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उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक त्राहीमाम! बादलों के कहर से 4 दिन में 29 मौतें

सितंबर के आखिरी पड़ाव और अक्टूबर की शुरुआत में बादलों के बरसने का न सिर्फ खरीफ के उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा बल्कि रबी की बुआई में भी देरी हो सकती है. जिसका खामियाजा पहले से ही मंदी की मार झेल रही देश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ सकता है.

उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक त्राहीमाम! बादलों के कहर से 4 दिन में 29 मौतें

नई दिल्ली: सितंबर का महीना खत्म होने को जा रहा है और मॉनसून के बादल है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे है. मॉनसून के बादल अब मौत के दूत बन गए है. पुणे बाढ़ से कराह रहा है तो यूपी इंद्रदेव से रहम की गुहार लगा रहा है. लेकिन मॉनसून के बादलों ने बर्बादी मचाने की ठान रखी है. पिछले चार दिनों में लौटते हुए मॉनसून के बादल 29 लोगों से उनकी सांसे छीन चुके हैं.

पिछले साठ साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब सितंबर महीने के आखिर हफ्ते में भी मॉनसून के बादल उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक गरज रहे है. और जमकर बरस रहे है. लौटते हुए मॉनसून ने देश के कई हिस्सों में तबाही मचा दी है. 

यूपी में बारिश से दहशत

उत्तर प्रदेश में पिछले दो दिनों से बारिश थम नहीं रही है. लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर, देवरिया समेत यूपी के पूर्वांचल में पिछले 2-3 दिनों से भारी बारिश का दौर चल रहा है. लखनऊ और वाराणसी में तेज बारिश से स्कूल बंद कर दिए गए है. यूपी में अब तक बारिश की चपेट में आकर 9 लोगों की मौत हो चुकी है.

हैदराबाद में आसमान का प्रकोप

उत्तर ही नहीं दक्षिण में भी बादल आसमान से कहर बरसा रहे है. हैदराबाद में बाढ़ जैसे हालात हैं. भारी बारिश से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. बारिश से जुड़ी अलग-अलग दुर्घटनाओं में एक बुजुर्ग महिला समेत 3 लोगों की मौत हो चुकी है.

पुणे में पानी का कहर

महाराष्ट्र का पुणे भी इंद्रदेव के प्रकोप से जैसे कांप रहा है. पुणे में मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ के हालात है. बारिश के कारण हुए अलग-अलग घटनाओं में 17 लोगों की मौत हो चुकी है. मॉनसूनी बादलों के क्रोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को शहर के स्कूलों के साथ-साथ हवेली, भोर, पुरंदर और बारामती तहसीलों में अवकाश घोषित कर दिया. हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

आमतौर पर देश से मॉनसून की विदाई पश्चिमी राजस्थान से 1 सितंबर के आस-पास शुरू हो जाती है लेकिन इस बार बादलों के गुस्से का आलम ये है कि पुणे, हैदराबाद, लखनऊ, वाराणसी, भोपाल, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में अगले 2 दिनों तक मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है. 1 और 2 अक्टूबर को उत्तरी मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में तेज बारिश हो सकती है. इससे पहले इतनी देरी से मॉनसून की विदाई 1960 में हुई थी. उसके बाद 2007 में भी काफी देरी से मॉनसून का लौटना शुरू हुआ था जब उसकी विदाई की शुरुआत 30 सितंबर से हुई थी.

मॉनसून का असामान्य रूप से काफी देरी से लौटना अच्छा संकेत नहीं है खासकर किसानों के लिए. सितंबर के आखिरी पड़ाव और अक्टूबर की शुरुआत में बादलों के बरसने का न सिर्फ खरीफ के उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा बल्कि रबी की बुआई में भी देरी हो सकती है. जिसका खामियाजा पहले से ही मंदी की मार झेल रही देश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ सकता है.