दूसरे ग्रह पर भी धरती जैसा जीवन

इंसान को आसमान में चमकते तारे हमेशा आकर्षित करते रहे, क्या इस ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसा कोई दूसरा ग्रह हो सकता है, क्या उस ग्रह पर जीवन हो सकता है, ऐसे सवाल हमेशा उसके मन में उठते रहते हैं. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : May 30, 2020, 04:31 PM IST
    • पृथ्वी जैसे ग्रह पर जीवन
    • प्रॉक्सिमा बी का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 1.17 गुना है
    • प्रॉक्सिमा बी के अस्तित्व के संकेत सबसे पहले 2013 में हुई
दूसरे ग्रह पर भी धरती जैसा जीवन

नई दिल्ली: इंसान को आसमान में चमकते तारे हमेशा आकर्षित करते रहे, क्या इस ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसा कोई दूसरा ग्रह हो सकता है, क्या उस ग्रह पर जीवन हो सकता है, ऐसे सवाल हमेशा उसके मन में कौंधते रहते हैं. जिनके जवाब पाने के लिए वो कोशिश भी करता रहा. अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम की ऐसी ही एक कोशिश ने ऐसा ग्रह खोज निकाला है जिस पर जीवन की काफी संभावनाएं हैं. ये ग्रह सौर मंडल के सबसे नज़दीक एल्फा सेन्टोरी स्टार सिस्टम के तारे प्रॉक्सिमा सेन्टोरी का चक्कर काट रहा है.

वैज्ञानिकों ने इस ग्रह का नाम प्रॉक्सिमा बी रखा है. इसकी पुष्टि यूनिवर्सिटी ऑफ जिनेवा के रिसर्चर्स के अलावा अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने की है. प्रॉक्सिमा बी का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 1.17 गुना है, ये 11.2 दिन में ही अपने सितारे सेन्टोरी का एक चक्कर लगा लेता है. प्रॉक्सिमा सेन्टॉरी तारा  सूरज के बाद पृथ्वी का सबसे नज़दीकी तारा है और पृथ्वी से 4.2 प्रकाश वर्ष यानी करीब 10 खरब किलोमीटर दूर है.

जीवन की संभावना

हालांकि प्रॉक्सिमा बी पृथ्वी के सूर्य की तुलनामें अपने सितारे से 20 गुना अधिक पास है लेकिन फिर भी यहां तक उतनी ही ऊर्जा पहुंचती है जितनी सूर्य से धरती पर.इसलिए वैज्ञानिकों को लगता है कि यहां पानी तरल अवस्था में हो सकता है और जीवन को सपोर्ट कर सकता है. पानी की संभावना को देखते हुए ही वैज्ञानिक एलियन लाइफ को लेकर खासे उत्साहित हैं हलांकि कुछ बातें उन्हें परेशान भी कर रही हैं. दरअसल प्रॉक्सिमा बी पर उसके तारे सेन्टोरी से एक्स रे की बमवर्षा होती रहती है.

ये पृथ्वी पर सूरज से होने वाली एक्स रे की बमवर्षा से करीब 400 गुना ज़्यादा है. इसलिए अब वैज्ञानिक इस बात के अध्य्यन में जुटे हैं कि क्या प्रॉक्सिमा का वायुमंडल ऐसा है जो इन एक्स रे से इस ग्रह की रक्षा करता हो और क्या यहां कुए ऐसे रासायनिक तत्व हैं जो जीवन को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी हैं जैसे कि ऑक्सीजन. प्रॉक्सिमा बी पर परिस्थितियां कितनी अनुकूल हैं ये रिसर्च का विषय है जिनका अध्ययन RISTRETTO स्पेक्टोमीटर की मदद से किया जाएगा.

कैसे हुई खोज?

प्रॉक्सिमा बी के अस्तित्व के संकेत सबसे पहले 2013 में मिले जब हर्टफोर्डशायर यूनिवर्सिटी के रिसर्चर मिक्को तुओमी ने आर्काइवल ऑब्जरवेशन डेटा का अध्ययन किया. 2016 में पहली बार वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर एक ऐसे ग्रह का पता लगाया जिस पर जीवन संभव हो सकता था.ये खोज जेनेवा में बने HARPS यानी हाई ऐक्युरेसी रेडियल वेलॉसिटी प्लैनेट सर्चर्र की मदद से की गई थी. HARPS एक ऐसा स्पेक्ट्रोग्राफ है जो चिली की यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी के टेलिस्कोप में लगा है.

ये भी पढ़ें- क्या दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों को छिपाया जा रहा है ?

यह टेलीस्कोप ग्रहों की खोज करने में मदद करता है. इसके बाद वैज्ञानिकों ने HARPS से भी आधुनिक नए जेनेरेशन के स्पेक्ट्रोग्राफ ESPRESSO यानी  एशेल स्पेक्टोग्राफ फॉर रॉकी एक्सोप्लैनेट एंड स्टेबल स्पेक्ट्रोस्कोपिक ऑब्ज़र्वेशन की मदद से वैज्ञानिक प्रॉक्सिमा बी ग्रह की पुष्टि करने में कामयाब रहे हैं. एस्प्रेसो भी स्विटज़रलैंड में ही बना है और ये भी चिली की ऑब्जर्वेटरी में ही है. ये HARPS से तीन गुना ज्यादा सटीक है.

वैज्ञानिकों के लिए चुनौती

प्रॉक्सिमा बी पर जीवन की संभावनाओं की पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों को अभी काफी अध्ययन करना होगा. इस ग्रह की एक्स रे से रक्षा, जीवन के लिए ज़रूरी केमिकल एलिमेंट्स जैसे तमाम सवालों के जवाब के लिए वैज्ञानिक अब एसप्रेसो से भी अधिक एडवांस RISTRETTO स्पेक्ट्रोमीटर का इस्तेमाल करने जा रहे हैं. रिसट्रेटो खासतौर पर प्रॉक्सिमा बी से निकलने वाली रोशनी को डिटेक्ट करेगा. इसके अलावा चिली में यूरोपियन सदर्न ऑब्ज़र्वेटरी में लगे ELT 39m विशाल टेलीस्कोप पर HIRES को लगाया जाएगा.

ये भी पढ़ें- ‘हर्ड इम्युनिटी’ नहीं कोरोना से बचाव का रास्ता

वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती प्रॉक्सिमा बी तक पहुंचने की भी है.कहने को तो ये पृथ्वी से सिर्फ 4.2 प्रकाश वर्ष ही दूर है लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक वहां तक पहुंचने में करीब 73,000 साल लगेंगे जब तक कोई आधुनिक टेक्नोलॉजी न आ जाए.वैज्ञानिक इसके लिए आयोनिक प्रोपल्शन, न्यूक्लियर थर्मल प्रोपल्शन, न्यूक्लियर पल्स प्रोपल्शन, फ्यूशन रॉकेट और लेज़र सेल्स जैसे तमाम तरीकों पर काम कर रहे हैं. वैज्ञानिकों को ESPRESSO से से किए गए अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को एक दूसरा सिग्नल भी मिला जो वहां कोई दूसरे ग्रह का संकेत देता है. माना जा सकता है आगे के अध्ययन में प्रॉक्सिमा बी से जुड़े कुछ और रहस्यों से पर्दा उठेगा.

ज़्यादा कहानियां

ट्रेंडिंग न्यूज़