पाकिस्तान का ये शहर बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, बर्बादी की तस्वीर बयां कर रहे AQI आंकड़े

World's most polluted city: दुनिया में प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन पाकिस्तान का लाहौर आज एक खतरनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर चुका है. हवा में इतना जहर घुला है कि शहर सांस लेना भी एक जानलेवा बन गया है.

World's most polluted city: पाकिस्तान की हालत बद से बदतर होती जा रही है. हालिया रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान का एक शहर ऐसा भी है, जो दुनिया का सबसे प्रदुषित शहर बन चुका है. वहीं, पाकिस्तान में बढ़ती गर्मी और पानी की कमी खेती को नुकसान तो पहुंचा ही रही है. उधर कोहरा, जहर उगलते वाहन, भारी उद्योग और पराली बर्निंग मिलकर वह स्मॉग बनाते हैं जो एविएशन, सड़क यात्रा और स्वास्थ्य तीनों को खतरे में डाल रहा है. पाकिस्तान की यह समस्या अब सिर्फ मौसम की नहीं, बल्कि ऊर्जा नीति, खराब ईंधन, शहरी प्लानिंग और औद्योगिक नियमों की नाकामी की कहानी भी है.

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दुनिया में एक ऐसा शहर भी है. जहां सुबह उठो तो धूप तक नहीं दिखती, आसमान भूरे धुएं की चादर ओढ़े रहता है. यहां तक कि लोग मास्क पहनकर भी खांसते रहते हैं. यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि पाकिस्तान का असल हाल है. IANS की रिपोर्ट बताती है कि लाहौर अब दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन चुका है. जहर की इस हवा की वजह क्या है, कौन से शहर इसके बाद आते हैं, और किस तरह ये प्रदूषण पाकिस्तान की ज़िंदगी, अर्थव्यवस्था और मौसम पर हमला कर रहा है. आइए जानते हैं.

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स्विस एयर क्वालिटी मॉनिटर IQAir के ताज़ा रिकॉर्ड के मुताबिक, पाकिस्तान का लाहौर इस समय दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है. यहां का AQI 353 दर्ज हुआ, जो हवा में मौजूद जहरीले पार्टिकल्स की भयावह स्थिति की तस्वीर बया करता है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, शहर के कई हिस्सों में धुआं और स्मॉग इतना घना है कि यह सीधे लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है.

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IANS रिपोर्ट बताती है कि लाहौर अकेले नहीं है. क्वेटा सुबह के समय AQI 517 के साथ पाकिस्तान का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है. यह लेवल WHO के सुरक्षित मापदंडों से कई गुना ज्यादा है और सामान्य व्यक्ति के लिए भी नुकसानदेह है.

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रहीम यार खान, गुजरांवाला और फैसलाबाद में भी हवा की क्वालिटी बहुत खराब कैटेगरी में मापी गई है. वहीं, खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिणी पंजाब में भारी स्मॉग और कोहरे के कारण हालात इतने बिगड़े कि जमीन पर दिखने वाली विजिबिलिटी बेहद कम हो गई. जिसके पीछे की वजह. खराब क्वालिटी वाले डीजल का धुआं. खेतों में पराली जलाने की परंपरा. इंडस्ट्री का धुंआ. ठंड का मौसम और हवा का ठहराव वजह माने जा रहे हैं.

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कम विजिबिलिटी की वजह से मोटरवे के कई सेक्शन बंद करने पड़े. 2024 की सर्दियों में कई दिनों तक लाहौर स्मॉग कैपिटल बना रहा, जहां धुआं और कोहरा मिलकर एक घातक परत बना देते हैं. यह वही स्मॉग है जिसने शहर के स्कूलों, ऑफिसों और हेल्थ सेक्टर को परेशानी में डाल दिया है.

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कई बार लाहौर में वायु प्रदूषण का स्तर WHO की स्वच्छ हवा के मानक से 80 गुना अधिक रिकॉर्ड किया गया है. यह स्थिति दिखाती है कि पाकिस्तान का शहरी पर्यावरण किस हद तक खराब हो चुका है. लाहौर के अस्पतालों में अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और आंखों की जलन जैसी समस्याओं वाले मरीज लगातार बढ़ रहे हैं.

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IANS रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान की रैंक 15 है. ग्लोबल स्तर पर पाकिस्तान का स्थान 168वां है. वहीं, देश का Human Development Index (HDI) 0.544 है, जो कम श्रेणी में आता है. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि जलवायु और स्वास्थ्य दोनों ही मोर्चों पर पाकिस्तान की हालत कमजोर है.

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द डिप्लोमैट में पब्लिश जलवायु विशेषज्ञ अब्दुल वहीद भुट्टो के मुताबिक, पाकिस्तान का वन क्षेत्र लगातार कम हो रहा है. सिंधु डेल्टा में खारे पानी का घुसाव बढ़ रहा है. इससे मैंग्रोव जंगल, मछलियों की प्रजातियां और खेती तीनों को नुकसान हो रहा है. वहीं, समुद्र का लेवल बढ़ने से तटीय आबादी पर खतरा बढ़ा है. ऐसे में, यह बदलाव पाकिस्तान के इकोसिस्टम को धीमे-धीमे खत्म कर रहा है.