स्टेट बैंक ने दो ग्राहकों को दिया एक जैसा खाता, अगले ने पीएमओ से मिला समझकर निकाले

एक शख्स ने अपने खाते में किसी और के गलती से आ रहे पैसों को निकाल लिया. हालांकि, यह मामला काफी समय पहले का है. दरअसल मध्य प्रदेश के इस मामले में स्टेट बैंक की शाखा ने दोनों को एक ही खाता नंबर दे कर अकाउंट खोल दिया था.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 22, 2019, 07:17 PM IST
    • बैंक ने दो अलग-अलग ग्राहकों को एक ही खाता नंबर दे दिया
    • दोनों पीड़ितों ने बैंक को ठहराया जिम्मेदार

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स्टेट बैंक ने दो ग्राहकों को दिया एक जैसा खाता, अगले ने पीएमओ से मिला समझकर निकाले

भिंडः प्रधाननमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और उनकी बातों का असर लोगों पर खूब पड़ता है. इसी का असर दिखाता एक मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है. यहां एक शख्स ने अपने खाते में किसी और के गलती से आ रहे पैसों को निकाल लिया. हालांकि, यह मामला काफी समय पहले का है, लेकिन अब मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह चर्चा में बना हुआ है. यहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की आलमपुर शाखा ने एक बड़ी लापरवाही कर डाली. बैंक ने दो अलग-अलग ग्राहकों को एक ही खाता नंबर दे दिया. बैंक की तरफ से दी गई पासबुक में ग्राहक संख्या भी एक है. इसका नतीजा हुआ कि एक ग्राहक खाते में पैसे जमा करता रहा और वहीं दूसरा ग्राहक (जिसका नंबर भी वही था) उसे निकालता रहा. 

ऐसा एक-दो बार नहीं बल्कि पूरे छह महीने तक चलता रहा. नतीजा ये आया कि जमा करने वाले ग्राहक के 89 हजार रुपये, दूसरे खाता धारक ने निकाल लिए. जब इस बात का पता चला तो पीड़ित ने बैंक मैनेजर से बात की, जहां मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन हक्का-बक्का रह गया. आलमपुरु के रूरई गांव में रहने वाले हुकुम सिंह कुशवाह पुत्र हरविलास कुशवाह हरियाणा में काम करते हैं. हुकुम सिंह का खाता आलमपुर की एसबीआई शाखा में है. बैंक की ओर से उन्हें 12 नवंबर 2018 को पासबुक जारी की गई. उनकी ग्राहक संख्या 88613177424 और बचत खाता संख्या 20313782314 है.

खाता खुलवाने के बाद हुकुम हरियाणा चले गए. वे वहां से अपने अकाउंट में रुपये जमा करवाते रहे. जब हरियाणा से वापस आकर हुकुम 16 अक्टूबर को अपने खाते से रुपये निकालने बैंक पहुंचे तो उसमें सिर्फ 35 हजार रुपये ही थे. बताया गया कि खाते से 7 दिसंबर 2018 से 7 मई 2019 के दौरान अलग-अलग तारीखों में 89 हजार रुपयों को निकाला गया. हुकुम ने मैनेजर राजेश सोनकर से शिकायत की. बघेल ने अपने खाते से आधार नंबर को लिंक करा लिया था. उन्होंने रुपयों को कियोस्क सेंटर से निकाला. कियोस्क सेंटर पर ही जाकर बघेल अंगूठे की छाप लगाते और रुपये निकाल लेते. 

लगा मोदी जी भेज रहे हैं 
मीडिया से बातचीत में रोनी गांव निवासी हुकुम सिंह बघेल बोले, 'मेरा खाता था, उसमें पैसा आया, मैं सोच रहा था मोदी जी पैसा दे रहे हैं तो मैंने निकाल लिए. हमारे पास पैसे नहीं थे, हमारी मजबूरी थी.

हमने घर में काम करवाया है और इसलिए पैसा हमें निकालना पड़ा. वहीं, उन्होंने सीधे तौर पर बैंक को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.

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