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शनिदेव के इन 5 मंदिरों में पूजा करके दूर करिए ग्रह बाधा

कलियुग में शनिदेव का प्रभाव सबसे गहरा माना जाता है. उनकी नजर से कोई भी बच नहीं सकता है. बेहद जल्दी नाराज होने वाले शनिदेव बहुत ही जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं. आईए आपको बताते हैं भारत के 5 ऐसे मंदिर जहां पूजा करके आप शनिदेव को बहुत आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं-  

शनिदेव के इन 5 मंदिरों में पूजा करके दूर करिए ग्रह बाधा
कलियुग में शनिदेव हैं सबसे चमत्कारी

नई दिल्ली: शनि देव अपने भक्तों पर बेहद जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी हर गलती को क्षमा कर देते हैं. लेकिन इसके लिए भक्तों को उनके चरणों में अपना सबकुछ समर्पित कर देना पड़ता है. भारत में आज भी ऐसी कई जगहें हैं जहां शनि देव साक्षात् विराजमान होते हैं. ऐसी 5 प्रमुख जगहें हैं-

 1. शिंगणापुर में विराजमान शनिदेव
भारत में भगवान शनि के सबसे खास मंदिरों में सबसे पहले नाम आता है महाराष्ट्र के शिगंणापुर स्थित शनि मंदिर का. ये शनि मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर से करीब 35 कि.मी. दूर हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात है कि यहां पर शनि देव की प्रतिमा एक पत्थर की शिला के रुप में है और खुले आसमान के नीचे ऱखी है. मंदिर में कोई छत नहीं है. मान्यता के अनुसार यहां के गांव में किसी भी घर में ताला नहीं लगाया जाता है. माना जाता है कि सभी घरों की रक्षा खुद शनि देव करते हैं। इस मंदिर के दर्शन के लिए लाखों लोग हर वर्ष यहां आते हैं.

2. भावनगर में स्त्री रुप में विराजमान हैं शनिदेव
गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में भगवान हनुमान का एक प्राचीन मंदिर स्थित है. इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमानजी के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां भगवान हनुमान के साथ शनिदेव भी विराजित हैं. यहां पर शनिदेव स्त्री रूप में हनुमान के चरणों में बैठे दिखाई देते हैं. इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यदि किसी भी भक्त की कुंडली में शनि दोष हो तो कष्टभंजन हनुमान के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से सभी दोष खत्म हो जाते हैं.

3. उज्जैन का शनि मंदिर
मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन मानी जाती है. यह शहर मंदिरों की नगरी के नाम से भी मशहूर है. यहां भगवान महाकाल का प्राचीन मंदिर उपलब्ध है. लेकिन इसके साथ साथ यहां प्राचीन शनि मंदिर भी मौजूद है.  इस शनि मंदिर की खास बात है कि यहां शनि देव के साथ-साथ अन्य नवग्रहों की मूर्तियां भी हैं, जिसकी वजह से इसे नवग्रह मंदिर भी कहा जाता है। दरअलस शनि ही ऐसे देव है जिनकी गिनती ग्रह और देव दोनों में होती है.  उज्जैन के इस मंदिर में दूर-दूर से शनि भक्त दर्शन करने आते हैं.  इस मंदिर के पास से ही शिप्रा नदी भी बहती है जिसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है.

4. इंदौर में होता है शनि देव का 16 श्रृंगार
मध्यप्रदेश के इंदौर में भी भगवान शनि विराजमान है. यहां पर भी शनि का एक  खास मंदिर बना है. इस मंदिर की खास परंपरा यह है कि यहां शनिदेव का 16 श्रृंगार किया जाता है.  16 श्रृंगार करने की परंपरा शनि के किसी दूसरे मंदिर में नहीं की जाती है.  आम तौर पर शनि देव के सभी मंदिरों में उनकी प्रतिमा काले पत्थर की बनी होती है जिन पर कोई श्रृंगार नहीं होता. लेकिन यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां शनि देव का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है. उन्हें शाही कपड़े पहनाए जाते हैं.  इस मंदिर में शनि देव बहुत ही सुंदर रूप में नजर आते हैं. आस्था के चलते यहां भी हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं.

5. महादेव के साथ विराजमान शनि देव
तिरुनल्लर शनि मंदिर, तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है. माना जाता है कि जिन लोगों पर शनि का अशुभ प्रभाव होता है, वे यहां दर्शन के लिए आते हैं. शनि मंदिर, तिरुनल्लर शनिदेव को समर्पित तमिलनाडु के नवग्रह मंदिरों में से एक है. भारत में स्थित शनिदेव का यह सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने से शनि ग्रह के सभी बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल जाती है.