शहादत: 10 नवंबर की तारीख, वीरता की कहानी; CRPF के वीर जवानों को श्रद्धांजलि

CRPF Brave Soldiers Tribute: भारत की धरती हमेशा उन वीर जवानों पर गर्व करती है जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तक देश की रक्षा की. वहीं 10 नवंबर की तारीख भी देश के कई वीर जवानों की वीरता से भरी है. जिनमें BSF-CRPF के कई जांबाज सिपाहियों को Zee Bharat नमन करता है. 

 

CRPF Brave Soldiers Tribute:   जब भी देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा की बात आती है तो CRPF और BSF के बहादुर जवान फ्रंटलाइन योद्धा बनकर लोहा लेते हैं. आज हम कुछ ऐसे ही जवानों के वीरगाथा से रूबरू कराएंगे, जिन्होंने 10 नवंबर की तारीख को देश की रक्षा करते हुए अपनी कुर्बानी दी.

 

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भारत की धरती उन बहादुर जवानों से और भी खास बन गई है जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया. CRPF के जवानों ने हमेशा दिखाया है कि जब देश की बात आती है, तो वे अपनी जान की परवाह नहीं करते हैं. वहीं, BSF के जवानों ने भी अपना दमखम दिखाया और अपनी जान की परवाह किए बगैर देश की सुरक्षा के लिए जान की बाजी लगाई. ऐसे में, 10 नवंबर का दिन उन बहादुर जवानों को याद करने का दिन है, जिन्होंने हिम्मत और देश के लिए अपना सब कुछ दे दिया. ऐसे में आइए इन वीर जवानों को याद करते हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खात्मे के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया.

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असम के तिनसुकिया जिले में 10 नवंबर 2006 को 33 बटालियन सीआरपीएफ के जवान एक ऑपरेशन से लौट रहे थे. तभी सादिया थाना क्षेत्र के बुधगुड़ी गांव के पास विद्रोहियों ने IED विस्फोट कर हमला किया. विस्फोट से एक वाहन सीधे तौर पर प्रभावित हुआ और उसमें सवार कांस्टेबल बंशी लाल लौच घायल हो गए. घायल होने पर भी उन्होंने साथी जवानों के साथ मिलकर विद्रोहियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बंशी लाल लौच ने देश की सेवा में प्राण त्याग दिए थे. इस वीर बलिदानी को सीआरपीएफ बार-बार नमन करती है.  

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बारामुला जिले में ही 10 नवंबर 2007 को 177 बटालियन सीआरपीएफ के जवान एक ऑपरेशन चला रहे थे. तभी आतंकियों ने घात लगाकर हमला कर दिया. कांस्टेबल युमनन रोमियो मैतेई को गोली लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. घायल अवस्था में ही उन्होंने 17 राउंड फायर किए और आतंकियों को भागने पर मजबूर कर दिया. इस बहादुरी भरे कार्य के बाद वे शहीद हो गए. मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर सपूत को सीआरपीएफ बार-बार नमन करती है.  

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जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले के पट्टन बाजार में 10 नवंबर 2010 को 154 बटालियन सीआरपीएफ के जवान आतंकियों की किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए तैनात थे. भीड़ का फायदा उठाकर आतंकियों ने पिकेट पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इस हमले में हेड कांस्टेबल बलराम टिग्गा और हेड कांस्टेबल ओमप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे. घायल होने के बावजूद दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और जवाबी फायरिंग की. उन्होंने एक आतंकी को घायल कर दिया. अंत में दोनों वीर जवान मातृभूमि की रक्षा में शहीद हो गए. सीआरपीएफ इन बहादुरों को बार-बार नमन करती है.  

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इसी 10 नवंबर 1992 की तारीख को जम्मू-कश्मीर के मिरहोमा में, आतंकियों से लोहा लेते वक्त BSF जवान हेड कॉन्स्टेबल केसरी दास ने बहादुरी का परिचय दिया. हालांकि, आखिरी में देश की रक्षा करते हुए अपनी कुर्बानी दे दी. वे BSF के 78 बटालियन के बहादुर सिपाही थे. इसी रोज, यानी 10 नवंबर 1996 को BSF की 106 बटालियन के कॉन्सेटबल वीर भान सिंह ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में हिस्सा लिया. हालांकि मुठभेड़ के दौरान देश के खातिर अपनी जान की बाजी लगा दी. इन दोनों वीर सिपाहियों को BSF श्रद्धांजलि अर्पित करता है.