं. साधु सीताराम साल 2003 से हर रोज भगवान का भजन करते हैं और पूजा पाठ में लीन रहते हैं. 

अचानक भालुओं ने आना शुरु किया
साधु सीताराम जब अपनी ईश्वर भक्ति में लीन होकर अपनी आंखें बंद करके भजन गा रहे थे. बक्ति की तंद्रा टूटने के बाद जब उनकी आंखें खुली तो उन्होंने देखा कि जंगल से आकर दो भालू  नर और मादा उनके पास बैठे हुए हैं. पहले तो साधु जंगली जानवरों को अपने पास देखकर चौंक गए. लेकिन उन्होंने महसूस किया कि ये भालू उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं. तो उन्होनें इसे ईश्वर की माया समझकर भालुओं को प्रसाद अर्पित किया. जिसे खाकर भालू वापस जंगल में लौट गए. 

भालुओं के बच्चे भी आने लगे हैं साधु बाबा के पास
काफी दिनों तक यह दोनों भालू उनके पास आते रहे. खास बात ये है कि भालुओं का ये जोड़ा कभी भी उनकी कुटिया के अंदर नहीं आता. ये बाहर बैठकर ही उनका भजन सुनते हैं. जल्दी ही भालुओं के इस जोड़े के दो बच्चे भी हो गए. ये दोनों बच्चे भी अपने माता पिता के साथ उनकी कुटिया तक उछलते कूदते आते रहते हैं. ये दोनों बच्चे भी अपने माता पिता की ही तरह साधु बाबा को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते. 

साधु बाबा को भालुओं से हो गया है मोह
भालुओं का ये परिवार साधु बाबा से इतना हिल मिल गया है कि साधु बाबा उन्हें अपने परिवार की तरह मानने लगे हैं. उन्होंने इस भालू परिवार का नामकरण भी कर दिया है. साधु सीताराम ने नर भालू को लाला, मादा भालू को लाली और उनके बच्चों को चुन्नु-मुन्नु का नाम दिया है. भालुओं का ये परिवार उनके लिए ईश्वर भक्त इंसानों की तरह है. 

वन विभाग ने भी की है पुष्टि
भालुओं का ये परिवार वन विभाग की नजर में भी है. ये क्षेत्र जैतपुर वन परिक्षेत्र में आता है. वहां के रेंजर ने भी भालुओं के आने की पुष्टि की है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि साधु सीताराम के भजन गाने से आकर्षित होकर भालुओं का परिवार उनके पास आता है. यह भालू किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. 

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