कबाड़ से बना दिए 500 अवैध हथियार, जानिए क्या है हुनरमंद सिकलीगर जाति का इतिहास

मध्य प्रदेश में पुलिस ने कबाड़ से हथियार बनाने वाले एक सिकलीगर को गिरफ्तार किया है. सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स ने पिछले 20 सालों में 500 से ज्यादा अवैध हथियार बनाए. भले ही आज ये कानून की नजर में मुजरिम हों, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिकलीगर हथियार निर्माताओं का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. 

कबाड़ से बना दिए 500 अवैध हथियार, जानिए क्या है हुनरमंद सिकलीगर जाति का इतिहास
हुनर ने बना दिया अपराधी

जयपुर: राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्य हथियार सप्लायर बहादुर सिंह उर्फ सरदार को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है. अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, एटीएस एवं एसओजी अनिल पालीवाल ने बताया कि काफी समय से वांछित चल रहे मध्यप्रदेश के बड़वानी का रहने वाला बहादुर सिंह उर्फ सरदार को गिरफ्तार करने के लिए कोटा यूनिट से एक टीम 7 नवम्बर को मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में भेजी गई थी। 

कई दिन निगरानी के बाद गिरफ्तार हुआ बहादुर सिंह
SOG टीम के सदस्यों द्वारा 4-5 दिन तक अपनी पहचान छिपाते हुए गांव पलसूद की निगरानी की गई. जिसके बाद अभियुक्त के संबंध में सूचनाएं एकत्रित करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि प्रारम्भिक पूछताछ में बहादुर सिंह ने माना कि वह लगभग 20 सालों से इस धंधे में लिप्त है. वह अभी तक करीब 500 से ज्यादा देशी कट्टे बनाकर विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर चुका है. 

कबाड़ से हथियार बनाने में माहिर होते हैं सिकलीगर
सिकलीगर जाति के हथियार निर्माता पानी के खराब पाईप व कबाड़ी से मिले सामान का इस्तेमाल कर अवैध देशी कट्टे, पिस्टल व रिवाल्वर बना देते हैं. यहां तक कि वह इन हथियारों के लिए कारतूस भी खुद ही बना देते हैं. 

बेहद सस्ती कीमत पर बेचते हैं हथियार
पुलिस ने बताया कि एक सिकलीगर कारीगर देशी कट्टे को 2000-2500 रूपये में बेच देता है. जो आगे जाकर मार्केट में 20,000 से 25,000 में बिक जाता है. राजस्थान पुलिस को पूछताछ में यह भी पता चला कि गिरफ्तार किया गया बहादुर सिंह उर्फ सरदार थाना पलसूद का हिस्ट्रीशीटर भी है.  जिसके खिलाफ मध्यप्रदेश में कुल 8 मामले दर्ज हैं. जिसमें से 5 मामले अवैध आर्म्स एक्ट के हैं. 

कौन हैं सिकलीगर 
सिख समुदाय से आने वाले सिकलीगर हथियार बनाने में माहिर माने जाते हैं. यह उनका खानदानी पेशा है. यह लोग मध्य प्रदेश से निमाड़ इलाके में बसे हुए हैं. सिकलीगरों का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है. यह लोग दशम गुरु गोविंद सिंह जी की सेना के लिए हथियारों का निर्माण करते थे. इनके ढाले गए हथियारों के कारण ही सिख सेना अजेय मानी जाती थी. यह लोग उस जमाने में तीर तलवार ढाल बनाने में माहिर हुआ करते थे. लेकिन समय बीतने के साथ यह लोग बंदूकें और पिस्तौलें भी बनाने लगे. 
हथियार बनाना इनका खानदानी पेशा है. लेकिन अंग्रेजी शासन काल से चले आ रहे वर्तमान आर्म्स एक्ट के मुताबिक इनका हुनर अब आपराधिक माना जाने लगा है.

  

इस समुदाय में शिक्षा की स्थिति शोचनीय है. जिसकी वजह से सिकलीगर परिवार के ज्यादातर बच्चे होश संभालते ही हथियार बनाने के अपने खानदानी पेशे में जुट जाते हैं. ज्यादातर सिकलीगर कारीगर हथियार बनाने के अवैध धंधे को छोड़ना चाहते हैं. लेकिन उन्हें इसके लिए सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाती है. 

निमाड़ इलाके के कई गांवों में सिकलीगर परिवार बसे हुए हैं. जहां पर जरायमपेशा लोग अक्सर हथियार खरीदने के लिए पहुंचते रहते हैं. जिसकी वजह से इन्हें पुलिस के कोप का शिकार होना पड़ता है.