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अगर जीत मिली... तो क्या आदित्य ठाकरे का सीएम बनना तय है?

शिवसैनिकों ने अपना रुख साफ कर दिया है. कि वो आदित्य को डिप्टी सीएम नहीं, बल्कि बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. ऐसे में अगर शिवसेना और बीजेपी में रार के हालात पैदा हो सकते हैं.

अगर जीत मिली... तो क्या आदित्य ठाकरे का सीएम बनना तय है?
Photo Courtesy: Twitter

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना के साथ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर अभी तक तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हुई है. सीट शेयरिंग को लेकर दोनों पार्टियों के नेताओं ने खींचतान के खत्म होने की बात को कर दी है, लेकिन दोनों ही पार्टी के के रवैये को देखकर ये कहना तो मुनासिब नहीं लग रहा है कि सबकुछ ट्रैक पर आ चुका है.

दरअसल, कुछ पेंच अब भी हैं जिन पर दोनों पार्टी के सीनियर लीडर माथापच्ची कर रहे हैं. लंबी सियासी रस्साकशी के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे की डील के फाइनल होने की बात कही जा रही है. लेकिन सीएम कौन बनेगा? ये वाकई बड़ा सवाल है, क्योंकि शिवसेना सीएम पद के लिए कोई भी समझौता करने को बिल्कुल तैयार नहीं है.

शिवसेना ने दिया बड़ा संकेत

ऐसा ही कुछ संकेत शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने दिए हैं. उनका कहना है, 'कुछ तकनीकी खामी की वजह से भले ही चंद्रमा पर लैंड करने में सफल नहीं रहा, लेकिन आदित्य ठाकरे 21 अक्टूबर को मंत्रालय (मुख्यमंत्री कार्यालय) की छठी मंजिल पर पहुंचने में सफल रहेंगे.'

संजय राउत के इस बयान से काफी कुछ साफ हो जाता है, भले ही महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ये कह लें, कि चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे संबंधी समझौते को अंतिम रूप दे दिया है. लेकिन सीएम की कुर्सी पर बीजेपी कुछ भी नहीं बोल रही है, जबकि शिवसेना खुले तौर पर ठाकरे खानदान के तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया है.

मुख्यमंत्री पद के लिए पेंच इसलिए और फंस गया है क्योंकि पहली बार ठाकरे परिवार से कोई चुनाव मैदान में उतरने जा रहा है. आपको बता दें, उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे वर्ली सीट से चुनाव लड़ेंगे. आदित्य ठाकरे ने शिवसेना के एक बड़े कार्यक्रम में इसका ऐलान किया. और पूछा कि अगर आपकी इजाजत हो तो शिवजी महाराज और सभी महापुरुषों की अनुमति से मैं चुनाव लड़ने की घोषणा करता हूं.

बीजेपी ने रखा है ये ऑफर

माना जा रहा है कि चुनाव जीतने की सूरत में बीजेपी आदित्य ठाकरे को डिप्टी सीएम का पद देने के लिए राज़ी है. लेकिन शिवसैनिकों ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. कि वो आदित्य को डिप्टी सीएम नहीं, बल्कि बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. लेकिन आदित्य को सीएम की कुर्सी पर बैठाना इतना आसान नहीं होगा, जिसनी आसानी से बातें हो रही हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि महाराष्ट्र में बीजेपी का भी अपना दबदबा है. शिवसेना के पुराने नेताओं को हमेशा मलाल रहता है कि 90 के दशक में बीजेपी बाला साहेब ठाकरे से ज्यादा सीटों की गुहार लगाती थी और अब शिवसेना बीजेपी की दया पर निर्भर है.

सीट बंटवारे में कितनी मुश्किलें?

गठबंधन के लिए सीट बंटवारे का फॉर्मूला आसान नहीं होगा. माना जा रहा है कि एनडीए के छोटे सहयोगी दलों मसलन आरपीआई (आठवले), राष्ट्रीय समाज पक्ष, शिव संग्राम और रायत क्रांति को बीजेपी अपने कोटे से सीटें देगी. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी विधान परिषद में शिवसेना को दो से तीन सीटें दे सकती है. 

शिवसेना के लिए बढ़ती बगावत को रोकना भी बड़ी चुनौती है. सीट बंटवारे में कई सीटें बीजेपी को जाने की आशंका से नाराज़ नवी मुंबई की बेलापुर और ऐरोली के कई शिवसैनिकों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है. सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के कोटे में मानखुर्द, मुलुंद, भायखला, मुंबादेवी, मालेगांव, भिवंडी और औरंगाबाद सेंट्रल जैसी मुश्किल सीटें आ सकती हैं. अगर ऐसा हुआ तो ये शिवसेना के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. क्योंकि इन विधानसभा क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय का बड़ा वोट बैंक होने की वजह से गठबंधन को सीट निकालने में मुश्किल आ सकती है. बड़ा सवाल ये है कि क्या शिवसेना इन सीटों के लिए तैयार होगी.

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ते हुए बीजेपी ने 122 और शिवसेना ने 63 सीटें जीती थीं.

हालांकि बाद में सीएम देवेंद्र फडणवीस को समर्थन देते हुए शिवसेना सरकार में शामिल हो गई थी. वैसे ये पहली बार नहीं जब शिवसेना इस तरह के तेवर दिखा रही है. हर चुनाव से पहले शिवसेना का रवैया ऐसे ही रहा है. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. पीएम मोदी की लोकप्रियता, लोकसभा चुनाव में बंपर जीत औऱ जम्मू कश्मीर से 370 खत्म करने के बाद बीजेपी के पक्ष में हवा का एहसास शिवसेना को भी है. ऐसे में शिव सेना को सीएम पद मिलेगा इसकी उम्मीद फिलहाल तो कम ही दिखाई दे रही है. तो क्या आदित्य ठाकरे को डिप्टी सीएम के पद से ही संतोष करना पड़ेगा, ये आने वाले 24 अक्टूबर को ही मालूम चल पाएगा.