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सदा सुहागन रहने के लिए इस बार कुछ ऐसे रखें करवा चौथ का व्रत

हिंदू पंचाग के अनूसार करवा चौथ कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाया जाता है. जो इस बार 17 अक्टूबर पड़ रहा है. करवा चौथ विशेषकर उत्तर भारत के राज्यों में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. यह पर्व एक पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और उसकी तरक्की के लिए रखती है. 

सदा सुहागन रहने के लिए इस बार कुछ ऐसे रखें करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ की व्रत विधि और कथा

नई दिल्ली: करवा चौथ के दिन महिलाओं को कई नियमों का पालन करना पड़ता है. पूजा करने से लेकर सरगी तक कई नियम होते हैं. जिसका पालन सही तरीके से करना होता है. मान्यता है कि नियमों के मुताबिक पूजा न करने पर करवा चौथ अधूरा माना जाता है.

क्यों करवा को सुनाई जाती है गणेश जी की कथा?
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरूआत गणेश जी के पूजा से की जाती है. और पुरानी कथाओं के अनूसार गणेश जी को यह वरदान भी प्राप्त है कि उनकी पूजा से शुभ काम शुरूआत होगी. ऐसा माना जाता है कि कोई भी कथा अकेले नहीं सुननी चाहिए इसलिए करवा के साथ गणेशजी की कथा सुनी जाती है. गणेश जी को बच्चे का रूप माना जाता है और विवाहिता खुद को पार्वती का रूप मानती हैं. इसलिए व्रती को उसकी सास व्रत रखने के लिए कहती है और यहीं परंपरा आगे पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है. ताकि सुहागन के सुहाग को एक पत्नी और एक मां की शक्ति मिल सके.

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ऐसे होती है व्रत की शुरुआत
सुबह सूरज उगने से पहले सास अपनी बहु को सरगी देती है. जिसमें कपड़े, सुहाग की चीज़ें जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि दी जाती है. इसके अलावा सरगी में खाने की चीजें दी जाती है जैसे फेनिया, ड्राईफ्रूट, नारियल आदि होते हैं. सास द्वारा दी गई सरगी से बहु अपने व्रत की शुरुआत करती है.
सुबह सूरज निकलने से पहले सास की दी हुई फेनिया बनाकर पहले अपने पितरों, गायों का हिस्सा अलग रख लिया जाता है. फिर व्रती अपने पति और परिवार के लोगों के लिए भी अलग से फेनिया निकाल देती है. उसके बाद सास के दिए हुए फ्रूट, ड्राईफ्रूट, नारियल खाकर व्रत की शुरुआत करती है.
पूरे दिन व्रत के बाद चांद निकलने से पहले सुहागन अपने सास के दिए गए कपड़े पहनकर व सज धज कर तैयार होती है और चांद का इंतजार करती है.

अर्घ्य देते समय पूजा की थाली में होनी चाहिए ये वस्तुएं
दिन में पूजा और कथा सुनने के बाद जब शाम को महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं तो उनकी पूजा की थाली मे छलनी, आटे का देशी घी का दीया, फल, ड्राईफ्रूट, मिठाई और दो पानी के लोटे रखते हैं. एक चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए व दूसरा पति को पानी और फिर पति व्रता को पानी पिलाए उसके लिेए. पति को पहले पानी इसलिए पिलाया जाता है क्योंकि पति को परमेश्‍वर माना जाता है. फिर पति को फ्रूट, ड्राईफ्रूट या मीठा खिलाया जाता है और उसके बाद पति के हाथों खुद भी मिठाई खा कर व्रत को खोला जाता है.

करवा चौथ के नियम
अर्घ्य देने जाए तो उस समय चुन्नी जरूर साथ ले कर जाना चाहिए. जिसे कथा सुनते समय पहनना होता है. छलनी में दीया रखकर चंद्रमा को देखकर फिर उसी छलनी से अपने पति को देखा जाता है. आटे के दीये को वहीं जलता हुआ छोड़ आएं.

क्या है करवा चौथ के पीछे की कहानी
कहानी बहुत पुरानी है. यूं तो हर जगह की अपनी एक अलग कहानी है लेकिन ज्यादातर जगहों पर करवा चौथ की यह कहानी सुनी जाती है. कहा जाता है कि एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी. सात भाईयों में एक बहन (वीरवती) होने की वजह से वो घर में सबकी लाडली थी. वीरवती शादी के बाद अपने पहले करवा चौथ पर मायके आती है और करवा चौथ का व्रत रखती है.

पहली बार करवा चौथ का निर्जल व्रत रखने से वीरवती चांद के इंतजार में व्याकुल हो उठी. सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की यह हालत देखी नहीं गई और उसने पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख दिया और दूर से देखने पर वह एकदम चांद की तरह प्रतीत हो रहा था. उसे देखते ही वीरवती ने अपना व्रत खोल लिया. जैसे ही उसने अपना व्रत खोला वीरवती को अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला. उसके बाद उसकी भाभी ने उसे सच्चाई से अवगत करावाया कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि वीरवती का करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटा जिससे देवता उससे नाराज हो गए और उन्होंने ऐसा किया. सच्चाई जानने के बाद वीरवती ने निश्चय कर लिया कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उसे पुनर्जीवित कर के रहेगी. वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रही.

साल बीत गया पर वीरवती ने हार नहीं मानी और देखते ही देखते करवा चौथ का दिन भी आ गया. वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' का आग्रह करती है. अंत में उसकी सबसे छोटी भाभी उसकी तपस्या को देख कर अपनी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत निकाल कर वीरवती के पति के मुंह में डाल देती है और उसका पति श्रीगणेश कहता जीवित हो जाता है.

कहा जाता है कि करवा चौथ हर सुहागन को पूरी निष्ठा भावना से रखना चाहिए.