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बहुत विशेष है इस बार की दीपावली, जानिए कब और कैसे पूजा करने से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न

धन और संपत्ति का आशीर्वाद लेकर आज दीपावली के दिन माता लक्ष्मी सभी ईश्वर भक्तों के घर विचरण करेंगी. आईए आपको बताते हैं वो खास उपाय जिसे अपनाने से माता लक्ष्मी सदा के लिए आपके घर में निवास करेंगी. 

बहुत विशेष है इस बार की दीपावली, जानिए कब और कैसे पूजा करने से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
पूरे देश में दीपावली का जश्न

नई दिल्ली: दीपावली को धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का त्योहार माना जाता है. दीप, सजावट, मिठाईयां और आतिशबाजी इसे भारत का सबसे प्रचलित त्योहार बनाते हैं. विदेशों में भी जहां भारतीय निवास करते  हैं वहां दिवाली की परंपरा अपने साथ लेकर जाते हैं. इस बार की दीपावली बेहद खास है. क्योंकि आज ऐसे ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं, जो पिछले 50 सालों में कभी नहीं बने. आईए आपको बताते हैं मां लक्ष्मी को खुश करके पूरे साल धन समृद्धि का वरदान पाने के लिए कैसे मनाएं दीपावली का त्योहार

बेहद दुर्लभ योग बन रहा है इस बार दीपावली पर
इस बार की दिवाली इसलिए खास है क्योंकि ज्योतिषीय योग के मुताबिक चन्द्रमा का तुला राशि में प्रवेश हो गया है और शुक्र पहले से ही तुला राशि में है. भाग्य और ऐश्वर्य देने वाले चंद्रमा और शुक्र का यह संयोग इससे पहले 50 साल पूर्व ही देखा गया था. ज्योतिष में इसे लक्ष्मी योग कहते हैं. यह अपार धन, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करता है. इस साल अमावस्या भी दो दिन रहेगी। 

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु कंबल का आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन. 

इस मुहुर्त में करें पूजन
इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या दिनांक 27 अक्टूबर 2019 को प्रदोषकाल में है. इसी दिन अमावस्या होने से दीपावली मनाई जाएगी। माता लक्ष्मी का पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या को स्थिरलग्न व स्थिरनवांश में किया जाना सर्वश्रेष्ठ होता है। इस वर्ष अमावस्या दोपहर 12:23 के पश्चात् आयेगी. 
दिवाकाल का श्रेष्ठ समय 
चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रात: 08:00 से दोपहर 12:10 तक है. 
शुभ का चौघड़िया दोपहर 01:33 से दोपहर 02:56 तक है. 
अभिजित् काल दोपहर 11:47 से दोपहर 12:35 तक रहेगा
पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रदोष काल है. जो कि संध्या 05:44 से रात्रि 08:11 तक चलेगा. इसी दौरान माता लक्ष्मी का पूजन कर लेना चाहिए. क्योंकि प्रदोष काल में ही पूजन करने से माता लक्ष्मी भक्तों के घर में स्थायी रुप से निवास करती हैं. 

पूजा विधि
स्वयं को पवित्र करें. पूजन स्थल पर रंगोली बनाएं. उसपर कच्चे चावल बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को आसन देकर विराजमान कराए. चारो तरफ दीपक जलाएं. इसके बाद पांच बार श्री गणेश जी का मंत्र पढ़ें. इसके बाद श्री सूक्त का पाठ करें. आखिर में भगवान श्रीहरि का पूजन करें. पूजन के बाद श्रद्धानुसार आरती और फिर हवन करें.

आज की रात्रि है अहोरात्रि
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को धन धान्य की देवी माता लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आज के दिन वह अपने पति भगवान श्रीहरि के साथ पृथ्वी पर विचरण करती हैं। उनके साथ देवताओं के खजांची कुबेर भी होते हैं. यही ऐसा पर्व है, जब त्रिदेवियां और त्रिदेव अपने समस्त कुल के साथ पृथ्वी पर आते हैं. आज की रात में सबसे अंत में महानिशाकाल में काली कुल की देवियां भी धरती पर आती हैं. इसलिए इसको सबसे बड़े पर्व की संज्ञा दी गई है.  कार्तिक मास की रात्रि को सबसे बड़ी अहोरात्रि कहा गया है. इस दिन रात्रि जागरण का भी विधान है.