मीराबाई चानूः जंगल से लकड़ियां उठाने वाली लड़की जिसने ओलंपिक में रच दिया इतिहास, जानिए सिल्वर गर्ल की स्टोरी

मीराबाई का जन्म 8 अगस्त 1994 को नोंगपोक काकचिंग, इंफाल, मणिपुर में एक मैतेई हिंदू परिवार में हुआ था.   

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 24, 2021, 12:39 PM IST
  • भारत के पदकों का खाता खुला
  • रियो ओलंपिक में मिली थी निराशा
मीराबाई चानूः जंगल से लकड़ियां उठाने वाली लड़की जिसने ओलंपिक में रच दिया इतिहास, जानिए सिल्वर गर्ल की स्टोरी

Tokyo Olympics 2020, mirabai chanu, weightlifting, silver medal: जापान के टोक्यो ओलंपिक के दूसरे दिन ही भारत की मीरा बाई चानू ने देश के लिए पहला मेडल जीत लिया है. 26 साल की मीरा बाई ने 49 किलोग्राम की कैटिगरी में सिल्वर मेडल हासिल किया है. वह भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं. बता दें कि वह क्लीन एंड जर्क केटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं. यही वजह है कि भारत को मीराबाई से काफी उम्मीदें थीं अब मीराबाई इन उम्मीदों पर खरी उतरी हैं. आइए जानते हैं मीराबाई की जिंदगी के कुछ अनसुने किस्से...

जंगल से लकड़ियां लेकर आती थीं चानू?
मीराबाई का जन्म 8 अगस्त 1994 को नोंगपोक काकचिंग, इंफाल, मणिपुर में एक मैतेई हिंदू परिवार में हुआ था. उसके परिवार ने कम उम्र से ही उसकी ताकत की पहचान कर ली थी जब वह सिर्फ 12 साल की थी. वह आसानी से जलाऊ लकड़ी का एक बड़ा बंडल अपने घर ले जा सकती थी जिसे उसके बड़े भाई को उठाना भी मुश्किल था. उनकी इस ताकत को देखते हुए उन्हें वेटलिफ्टिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया गया.

रियो में रहीं थी असफल
21 साल की उम्र में, वह एन कुंजारानी देवी के 192 किग्रा की संयुक्त लिफ्ट के साथ 190 किग्रा भार उठाने के रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद रियो 2016 गई थीं लेकिन वह असफल रहीं. उन्होंने रियो ओलिम्पिक स्नैच इवेंट में 82kg वजन उठाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया लेकिन वो क्लीन एंड जर्क में पहले प्रयास में 103kg वजन उठाने में असफल रहीं थी. 

लेकिन शानदार प्रदर्शन रखा जारी

रियो ओलंपिक में भले ही चानू को सफलता नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा. ताशकंत में हुई एशियाई चैम्पियनशिप में उन्होंने 119kg वजन उठाकर सबको हैरान कर दिया. स्नैच में वह 86kg वजन उठाने में सफल रही थीं. इस तरह उन्होंने कुल 207kg वजन उठाया. उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी और तब से वह लगातार शानदार प्रदर्शन दिखा रही हैं. 

जीत चुकी हैं कई मेडल
चानू ने 2014 राष्ट्रमंडल खेलों, ग्लासगो में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था. उन्होंने गोल्ड कोस्ट में आयोजित कार्यक्रम के 2018 संस्करण में स्वर्ण पदक के रास्ते में खेलों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2017 में आई जब उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के अनाहेम में आयोजित विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता.

पद्मश्री और कई खेलों से सम्मानित
2014 से 48kg वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में नियमित उपस्थिति चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में विश्व चैंपियनशिप और कई पदक जीते हैं. खेल में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. उन्हें वर्ष 2018 में भारत सरकार द्वारा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

क्यों खास है चानू का मेडल
टोक्यो ओलंपिक में चानू का मेडल इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वेटलिफ्टिंग में उन्होंने 21 साल का सूखा खत्म किया है. ओलंपिक के इतिहास में वेटलिफ्टिंग में भारत के पास फिलहाल एक ही मेडल है, जो कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 में सिडनी में हुए ओलिम्पिक खेलों में प्राप्त किया था. वह देश के लिए व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले पहली महिला खिलाड़ी रहीं. तब उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था.

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