High Mountain Passes of India: भारत में कुछ ऐसे रास्ते हैं, जो ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच से गुजरते हैं. ये सिर्फ सड़के नहीं, बल्कि रहस्य और रोमांच से भरे पर्वत मार्ग हैं. इनमें से कुछ मार्ग तो दुनिया की सबसे ऊंची सड़कों में शामिल हैं.
High Mountain Passes of India: भारत के पर्वत मार्ग सिर्फ जगहें जोड़ने का काम नहीं करते, बल्कि ये इतिहास, रहस्य और चुनौती भी बताते हैं. कुछ मार्ग आपको ऊंचाई, ठंड, बर्फ और शानदार नजारों के बीच ले जाते हैं. कुछ मार्ग सेना और व्यापार के लिए बेहद जरुरी हैं, जबकि बाकी तीर्थयात्रिओं ले लिए. आइए आज हम आपको बताएंगे इन ऊंचे पहाड़ों के बारे में.
खारदुंग ला, जो लद्दाख में करीब 5,359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसे बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने बनाया और मेंटेन किया है. यह मार्ग 1988 में वाहनों के लिए खोला गया था. खारदुंग ला लेह को नुब्रा और श्योक घाटियों से जोड़ता है और सियाचिन ग्लेशियर तक जाने का मुख्य रास्ता है, इसलिए भारतीय सेना के सामान पहुंचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
जम्मू-कश्मीर का जोजी ला 3,528 मीटर ऊंचा है. यह श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है. 9 किलोमीटर का रास्ता बहुत खतरनाक है. बारिश में कीचड़, बर्फ में फिसलन होती है. ये जगह सेना के लिए जीवनरेखा है. ये गर्मियों में खुलता है. यह रास्ता कश्मीर घाटी को लद्दाख से मिलाता है. इसे ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था और बाद में बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने इसे सुधारा था.
सिक्किम का नाथू ला 4,310 मीटर ऊंचा है. गंगटोक से 54 किलोमीटर दूर, यह भारत-चीन सीमा पर है. पुराना सिल्क रूट का हिस्सा है. हफ्ते में कुछ दिन व्यापार होता है. यात्री यहां झंडा फहराते हैं. सेना की सख्त निगरानी होती है. रास्ता खड़ी चढ़ाई वाला है. यहां पर बहुत ठंड होती है, गर्म कपड़ो की जरुरत पड़ती है. यह भारत और चीन के बीच का खुला रास्ता है, इसलिए यह व्यापार और बातचीत के लिए बहुत जरूरी है. भारतीय सेना भी इसे सीमा पर सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल करती है.
हिमाचल का रोहतांग पास 3,978 मीटर ऊंचा है. मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ता है. 51 किलोमीटर का रास्ता हरा-भरा और बर्फीला है. गर्मियों में स्कीइंग, सर्दियों में बंद रहता है. भारी बारिश के कारण पहाड़ की मिट्टी फिसल जाने का डर रहता है. सरकार नया टनल बना रही है, जल्दी सफर आसान हो जाएगा.
उत्तराखंड का लिपु लेख पास 5,334 मीटर ऊंचा है. यह भारत को तिब्बत और नेपाल से जोड़ता है. कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता है. इस पर 80 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. घोड़े-खच्चर मदद करते हैं. मई-जून में खुलता है. रास्ता पत्थरों और नदियों से भरा है. श्रद्धालु यहां आशीर्वाद लेते हैं. ठंड और ऊंचाई से ध्यान रखना चाइए.
पर्वत मार्ग ऊंचे पहाड़ों के बीच बने ऐसे रास्ते होते हैं जो दूर के इलाकों और देशों को जोड़ते हैं. ये राते व्यापार, सेना और लोगों के आने-जाने के लिए बहुत जरुरी हैं. पुराने समय में इनसे नमक, ऊन और मसाले ले जाए जाते थे. आज ये यात्रिओं, ट्रेकिंग और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी जरुरी हैं.