भारत की 6 रहस्यमयी 'गंगा', हर बूंद अमृत के सामान; पानी में छिपा है खास रहस्य

Sacred Lakes of India: भारत की झीलें सिर्फ पानी की जगह नहीं हैं. यह धार्मिक और खास जगहें हैं. इनसे कई कहानियां भी जुडी हैं. पहाड़ों, रेगिस्तानों और मैदानों में बसी ये झीलें पवित्र मानी जाती हैं.

 

Sacred Lakes of India: भारत की झीलें सिर्फ पानी की जगह नहीं हैं. ये धार्मिक और खास जगहें हैं और इनके साथ कई कहानियां और रहस्य जुड़े हैं. कुछ झीलें देवताओं से जुड़ी हैं, कुछ झीलें के किनारे संत और ऋषियों ध्यान करते थे. ये झीलें शांति और पवित्रता देती हैं. आइए आज हम आपको बताएंगे भारत की कुछ सबसे खास झीलों के बारे में.

 

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पुष्कर झील भारत की सबसे पवित्र झीलों में से एक है. कहा जाता है कि यह भगवान ब्रह्मा के हाथ से गिरे कमल के फूलों से बनी थी. झील के चारों तरफ 52 घाट हैं, जहां पर भक्त स्नान करते हैं. लोगों का मानना है कि यहां स्नान करने से पाप धुल जाते हैं. हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों लोग यहां आते हैं और इसी समय पुष्कर ऊंट मेला भी आयोजित होता है.  

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मणिमहेश झील करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह मणिमहेश कैलाश शिखर के पास है, जिसे भगवान शिव का निवास माना जाता है. झील का पानी बर्फ से ढके शिखर की तरह चमकता है.  

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रेणुका झील (भगवान परशुराम की माता) पर रखा गया है. कहते है कि जब देवी की मृत्यु हुई, तो उन्हें झील में बदल दिया गया, ताकि उनकी मातृत्व भावना अमर रहे. यह हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील भी है. हर साल रेणुका मेला लगता है, जिसमें भक्त झील में स्नान करते हैं और लोग परशुराम और रेणुका की मूर्तियों की पूजा करते हैं.  

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हेमकुंड झील सात बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बसी है और सिखों और हिंदुओं दोनों के लिए पवित्र है. झील 15,200 फीट की ऊंचाई पर है. पास में गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब है, जो दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित है. कहा जाता है कि गुरु ने यहां ध्यान किया था.  

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सोमगो झील को त्सोमगो झील भी कहते हैं. यह झील 12,000 फीट से ऊपर है और ग्लेशियल झील है. हिन्दू और बौद्ध दोनों इसे पवित्र मानते हैं. बौद्ध भिक्षु इसे जीती जागती भविष्यवक्ता मानते हैं. हिन्दू इसे भगवान शिव से जुड़ी झील मानते हैं और त्योहारों पर पूजा‑अर्चना करते हैं.  

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नैनीताल झील शहर में स्थित है और इसकी पानी की रंगत पन्ना हरी है. यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. यहां का मानना है कि देवी सती की आंख (नैनी) यहीं गिरी थी, इसलिए झील का नाम नैनीताल पड़ा. झील के पास नैना देवी मंदिर है,जहां सालभर हजारों भक्त आते हैं.