Happy Birthday Sachin Tendulkar: मन से ना हारने वाले को सचिन कहते हैं

वो कहावत है न, हार के जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं. अगर क्रिकेट के 'भगवान' की बात करें, तो मन से ना हारने वाले को सचिन कहते है. वैसे तो सचिन रमेश तेंदुलकर ने अपनी जिंदगी में कई हार का सामना किया, मगर पराजय को सचिन ने हथियार की तरह इस्तेमाल किया और पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना दिया. वो आज 48 साल के हो गए हैं, Happy Birthday Sachin

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Apr 24, 2021, 04:42 AM IST
  • सचिन बनने का सफर आसान नहीं था, जज्बे ने दिया मुकाम
  • सचिन के नाम है क्रिकेट से जुड़े सबसे अधिक और बड़े कीर्तिमान
Happy Birthday Sachin Tendulkar: मन से ना हारने वाले को सचिन कहते हैं

Sachin Ramesh Tendulkar Birthday Special: सचिन रमेश तेंदुलकर... ये महज एक खिलाड़ी का नाम नहीं है. इस शख्स ने हर उस चुनौती को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, जिसने पीछे धकेलने की कोशिश की. रुकना नहीं, झुकना नहीं का मंत्र लेकर आगे बढ़ने वाले सचिन ने हार को हराकर जीत को भी अपना दीवाना न जाने कितनी बार बनाया.

वैसे तो सचिन की जिंदगी में कई ऐसे मौके आए जब ऐसा लगा कि सचिन अब बस अन्य खिलाड़ियों की तरह चुनौतियों के सामने सरेंडर या Give-up करने ही वाले हैं, मगर उन्होंने अपनी मुसीबतों का असर अपनी मेहनत पर जरा भी नहीं पड़ने दिया. बस वो बढ़ते चले गएं और देश के सबसे बड़े सम्मान 'भारत रत्न' के हकदार बन गए.

नाकामियों को नहीं होने दिया हावी

कहते हैं ना पत्थर से मूर्ति बनने के लिए भी हथौड़े की मार सहनी पड़ती है. हर मंजिल को पाने के लिए घोर तपस्या करनी पड़ती है. सचिन के साथ भी कुछ ऐसा ही था. चलिए आपको सिलसिलेवार तरीके से समझाते हैं कि मन से ना हारने वाले को आखिर क्यों सचिन कहते हैं.

तारीख 14 दिसंबर, 1989 और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे एक टेस्च मैच का पांचवां यानी आखिरी दिन था. वो पिच 'हरी' थी, तेज गेंदबाजों को जिसका काफी फायदा मिल रहा था. वसीम अकरम, इमरान खान और वकार युनुस की खतरनाक गेंदबाजी के चलते गेंद में काफी उछाल आ रही थी. पाकिस्तान के खूंखार गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया.

इसी बीच वकार युनुस गेंदबाजी करने आते हैं और छोटे कद और छोटे उम्र वाले सचिन तेंदुलकर उनकी कई गेंदें खेल नहीं पा रहे थे. इतने में वकार ने सचिन को घूरकर देखा. अगली ही गेंद सचिन तेंदुलकर की नाक पर लगी. 

गेंद सीधी सचिन के नाक पर लगी और नाक से खून बहने लगा. दूसरी छोर पर खड़े नवजोत सिंह सिद्धू ने सचिन से कहा कि बेटा तुम रिटायर हर्ट हो जाओ, बाद में आ जाना. सचिन ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्होंने कहा- मैं खेलेगा... सचिन ने मेडिकल टीम को वापस भेज दिया. अगली गेंद पर सचिन ने चौका मार दिया. फिर क्या था 15 साल के सचिन तेंदुलकर ने 57 रनों की पारी खेली.

