भारत में यहां बनेगी 'हिमालय' जैसी पर्वतमाला? अफ्रीका में टूट रही प्लेटें बदलेंगी भूगोल; इन राज्यों पर होगा असर

Somali Nubian plate rift: अफ्रीका के नीचे धरती फट रही है. दो टेक्टोनिक प्लेटें अलग हो रही हैं. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यही दरार भविष्य में एक नए महासागर को जन्म दे सकती है. लेकिन इसका भारत से भी सीधा संबंध जुड़ रहा है. यही असली कहानी है.

Africa Somali Nubian plate rift: धरती के अंदर का भूगोल हर पल बदल रहा है. बाहर से भले कुछ स्थिर दिखे, लेकिन नीचे टेक्टोनिक प्लेटें लगातार धक्का-मुक्की कर रही हैं. इन्हीं प्लेटों की चाल ने कभी हिमालय बनाया था. और अब ताजी रिपोर्टें कह रही हैं कि अफ्रीका की जमीन एक बार फिर बड़े बदलाव से गुजर रही है.

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पूर्वी अफ्रीका में सोमाली प्लेट और नूबियन प्लेट तेजी से अलग हो रही हैं. यह प्रक्रिया कई मिलियन साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अब इसकी गति और संकेत इतने स्पष्ट हैं कि वैज्ञानिक कह रहे हैं कि आने वाले समय में यहां एक नया महासागर बनेगा. पर असल सवाल यही है, क्या इस बदलाव का असर भारत पर भी होगा? और क्या भविष्य में भारत के पास भी कोई नई पर्वतमाला बन सकती है? आइए पूरी कहानी समझते हैं.

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पूर्वी अफ्रीका में ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट सिस्टम वह जगह है जहां धरती दो हिस्सों में बांट रही है. एक तरफ नूबियन प्लेट है जो अफ्रीका के बड़े हिस्से को पकड़ती है. दूसरी तरफ सोमाली प्लेट है जो धीरे धीरे अलग हो रही है. यह दरार 3 हजार किलोमीटर से भी लंबी है और इथियोपिया, केन्या, तंजानिया और मोजाम्बिक से गुजरती है. जमीन कई जगहों पर सचमुच फट चुकी है. कहीं सड़क टूट गई, कहीं कुछ मीटर गहरी दरारें दिखीं.

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रिफ्ट की शुरुआत वैज्ञानिकों के मुताबिक लगभग 2.5 से 3 करोड़ साल पहले हुई थी. लेकिन पिछले कुछ दशकों में स्पीड बढ़ी है. GPS डेटा और ज्वालामुखी गतिविधि बताते हैं कि सोमाली प्लेट हर साल लगभग 7 मिलीमीटर नूबियन प्लेट से दूर जा रही है. यह कम लगता है, लेकिन भूगोल की दुनिया में यह बहुत तेज गति है.

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2023 और 2024 की रिपोर्टों में जियोफिजिसिस्ट्स ने बताया कि अफ्रीका के नीचे मैग्मा का दबाव बढ़ा है और रिफ्टिंग की प्रक्रिया अब अपने मिड ओशन रिज स्टेज के करीब पहुंच रही है. यानी वही प्रक्रिया जो कभी अटलांटिक महासागर बनाने में जिम्मेदार थी, अब फिर दोहराई जा रही है. साफ है, अफ्रीका में बदलती धरती भविष्य के भूगोल को नया आकार देने वाली है.

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भारत सीधे उस रिफ्टिंग से नहीं जुड़ा है, लेकिन इसका भूगर्भीय असर इंडियन प्लेट पर पड़ सकता है. अफ्रीका की प्लेट का दो हिस्सों में टूटना आसपास की प्लेटों पर तनाव बदलेगा. इंडियन प्लेट पहले ही सालाना लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ रही है, और इसी टक्कर से हिमालय ऊंचा होता जा रहा है. रिफ्टिंग की वजह से अफ्रीकी प्लेट का दबाव कम होते ही इंडियन प्लेट की टक्कर की दिशा और गति में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं.

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सीधे ‘सोमाली प्लेट’ भारत में पर्वत नहीं बनाएगी. पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जब प्लेटों का संतुलन बदलता है तो दूसरी प्लेटों के तनाव भी बदलते हैं. इंडियन प्लेट के नीचे डीकंप्रेशन या नए क्रस्टल मोशन पैदा हो सकते हैं, जिससे भारत के अंदर कुछ जगहों पर लंबी अवधि में ऊंचाई बढ़ने जैसी प्रक्रियाएं संभव हैं. यह आज नहीं, बल्कि दसियों लाख साल बाद भूगोल की शक्ल बदलते दिखेगी.

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जैसा कि इंडियन प्लेट हिमालय की तरफ धकेली जा रही है, हर भूगर्भीय परिवर्तन उसके तनाव को बदलता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि सबसे दूरगामी असर इस पर पड़ सकता है हर साल होने वाली सूक्ष्म गतिविधियों में मामूली बदलाव भूकंप की गतिविधियों के पैटर्न में हल्का परिवर्तन लंबी अवधि में भू-संरचना के उठने-गिरने वाले ट्रेंड्स हैं. ऐसे में, इनमें सबसे संभावित असर वाले क्षेत्र होंगे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख के अलावा, भारत का पश्चिमी इलाका होगा. जहां इंडियन प्लेट की टक्कर का असर सबसे सीधा पड़ता है.

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इस तरह की रिफ्टिंग प्रक्रियाएं करोड़ों सालों में धरती का नया नक्शा तैयार करती हैं. भारत पर इसका तात्कालिक कोई खतरा नहीं है. लेकिन यह वैज्ञानिकों के लिए मौका है कि वे समझ सकें कि प्लेटें कैसे चलती हैं, भविष्य में कैसा भूगोल बनेगा, और ऐसा कौन सा संतुलन है जो महाद्वीपों का आकार बदल देता है. हिमालय जैसे पर्वत भी कभी ऐसी ही भूगर्भीय चालों का नतीजा थे. भविष्य में दुनिया किस रूप में दिखेगी, ये उसी कहानी का अगला अध्याय है. Disclaimer: यहां दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. Zee Bharat इसकी पुष्टि नहीं करता है.