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पानी की समस्या से जूझ रही है भारत की आधी आबादी, वॉटरमैन निकले मिशन पर

पानी की समस्या से पूरा विश्व जूझ रहा है. भारत में लगातार अप्रत्याशित रूप से बढ़ती आबादी की जलीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त जल नहीं है. पानी की उपलब्धता से संबंधित कई रिपोर्ट और आंकड़ें हैं जो दिखाते हैं कि अगर इसका प्रबंधन अभी से भी नहीं किया गया तो ये मुसीबत काल बनकर आबादी को तहस-नहस कर देगी.   

पानी की समस्या से जूझ रही है भारत की आधी आबादी, वॉटरमैन निकले मिशन पर

नई दिल्ली: पिछले दिनों रैमन मैग्सेसे और भारत के वॉटरमैन की उपाधि से नवाजे गए राजेंद्र सिंह ने पेयजल संकट से जूझने का तरीका लोगों से साझा किया. राजेंद्र सिंह ने पेयजल को बचाने के लिए नदियों पर बांध बना पानी के मैनेजमेंट की सलाह दी. उन्होंने सरकार से अनुरोध करते हुए कहा कि बारिश के पानी को भी संजोया जाए और इसके लिए सरकार किसी ठेकेदार के भरोसे न रहे तो ज्यादा अच्छा होगा. 

अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा से जागरूक करने की योजना

स्टॉकहोम की ओर से वॉटरमैन की उपाधि पाने वाले राजेंद्र सिंह फिलहाल अपनी अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा पर हैं. इस दौरान वे चरखी दादरी में थे जहां उन्होंने जिले के अलग-अलग पंचायतों में लोगों को फिजूल में पानी खर्च ना करने को लेकर और पानी बचाओ मुहिम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया. उन्होंने कहा कि दुनिया भारी जल-संकट से जूझ रही है और इससे तभी निपटा जा सकता है जब पानी की बूदों को सहेजा जा सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि सूखी धरती की प्यास को बुझाना एक बहुत बड़ी समस्या बन सकती है.

देश के बड़े शहरों में वॉटर लेवल जीरो पर पहुंचा

भारत में जल समस्या कितनी विकट है, इसका अंदाजा कुछ रिपोर्टों के हवाले से लगाया जा सकता है. भारतीय संस्था नीति आयोग की कंपोजिट वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स-2018 की मानें तो 2020 तक देश के बड़े शहरों में पानी की उपलब्धता जीरो तक पहुंच सकती है. दिल्ली, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद समेत कुछ अन्य शहरों में इसकी वजह से 10 करोड़ से भी ज्यादा की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होगी. स्थिति इससे भी बुरी है. देश के कुछ जगहों पर तो पहले ही पानी जीरो लेवल पर पहुंच चुका है और ये सब जमीनी जल के बहुतायत इस्तेमाल की वजह से या फिर बारिश न होने की वजह से ही हुआ है. 

क्या कहती है विश्वबैंक की रिपोर्ट

विश्वबैंक की एक रिपोर्ट कहती है कि प्रति व्यक्ति पानी का खर्च 25 लिटर प्रतिदिन है जो खाने से लेकर रोजाना के कार्यों में इस्तेमाल में लाया जाता है. हालांकि, इसके अलावा भी घरेलू कामों में पानी की खपत और भी ज्यादा है. सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी फैक्टरियों में की जाती है खासकर कपड़ा उद्योग में जहां पानी की जरूरत प्रायः अधिक है. इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाले कचरे को नदी-पोखर में फेंककर और भी नुकसान पहुंचाया जाता है. 

भारत में 10 राज्य सूखे की चपेट में 

वैश्विक रिपोर्टों में एक रिपोर्ट ऐसी भी है जो भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है. भारत में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि 10 राज्यों में 50 करोड़ से ज्यादा लोग सूखे की चपेट में हैं. सबसे विकट स्थिति हरियाणा की है जिसके बाद पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और जम्मू और कश्मीर भी शामिल है. इतना ही नहीं वैश्विक स्तर पर भारत उन दुर्लभ 17 देशों में आता है जहां जलसंकट अपने चरम पर है जिसका मतलब है कि देश में ग्राउंड वॉटर की उपलब्धता काफी कम हो गई है. विश्व अनुसंधान संस्थान जो अमेरिका की एक थिंक टैंक संस्था है, उसने भारत को 17 सबसे खराब देशों की सूचि में 13वें स्थान पर रखा है.  

क्या है जलशक्ति अभियान और इसके मायने

भारत में इसके निवारण के लिए सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास किए जा रहे हैं जो अब तक नाकाफी है. इसे लेकर भारत सरकार ने एक नया मंत्रालय भी बनाया है जिसका नाम है जलशक्ति मंत्रालय. इसमें जल संसाधन, ग्रामीण विकास और गंगा कल्याण मंत्रालय और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को मिला कर एक अलग मंत्रालय बनाया गया. इसके बाद जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जलशक्ति अभियान का अनावरण किया जिसके तहत भारत के उन इलाकों में काम किया जाएगा जहां पानी की उपलब्धता काफी कम है. भारत सरकार ने पंचायत और ब्लौक स्तर पर काम करने के लिए जिलेवार काम करने की योजना बनाई है जिसमें पानी की विकट समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों को जन आंदोलन के माध्यम से जागरूक कर पानी के बचाव के अलग-अलग तरीके अपनाए जाने के गुर प्रयोग में लाए जा रहे हैं. 

हालांकि, पानी की समस्या के निपटारे के लिए सबसे जरूरी कदम किसी योजना की नहीं, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन की है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि लोगों को पानी के जरूरी और सही इस्तेमाल को लेकर जागरूक किया जाएगा. जितनी जरूरत हो उससे ज्यादा इस्तेमाल न करने के लिए खास प्रशिक्षण की जरूरत के मद्देनजर ही वॉटरमैन राजेंद्र सिंह ने राजस्थान से शुरू इस साक्षरता यात्रा को पूरे भारत में पहुंच कर राजस्थान तक ही पहुंचाने का यत्न किया है.