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देश के अन्य जिलों के लिए मिसाल बन गया है यह जिला, क्यों आप खुद ही देख लीजिए

अगर आप गंदगी के आंकड़े और रिपोर्ट्स देख-देख कर परेशान हो गए हैं, तो जरा एक बार इस जिले द्वारा अपनाए गए स्वच्छता के तौर-तरीकों और उपलब्धियों पर नजर डालिए जो अन्य क्षेत्रों के लिए मिसाल है.  

देश के अन्य जिलों के लिए मिसाल बन गया है यह जिला, क्यों आप खुद ही देख लीजिए

नई दिल्ली: पिछले दिनों देश में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ड्रीम योजना "स्वच्छ भारत अभियान" के तहत देश भर के कई जिले ओडीएफ(Open Defecation Free) घोषित किए गए. कुछ क्षेत्र ऐसे भी थे जिसने स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर एक अलग ही मिसाल पेश की है. जाहिर है इन कार्यों के लिए इनकी तारीफ के साथ-साथ  इनके तौर-तरीकों को सब तक पहुंचाया भी जाए ताकि अन्य जिले, गांव या क्षेत्र इस स्वस्थ परंपरा को निभा कर देश को गंदगी मुक्त बनाने में सहयोग कर सकें.

स्वच्छ शुक्रवारी की मुहीम से दिया एक खास संदेश 

तेलांगना का पेद्दपल्ली जिला देश में एक मिसाल कायम करता है. इसे भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में देश का सबसे स्वच्छ जिला घोषित किया गया है. इस तमगे को हासिल करने के लिए इस जिले के कर्मचारियों से लेकर सरकारी अधिकारियों तक की मेहनत किसी मील के पत्थर से कम नहीं. दरअसल, इस जिले ने न सिर्फ स्वच्छ सर्वेक्षण में कमाल किया है, बल्कि यहां डेंगू के केस में भी जबरदस्त गिरावट आई है. आलम कुछ यूं था कि हर शुक्रवार को सैंकड़ों की संख्या में कर्मचारी जिले के 263 गांवों में सुबह 6 बजे ही अपने सफाई के औजार लेकर निकल जाया करता थे. और वहां सबको अपने काम की पूरी जिम्मेदारी थी, फिर चाहे वो गांव के ग्रामीण हो या सरकारी बाबू, सभी अपने कार्यों को बखूबी निभाते थे. पेद्दपल्ली के लोगों ने तो इसे एक नाम भी दे दिया था- स्वच्छ शुक्रवारी (Clean Friday)

गांधीजी के सपनों को उन्हीं के तरीकों से किया पूरा 

महात्मा गांधी के स्वच्छता के सपनों को पूरा करने के लिए पेद्दपल्ली के लोगों ने गांधीजी के तरीकों को भी अपनाया. इस मुहीम में सरकारी अधिकारियों के निरीक्षण में सरकारी कर्मचारियों की गंभीरता और ग्रामीणों की समाजिक जिम्मेदारी ने गांधीजी के समन्वयता और प्रधानमंत्री मोदी के "सबका साथ सबका विकास" नारे को जमीनी हकीकत दे एक मिशाल पेश किया है. और शायद यहीं कारण है कि जिले में स्वच्छता के इस मुहीम ने 2018 में डेंगू के 271 केस को कम कर 2019 में 43 पर ला दिया है. इस मौके पर जिले के जिलाधिकारी ए श्री देवसेना ने बताया कि जगह-जगह शौचालयों के निर्माण के अलावा गांवों में कूडे़दान और सोखा तक बनाए गए और उनका ससमय जांच भी किया जा रहा था. 

हालांकि स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की जारी की गई शहरों की रैंकिग में इंदौर को पहला, अंबिकापुर को दूसरा और मैसूर को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है. वहीं राजधानी दिल्ली, ऊज्जैन के बाद पांचवे स्थान पर है. हो न हो देश के अन्य क्षेत्रों को भी पेद्दपल्ली से सीख लेने की जरूरत है, ताकि स्वच्छता के सपने को साकार किया जा सके.