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कुपोषण और मोटापा दोनों है भारत के लिए परेशानी

भारत में कई तरह की विसंगतियां देखी जाती है. कहीं लोग इतना ज्यादा भोजन करते हैं कि मोटापे का शिकार बन जाते हैं तो कहीं इतनी गरीबी है कि बिना भोजन के बच्चे कुपोषित हो रहे हैं. 

कुपोषण और मोटापा दोनों है भारत के लिए परेशानी
कहीं पर कुपोषण कहीं पर मोटापा

नई दिल्ली: ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट में भारत के बारे में विचित्र तस्वीर पेश की गई है. यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में लाखों  बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. उन्हें सामान्य रुप से पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है. जिसकी वजह से उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी पाई जा रही है. 

भारत के बच्चों में कुपोषण की स्थिति गंभीर 
देश में ऐसे कई इलाके हैं जहां पर लोगों के पास जीवन के सामान्य संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 में भारत में कुपोषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जाहिर की गई हैं. इस रिपोर्ट से पता चलता है कि  दुनिया में कुल 15 करोड़ 80 लाख अविकसित बच्चों में से 31 फीसदी बच्चे भारत में है, जबकि दुनिया भर के कुपोषित बच्चों का आधा हिस्सा भारत में रहता हैं.

हालत यह है कि हमारे देश में 4 करोड़ 60 लाख 60 हज़ार बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के हिसाब के कम है और वह कम पोषण वाला भोजन पाने की वजह से बार बार बीमार पड़ जाते हैं. देश में पांच साल से कम उम्र के 35.7 फीसदी बच्चों का वजन अपनी उम्र के अनुपात में कम है. 38.4 फीसदी बच्चों का शारीरिक विकास उनकी उम्र के अनुपात में नहीं हो रहा है. जबकि 21 फीसदी बच्चों की वजन उनकी लंबाई के अनुपात में बेहद कम है. दुनिया भर में उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले एक तिहाई बच्चे भारत में रहते हैं। 

भारत में कुपोषण की समस्या सिर्फ बच्चों में ही नहीं बल्कि महिलाओं में भी पाई गई है. देश की 33.6 फीसदी महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं जो कि कुपोषित बच्चों को जन्म देती हैं. 

भारत में पिछले एक दशक में कुपोषण की समस्या में मात्र एक फीसदी की कमी आई है. 

मोटापा भी बनता जा रहा है गंभीर समस्या
भारतीयों में मोटापा भी महामारी का रुप लेता जा रहा है. देश की 5 फीसदी आबादी गंभीर रुप से ज्यादा वजन की शिकार है. आज देश में मोटे लोगों की संख्या चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ चुकी है. जीवन शैली से संबंधित यह रोग टाइप 2 डायबिटीज, कोरोनरी हार्ट डिजीज, स्ट्रोक्स, ऑस्टियोआर्थराइटिस और कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे रहा है. 

डायबिटीज यानी मधुमेह में तो भारत दुनिया की राजधानी बन चुका है. जैसे जैसे देश में मोटापे की समस्या बढ़ती जाएगी वैसे वैसे डायबिटीज के मरीज भी बढ़ते जाएंगे. देश में मोटापे की समस्या बढ़ने के दो प्रमुख कारण हैं पहला लगातार बैठे रहना और दूसरी वजह है असंतुलित भोजन करना. 

असंतुलित विकास है इस समस्या की वजह 
देश के कई इलाकों में गरीबी की वजह से लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से उस इलाके में कुपोषण की समस्या हो रही है. इसमें झारखंड, ओडिशा तथा कई आदिवासी इलाके हैं. जहां पर कुपोषण की स्थिति गंभीर है. 

वहीं देश के कई ऐसे इलाके हैं जहां के लोगों में मोटापा गंभीर बीमारी बनता जा रहा है. ऐसे इलाकों में पंजाब, गुजरात, दिल्ली जैसे इलाके हैं. जहां के लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं. 

इसकी वजह है असंतुलित विकास और आय का असमान वितरण. आम तौर पर देखा गया है कि जिन इलाकों में प्रति व्यक्ति आय कम है वहां कुपोषण की समस्या है और जहां प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है वहां मोटापे की समस्या है. 

इस विसंगति को दूर करने के लिए संसाधनों का सही वितरण भी बेहद जरुरी है.