राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने बचाई महाराष्ट्र में कांग्रेस की लाज

महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच की दूरी सैकड़ो किलोमीटर की है. लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी की इज्जत बचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई. आईए बताते हैं पूरा घटनाक्रम

राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने बचाई महाराष्ट्र में कांग्रेस की लाज
कांग्रेस पार्टी के तारणहार बने गहलोत

जयपुर: महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम हर रोज तेजी से बदल रहा था. इस दौरान सबकी निगाहें कांग्रेस पर टिकी हुई थीं. शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस के 44 विधायकों के सहयोग के बिना नई सरकार का गठन मुश्किल था. ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने विधायकों के टूटने का खतरा मंडरा रहा था. 

गहलोत पर पार्टी ने दिखाया भरोसा
कई राज्यों में भाजपा की हॉर्स ट्रेडिंग का शिकार हो चुकी कांग्रेस पार्टी इस बार फूं फूंक कर कदम रख रही थी. महाराष्ट्र में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनने का पूरे श्रेय राजस्थान कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनकी टीम को मिलना चाहिए. क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र के विधायकों को राजस्थान बुलाकर उनका स्वागत सत्कार करने और एकजुट रखने में बड़ी अहम भूमिका निभाई. 

कुछ इस तरह गहलोत ने बनाई रणनीति
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पुराने सहयोगी महाराष्ट्र कांग्रेस में मुंबई रीजन के प्रभारी और राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी का जिम्मा संभाल रहे अविनाश पांडे के साथ मिलकर रणनीति तैयार की. इन दोनों नेताओं ने पार्टी आलाकमान को पूरी योजना से अवगत कराया. उनकी हरी झंडी मिलने के बाद 8 नवंबर की शाम को महाराष्ट्र कांग्रेस के सभी विधायकों को जयपुर से 20 किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में ठहरने का इंतजाम किए. 

इस रणनीति के बाद भी अशोक गहलोत और उनकी विश्वसनीय नेताओं की टीम ने 5 दिन तक लगातार मुंबई कांग्रेस के विधायकों की ना केवल खातिरदारी की बल्कि उनकी निगरानी का भी पूरी तरीके से जिम्मा संभाले रखा. इन नेताओं में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी कृषि मंत्री लालचंद कटारिया आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ और कांग्रेस नेता अरुण कुमावत शामिल रहे.

 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अविनाश पांडे के नेतृत्व में इन नेताओं की टीम ने ना केवल रिसोर्ट में ठहरे महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं के मनोबल को बढ़ाने का काम किया बल्कि उन में एकजुटता बनाए रखने के लिए भी हर संभव प्रयास किए. 

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गहलोत ने निजी तौर पर मोर्चा संभाला
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार पांच दिन इन विधायकों के संपर्क में रहे. राजस्थान के सरकारी कामकाज में व्यस्तता के बावजूद  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रोजाना जयपुर से 20 किलोमीटर बाहर रिजोर्ट में जाकर ना केवल उनके साथ मैराथन बैठकें की बल्कि पार्टी आलाकमान की आगामी रणनीतियों के बारे में भी उन्हें जानकारी देते रहे. 

महाराष्ट्र के विधायकों को कराया राजस्थान दर्शन
ऐसा नहीं है कि इन विधायकों को जयपुर में बंधक बनाकर रखा गया बल्कि इन्हें घूमने फिरने की भी पूरी आजादी दी गई. अधिकांश विधायक जयपुर के अलावा अजमेर, पुष्कर, सालासर बालाजी धाम जैसे स्थानों की यात्रा भी कर कर आए.  इन विधायकों ने जयपुर की खूबसूरती को भी निहारा यहां के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया यहां के लजीज व्यंजनों का भी आनंद उठाया.  इन विधायकों को कहीं भी ऐसा महसूस नहीं होने दिया गया कि उन्हें एक तरीके से अपने राज्य से लाकर दूसरे राज्य में रखा गया है. 

भाजपा को सत्ता से दूर रखने की खुशी
जब 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगने की खबर आई तब महाराष्ट्र कांग्रेस के सभी विधायकों ने खुशी का इजहार किया. कांग्रेस विधायकों ने कहा यह उनकी जीत है.  इससे भाजपा को सत्ता से दूर रखने में वे कामयाब रहे हैं.  वे एनसीपी और शिवसेना के साथ पार्टी आलाकमान के निर्देशों के अनुसार आगे की रणनीति पर काम करेंगे. 

भाजपा से सरकार बना कर शिवसेना ने मोल लिया बड़ा खतरा

कांग्रेस पहले खा चुकी थी धोखा 
दरअसल इस पूरी रणनीति की पीछे बड़ी वजह यह थी कि कर्नाटक गोवा सहित कई राज्यों में इससे पहले कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट नहीं रखने की कीमत चुका चुकी थी. यही वजह है कि पार्टी आलाकमान ने इस बार अपने सबसे विश्वसनीय नेता अशोक गहलोत पर पूरी जिम्मेदारी सौंपी. जिन्होंने इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है.  राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब सब विधायकों को मुंबई भेजा जा चुका है जहां कांग्रेस पार्टी की आगे की रणनीति का भी हिस्सा बनेंगे. अगर महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी सरकार बनने का एक बड़ा क्रेडिट निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी टीम को भी जाएगा.