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रुस के राष्ट्रपति पुतिन का आज है जन्मदिन, जानिए उनके बारे में 5 खास बातें

रूस के अस्तित्व में आने के बाद से हमेशा राजनीति के केंद्रबिंदु रहे पुतिन पांच बार किसी न किसी तरह से गद्दी पर विराजमान रहे हैं. पुतिन के संबंध में यथार्थवाद के चिंतक मेकियावेली का सुप्रसिद्ध सिद्धान्त सटीक बैठता है. मेकियावेली ने कहा था कि "राजा( सत्तासीन) के अंदर शक्ति और धूर्तता दोनों ही गुणों का होना अति-आवश्यक है, तभी वो बेहतरीन शासक बन सकता है."

रुस के राष्ट्रपति पुतिन का आज है जन्मदिन, जानिए उनके बारे में 5 खास बातें
दुनिया के सबसे बड़े देश पर काबिज सबसे ताकतवर शख्स

नई दिल्ली: इसे रूस की किस्मत कहें या पुतिन के असाधारण लक्षण, शक्ति और धूर्तता ये दोनों ही गुण पुतिन में निहित हैं. 

1. सबसे बड़े सरकार विरोधी जन आंदोलन को कुचला

2000-2004 तक राष्ट्रपति पद पर रहने के बाद 2008 में जब तीसरी बार चुनाव में उतरने की ठानी तो रूस में  व्यापक आंदोलन उठ खड़ा हुआ। उस समय यह रूस के इतिहास का सबसे बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन था. हालांकि, पुतिन ने न सिर्फ इस आंदोलन को दबाया, बल्कि अपने विरोधी विपक्षी नेता अलेक्सी नावलानी को सदा के लिए चुप भी करवा दिया. पुतिन उदारवादियों के धुर-विरोधी साबित तब कर दिये गए जब इन्होंने दुनिया के सबसे अमीर इंसान मिखाइल खोड़ोकोर्टसकी को तक जेल में डलवा दिया. 

2. पुतिन के आक्रामक रवैये से रूस को मिला फायदा

7 अक्टूबर 1952 को जन्में पुतिन पहली बार 1999 में रूस के कार्यावाहक राष्ट्रपति बनाये गए, तब जब तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने इस्तीफा दे दिया. पुतिन ने एक इंटरव्यू में बताया कि बचपन में गरीबी के मारे वे दूसरों के घरों से चूहा पकड़ते थे, जिसके बदले उन्हें पैसे भी मिलते थे. मार्शल आर्ट और जूडो के शौकीन पुतिन बचपन से ही रूस के गुप्तचर सेवा केजीबी में शामिल होने का सपना पाले हुए थे,जो 1975 में  जा कर साकार हुआ. क्रीमिया को रूस में शामिल कराने से ले कर 2011 में चेचन्या पर नियंत्रण कसने तक, जैसी घटनाओं के बाद पुतिन के आक्रामक रवैये का लोहा वैश्विक स्तर पर मान लिया गया. 

3. पुतिन पर पत्रकार की हत्या कराने के भी हैं आरोप 

पर ऐसा नहीं है कि पुतिन का राजनीतिक सफर आसान रहा था. अपने पहले कार्यकाल में पनडुब्बी क़ुर्स्क के डूबने से हुई 118 नाविकों की मौत पर खूब आलोचना झेलनी पड़ी थी. इतना ही नहीं 7 अक्टूबर 2006 को एना पोलिटा कोव्यस्का नाम के एक पत्रकार की हत्या के आरोप से भी बड़ी मुश्किल से खुद को निकाला. दरअसल, एना पोलिटा ने चेचन्या में रूसी सेना के अनुचित और क्रूर आचरण व भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया था, जिसके बाद रूस में पुतिन के खिलाफ एक माहौल तैयार हो के लगा था. 

4. दुबारा सत्ता में आने के लिए नियम ही बदल डाले

रूस में 2011 के पहले कोई भी व्यक्ति तीसरी बार राष्ट्रपति पद की दावेदारी नहीं ठोंक सकता था, पुतिन ने 2011 में नियम ही बदल डाले. उन्होंने न सिर्फ तीसरे कार्यकाल को मान्यता दी, बल्कि 4 साल के राष्ट्रपति की अवधि को 6 साल तक कर दिया. लगभग तीन दशक से रूसी राजनीति के सितारे व्लादीमिर पुतिन 2 बार प्रधानमंत्री और 3 बार राष्ट्रपति रहे हैं.  इसके अलावा 16 साल गुप्तचर संस्था केजीबी के अधिकारी भी रहे हैं. 

5. कई खिताबों से नवाजे गए हैं पुतिन

पुतिन को साल 2006 में फ्रांस के उच्चतम सम्मान 'लीजन ऑफ ऑनर' से सम्मानित भी किया गया है. इसके अलावा 2007 में विश्व के रसूखदार व्यक्तियों के बीच इन्हें "टाइम पर्सन ऑफ द ईयर" के सम्मान से नवाजा भी गया है. 2011 में किर्जिस्तान के एक सांसद तियाँ शान ने पहाड़ के एक शिखर का नाम 'पुतिन पीक' रखने का निर्णय तक कर लिया था. 2011 में चेचन्या को रूस में शामिल कराने के लिए कन्फ्यूसियस शांति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है.