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केरल की नन मरियम थ्रेसिया को मिली 'संत की उपाधि'

पोप फ्रांसिस ने सिस्टर थ्रेसिया को दी संत की उपाधि. पीएम मोदी ने मन की बात में किया था जिक्र.

केरल की नन मरियम थ्रेसिया को मिली 'संत की उपाधि'

नई दिल्ली: 26 अप्रैल 1876 में केरल के त्रिशुर में मरियम थ्रेसिया का जन्म  हुआ था और महज 50 साल की उम्र में 8 जून 1926 में उनका  निधन हो गया . जन्म से उनका नाम थ्रेसिया रखा गया था. लेकिन 1904 में 'मरियम थ्रेसिया' नाम से पुकारा जाने लगा. मरियम का जन्म एक सम्पन्न  परिवार में होने के बावजूद मात्र 8 साल की छोटी सी उम्र मरियम ने खुद को ईश्‍वर को समर्पित कर दिया और व्रत रखने लगीं व प्रार्थना करने लगी. इस वजह से उनके दोस्‍त बचपन से उन्‍हें 'संत' बुलाते थे.

महज 16 साल की उम्र में सिस्टर थ्रेसिया ने र्हप्स से ग्रसित मरीजों के लिए काम करना शुरू किया था. और 38 साल की उम्र में नन बनने के बाद उन्होंने 11 साल तक इस पद पर बने रह कर सेवाएं दीं.  मरियम ने मई 1914 में त्रिशुर में सिस्टरों के समूह होली मिलन की स्थापना की. थ्रेसिया द्वारा स्थापित होली फैमिली में अब करीब 2000 नन जुड़ चुकी हैं. वेटिकन सिटी की चर्च के मुताबिक सिस्टर मरियम थ्रेसिया ने कई स्कूल, हॉस्टल, अनाथालय और कॉन्वेंट बनवाए और उसे खुद संचालित भी किया. सिस्टर मरियम को लड़कियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए किए गए कामों के लिए भी याद किया जाता है. सिस्‍टर मरियम ने केरल के गरीबों और कुष्‍ठ रोग तथा चेचक से पीड़ित लोगों की भी सेवा करती थी. इसी सेवा- भाव की वजह से उनकी तुलना मदर टेरेसा से की जाती रही है.
 
22 मार्च 2018 को वेटिकन सिस्‍टर ने मरियम के 'चमत्‍कार' को स्‍वीकार किया था. और नन मरियम थ्रेसिया को उनके निधन के 93 साल बाद 13 अक्टूबर 2019 में पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी में  'संत' की उपाधि दी. सिस्टर थ्रेसिया का कैननाइजेशन रोम में किया गया था. इस दौरान सैंकड़ों श्रद्धालु, भारत के चर्चों के लीडर्स और केरल के विभिन्न सांसदों के राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए थे. और पिछले एक सप्ताह से त्रिशूर में सिस्टर थ्रेसिया के लिए सामूहिक और विशेष प्रार्थना का आयोजन किया जा रहा था.

मोदी ने 'मन की बात' में किया था जिक्र
पीएम मोदी ने 29 सितंबर को  'मन की बात'  के दौरान सिस्टर मरियम का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि देश को सिस्टर मरियम पर गर्व है. उन्होंने 50 साल के अपने छोटे से जीवनकाल में मानवता की भलाई के लिए जो काम किए, वे पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल हैं. और 13 अक्तूबर को  मरियम के संत घोषित की बात कही थी.