एक ऐसा मजार जहां प्यार करने वालों की हर मुराद होती है पूरी

प्यार का महीना चल रहा है और दो प्यार करने वालों की बात न की जाए ऐसा तो हो ही नहीं सकता. जब भी हमारे जहन में दुनिया के सामने अपने प्यार का मिसाल कायम करने वाले कपल का नाम आता है तो वो आता है रोमियो-जूलियट, हीर-रांझा, लैला-मजनु. इन्हीं में से एक कपल ऐसा है जिनके प्यार की निशानी अभी तक मौजूद है, जी हां हम बात कर रहे हैं लैला और मजनू के सच्चे प्यार की. 

 एक ऐसा मजार जहां प्यार करने वालों की हर मुराद होती है पूरी

श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर में लैला और मजनू के प्यार के नाम स्मारक बनाई गई है. प्रेम और धार्मिक आस्था की प्रतीक ‘लैला मजनू की मजार’ राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की अनूपगढ़ तहसील में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बिंजोर गांव में स्थित है. यह जगह पाकिस्तान से महज 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. 

यूपी के स्कूल में ऐसे भी मास्टर हैं जिसे खुद क्लास जाने की जरूरत है.

कपल के लिए खास है ये मजार
कहते हैं लैला और मजनू ने अपने प्यार को अमर करने के लिए यही जान दे दी थी. दोनों का प्यार ऐसा जिसने कभी हिम्मत नहीं हारी, जमाने की लाख कोशिशों के बाद भी दोनों का प्यार बढ़ता ही गया. भले जिंदा रहते हुए दोनों को जमाने ने अलग करने में कोई कमी नहीं छोड़ी लेकिन मरने के बाद दोनों के मजारें पास-पास बनवाई गई है. इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही आकर सिर झुकाते हैं क्योंकि यह प्यार की न तो कोई भाषा होती है और न हीं कोई धर्म.

यहां प्रेमी आते हैं, प्यार की कसमें खाते हैं और हमेशा साथ रहने की मन्नतें मांगते हैं. और कपल के लिए वैलेंटाइन से बेहतर क्या हो सकता है जिसके चलते भारी संख्या में प्रेमी युगल यहां पहुंचे और अपने प्यार के लिए मन्नतें मांगी.

सारी रात दो दीपक की लौ निकलती थी मजार से
मजार की कमेटी के प्रधान के अनुसार, पहले इस जगह पर कच्ची मजार हुआ करती थी और आस-पास मिल्ट्री वाले रहा करते थे. इस मजार से पहले रात के समय दो दीपक निकलते और सारी रात सरहद का चक्कर लगाकर सुबह वापिस मजार में समां जाते. मिल्ट्री वालों ने बहुत पड़ताल की लेकिन कोई भी जानकारी नहीं हासिल हुई. तब इस बिंजोर गांव के एक लंबरदार को सरहद पार के लंबरदार ने बताया कि यह लैला-मजनू की मजार है. एक बार इससे मन्नत मांग के देखो, जीवन सफल हो जाएगा. उसके बाद लंबरदार ने कच्ची ईंटों से जगह बना दी और स्थानीय ग्रामीण यहां पर आकर अपनी मन्नतें मांगने लगे. 

प्यार को पाने के लिए यहां जाकर मांगे मन्नत
धीरे-धीरे गुरुवार के दिन यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा. फिर लोगों की आस्था इसमें बढ़ती गई और मेला लगने के बाद दीपक दिखने बंद हो गए. पहले यहां एक दिन का मेला लगता था लेकिन अब यह पांच दिन का हो गया है. उनके अनुसार यहां आने वाले हर इंसान की मन्नत पूरी होती है चाहे किसी की शादी नहीं हो रही हो या किसी के प्यार में अड़चन हो या फिर बच्चे के लिए, हर किसी की मन्नत यहां पूरी होती है. बंटवारे के बाद भी सरहद के पार से लोगों का आना-जाना यहां लगा रहता था लेकिन जैसे जैसे सरहद पर चौकसी बढ़ती गई लोगों का आना भी बंद हो गया.