1971 War: इंडियन एयरफोर्स 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध को याद कर रही है. 3 दिसंबर को आधिकारिक युद्ध के घोषणा के बाद भारत ने पाकिस्तान को घेर कर पीटा था. ऐसे में जानिए युद्ध के दौरान 6 और 8 दिसंबर की कहानी.
1971 War: इंडियन एयरफोर्स भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 को याद कर रही है. इस युद्ध में इंडियन एयरफोर्स अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया था. युद्ध के दौरान पाकिस्तान को इंडियन एयरफोर्स की घातकता अंदाजा ही नहीं था. इंडियन एयफोर्स हर मोर्चे पर पाकिस्तान को हराया और बंग्लादेश को आजाद कराया था. इस दौरान एक ब्रिज को भारत ने तोड़ दिया था.
8 दिसंबर 1971 को हवाई लड़ाई ने एक नया मोड़ ले लिया. IAF ने अपनी रणनीति बदली-फाइटर जेट्स ऊंचाई पर उड़कर PAF को लड़ाई में खींचने की कोशिश करते रहे, जबकि मुरिद, चकला और अटॉक रिफाइनरी पर एक बार फिर जोरदार हमले किए गए. इस दौरान एक ब्रिज भी एयर फोर्स ने तोड़ डाला था.
पूर्वी मोर्चे पर पूरा आसमान भारत के कब्जे में था. पाकिस्तानी एयरफोर्स के पूरी तरह गायब होने के बाद 55 मिशनों ने दुश्मन की जमीनी पोजीशन पर हमला किया, और सेना की तेज़ बढ़त के लिए अहम जगहों की फोटो खींची गईं.
पश्चिम में 118 एयर–लैंड ऑपरेशन उड़ाए गए, खासकर चंब सेक्टर में जहां दुश्मन नई पोज़िशन ले रहा था. शकरगढ़ बुल्ज और डीबीएन–फोर्ट अब्बास के बीच का इलाका भी निशाने पर था, और रात होते ही कैनबेरा व An-12 विमान लगातार ऑपरेशन करते रहे.
इससे पहले 6 दिसंबर 1971 को भारतीय वायुसेना ने दुश्मन पर दोबारा जोरदार हमला किया. 22 काउंटर-एयर मिशनों ने पाक एयरफील्ड्स को निशाना बनाया, और हंटर जेट्स ने अटॉक के तेल टैंकों को उड़ाकर दुश्मन की फ्यूल सप्लाई तोड़ दी.
राजस्थान में गर्व का पल आया जब स्वदेशी HF-24 मारुत ने एक सबरे फाइटर को मार गिराया-यह भारतीय विमानन इतिहास की बड़ी उपलब्धि थी. पश्चिम में PAF लगभग पीछे हट चुकी थी और पूर्व में दिखाई ही नहीं दे रही थी, इसलिए फोकस जमीन पर चल रही लड़ाई को तेजी से आगे बढ़ाने पर था.
सिंध में जमीनी ऑपरेशनों के लिए 150 से ज्यादा हवाई मिशन उड़ाए गए और पूर्व में 93 sorties ने युद्ध को दिशा दी. सांबा सेक्टर में 44 एयर-डिफेंस मिशनों ने हमारी सेना की सुरक्षा की, और पाकिस्तानी एयरफोर्स दूर रही-आसमान की तस्वीर अब पूरी तरह भारत के पक्ष में थी.