भारतीय ने नासा की मशीनों का किया इस्तेमाल और ढूंढ़ निकाला विक्रम लैंडर को

चंद्रयान-2 के खोए हुए लैंडर विक्रम को आखिरकार ढ़ूंढ़ निकाला गया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यह संकेत दिए कि अमेरिकी उपग्रह ने चंद्रमा की परिक्रमा करने के दौरान भारतीय चंद्रयान के विक्रम लैंडर के मलबे को खोज निकाला है. 

भारतीय ने नासा की मशीनों का किया इस्तेमाल और ढूंढ़ निकाला विक्रम लैंडर को

नई दिल्ली: भारत के बहुप्रतीक्षित स्पेस मिशन चंद्रयान-2 के खोए हुए विक्रम लैंडर को खोज निकाला गया है. 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतरने के पहले ही लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद मिशन का सफल परीक्षण नहीं हो पाया था. सबसे चिंता की बात यह थी कि लैंडर विक्रम से कोई भी संपर्क साध पाने में अब तक नाकामी ही मिली थी. लेकिन सोमवार को अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने कहा कि उन्होंने भारत के चंद्रयान के विक्रम लैंडर को खोज निकाला है. उनके उपग्रह को उसका मलबा गिरा हुआ मिला है. नासा ने उसकी तस्वीरें भी पोस्ट की और भारत को उसका लोकेशन बताया है.

भारतीय इंजिनियर सुब्रमण्यम ने पहले ही खोज निकालने का किया था दावा

मालूम हो कि चंद्रयान-2 मिशन बस लैंडिंग से पहले ही थोड़े समय पहले भारतीय स्पेस रिसर्च संगठन से अपना संपर्क खो बैठा. अब नासा ने अपने उपग्रह से ली गई विक्रम के मलबे की तस्वीरें साझा की है. दिलचस्प बात यह है कि नासा में ही काम करने वाले भारतीय इंजिनियर एस सुब्रमण्यम ने पहले ही विक्रम लैंडर के मलबे को सैटेलाइट इमेजिंग से खोज निकाला था. जबकि दो महीने तक छानबीन के बाद अमेरिका ने भारतीय इंजिनियर की बात की पुष्टि की. 

भारतीय इंजिनियर ने बताया था कि विक्रम लैंडर का मलबा उसके मुख्य क्रैश साइट से तकरीबन 750 मीटर की दूरी पर ही गिरा था. उन्होंने विक्रम का मलबा खोज निकालने के बाद ट्विटर पर तीन अक्टूबर को ही एलान कर दिया था लेकिन अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने पहले पड़ताल करने के बाद ही कुछ भी पुष्टि करने की सोची. 

इसरो को भी मिले थे कुछ अहम सबूत

हालांकि, इससे पहले इसरो को भारतीय स्पेस मिशन चंद्रयान के लैंडर विक्रम के निशान जरूर मिले थे. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन प्रमुख के सिवान ने पिछले दिनों यह कहा था कि इसरो ने विक्रम लैंडर से जुड़े कुछ सुराग ढ़ूंढ़ निकाले हैं. 

इसरो प्रमुख ने यह भी कहा था कि उन्हें ऑर्बिटर से जुड़ी कुछ तस्वीरें मिली थी जिससे लगता है कि विक्रम लैंडर की चंद्रमा पर बहुत हार्ड लैंडिंग हुई थी. जिसकी वजह से वह क्रैश कर गया होगा. चांद का चक्कर लगा रहे एक भारतीया ऑर्बिटर ने विक्रम की थर्मल इमेज ली और साझा की है. 

हार्ड लैंडिंग की वजह से क्रैश कर गया था लैंडर

हार्ड लैंडिंग करने से ज्यादातर लैंडर बुरी तरह से विस्फोट कर जाते हैं जिसके बाद उनका मलबा स्पेस में कहीं खो जाता है और उसका पता नहीं चल पाता. विक्रम की लैंडिंग भी सॉफ्ट लैंडिंग न हो कर हार्ड लैंडिंग हुई. सॉफ्ट लैंडिंग का मतलब कि किसी भी सैटेलाइट को लैंडर से सुरक्षित उतारना और किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त होने से बचाना.

कहा जा रहा है कि अगर भारत के चंद्रयान-2 मिशन की भी सॉफ्ट लैंडिंग हुई होती तो भारत विश्व में पहला ऐसा देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा हो. इससे पहले जितने भी देशों ने अंतरिक्ष में अपने मिशन भेजे हैं, फिर चाहे वह अमेरिका, चीन और रूस ही क्यों न हो किसी ने भी अपने मिशन दक्षिणी ध्रुव पर नहीं भेजे. 

भारत का चंद्रयान-2 मिशन एक बहुप्रतीक्षित स्पेस मिशन है. जिसको भेजने में 11 साल लग गए. इस मिशन का मुख्य लक्ष्य चांद की सतह पर उतर कर वहां की भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण करना था. खासकर जमीनी सतह का. इस मिशन में विक्रम लैंडर से निकल कर अलग जाने वाले प्रज्ञान रोवर की मदद से चांद की सतह पर पानी की खोज को मुख्य रूप से लक्षित किया गया था.