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महाबलीपुरम में बाहुबलियों की मुलाकात, ऐतिहासिक नगरी में इतिहास रचेंगे मोदी-जिनपिंग!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात 11 अक्टूबर को होगी दो 1300 साल पुराना इतिहास दोहराया जाएगा. पीएम मोदी उसी जगह पर शी जिनपिंग का स्वागत करेंगे जहां, 7वीं सदी में राजा महेंद्र पल्लव ने चीनी यात्री ह्वेन सांग की अगवानी की थी

महाबलीपुरम में बाहुबलियों की मुलाकात, ऐतिहासिक नगरी में इतिहास रचेंगे मोदी-जिनपिंग!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा पड़ोसी, सबसे अहम व्यापारिक साझेदार जिसका नाम चीन है. लेकिन वह पाकिस्तान का सबसे बड़ा मददगार है. चीन भारत का एक ऐसा दोस्त है, जो हमारे दुश्मन का सबसे बड़ा हिमायती भी है. ये ही वजह है कि चीन के साथ रिश्तों की हर एक कड़ी को हिंदुस्तान बेहद अहमियत देता है. अब इसी पावर पैक्ड डिप्लोमेसी को नया आयाम देने के लिए मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हो रही है. 11 अक्टूबर को जिनपिंग हिंदुस्तान आ रहे हैं. पीएम मोदी के पास कूटनीति का मास्टरस्ट्रोक तैयार है और इसका अंदाजा दोनों नेताओं की मुलाकात की जगह से होता है.

दक्षिण में समंदर किनारे कूटनीतिक मंथन

ये मुलाकात देश की राजधानी से बहुत दूर हिन्दुस्तान के दक्षिण में होने वाली है. रिवर फ्रंट पर मिल चुके मोदी और जिनपिंग इसबार समंदर किनारे मिलेंगे. जिस स्थान पर मुलाकत सुनिश्चित की गई है, उस जगह का नाम महाबलीपुरम है. जो 'मामल्लपुरम' भी कहलाता है. महाबलीपुरम बंगाल की खाड़ी के करीब तमिलनाडु में है. चेन्नई की दूरी यहां से सिर्फ 60 किलोमीटर है.

महाबलीपुरम का चीन के साथ पुराना रिश्ता

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात एक बहुत पुराने इतिहास को दोहराने वाला है. 

महाबलीपुरम के कांचीपुरम में 7वीं सदी में पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेन सांग आए थे और राजा महेंद्र पल्लव ने उनकी अगवानी की थी. अब करीब 1300 साल बाद पीएम मोदी शी जिनपिंग का इस ऐतिहासिक नगरी में स्वागत करेंगे. महाबलीपुरम का करीब 2000 साल पहले चीन के साथ खास संबंध था. पुरातात्विक सबूतों से पता चला था कि महाबलीपुरम का चीन से गहरा व्यापारिक रिश्ता था.

एशिया के दो बाहुबली महाबलीपुरम आ रहे हैं. तो पूरा शहर सज कर तैयार है.

मोदी और जिनपिंग के बीच यहां 2 दिन में करीब 7 घंटे की बातचीत होगी. सदियों पुराने रिश्ते का गवाह महाबलीपुरम भारत और चीन के बीच मौजूदा दौर में रिश्ते को करीब लाने वाले संवाद और समझौतों का भी गवाह बनेगा. हिंदुस्तान और चीन के बीच इसबार एलएसी, व्यापार और आतंकवाद जैसे अहम मुद्दों पर बात होगी. ऐसे में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जिनपिंग के इस तौरे पर नजर टिकाए रहेगा. क्योंकि इस मुलाकात के बीच पाकिस्तान को इस बात का डर सताता रहेगा कि कहीं, उसको कोई और जोर का झटका ना लग जाए. वैसे भी हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर गिड़गिड़ा रहे पाकिस्तान से चीन ने इस मसले पर किनारा कर लिया है. ऐसे में उसका खौफजदा होना वाजिब है.