ये सचिन के करियर का सबसे यादगार मैच माना जाता है. हालांकि सचिन जब-जब मैदान पर उतरते थे, मैच खुद ब खुद यादगार हो जाता था. मगर यहां एक बात गौर करने वाली बात है. अगर 14 दिसंबर 1989 को सचिन उस वक्त मैदान से वापस लौट जाते, तो शायद आज सचिन ने वो महारत नहीं हासिल कर पाई होती.

सचिन के क्रिकेट करियर का शुरुआती दौर उन्हें हर दिन और मजबूत कर रहा था, लेकिन 1994 में सचिन तेंदुलकर ने काफी मुसीबत का सामना किया. वो लगातार बैटिंग में अच्छा प्रदर्शन कर पाने में नाकाम हो रहे थे. सचिन को लेकर काफी असमंजस बनने लगे, लेकिन उन्होंने बॉलिंग के दम पर अपने उस बुरे वक्त में जगह बचाई.

सचिन के आउट होते ही घरों में टीवी बंद

क्रिकेट के चाहने वालों में सचिन की दीवानगी बेहद बढ़ती जा रही थी. स्थिति ये आई कि 1999 में मैच फिक्सिंग का दौर आया. कई भारतीय खिलाड़ियों पर उंगली उठनी शुरू हो गई. देश में हर कोई इस खेल को लेकर तरह-तरह की बातें करने लगा था. मगर कई दिग्गजों ने साफ-साफ शब्दों में ये टिप्पणी कर दी कि सचिन के बारे सवाल ही खड़ा नहीं होता है.

मतलब साफ है, जिस वक्त पूरी टीम पर फिक्सिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे, उस वक्त भी अकेले सचिन ने पूरी टीम का भार अपने कंधे पर ढोया. हाल तो ये हो गया था कि उस वक्त बहुत से दर्शक सिर्फ सचिन की ही बैटिंग देखने के लिए मैच देखते थे. स्थिति ये आ गई थी कि सचिन आउट तो टीवी बंद..

मैदान पर जितनी सचिन के शतक और शानदार बैटिंग की छाप छूटती थी, उतना ही सचिन की इंजुरी की खबरें सामने आती थी. न जाने कितनी बार सचिन को तरह-तरह की ऐसी तकलीफों का सामना करना पड़ा. 1999 में पीठ दर्द की समस्या के चलते सचिन के परफॉर्मेंस में काफी असर पड़ा था. सचिन के आउट होते ही टीम हार जाती थी. 

ऐसा नहीं है कि भारतीय क्रिकेट टीम में सचिन में बिना कुछ नहीं होता था. 10 प्लेयर्स भी अपनी पूरी ताकत झोंकते जरूर थे. लेकिन सचिन के बिना मानों सब अधूरा सा हो जाता था. 2003 का विश्व कप इस बात का सबसे बड़ा गवाह है. भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया, सचिन ने पूरे विश्वकप में सबसे ज्यादा रन बनाकर गोल्डेन बैट हासिल किए थे, पर अफसोस फाइनल में सचिन सिर्फ 4 रन पर ही आउट हो गए थे. सचिन के जाते ही पूरी टीम लड़खड़ा गई. अंजाम हार...

20 साल बाद पूरा हुआ सचिन का ख्वाब

भारत ने 2011 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के खिताब को अपने नाम किया, उस वक्त सचिन तेंदुलकर टीम के हिस्सा थे. सचिन ने अपने इस ख्वाब को सच होते हुए अपनी आंखों से देखा और उस वक्त उन्होंने कहा कि 'मैंने इस सपने को पूरा करने के लिए 20 साल का इंतजार किया है. सपने पूरे होते हैं और आज मैं इसका सबसे बड़ा गवाह हूं.'

विश्व कप जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर को पूरी टीम ने अपने कंधे पर उठाकर क्रिकेट ग्राउंड का चक्कर लगाया था. और उस वक्त सचिन तिरंगे को ओढ़कर देशभक्त के रंग में सराबोर थे.

महान क्रिकेटर, क्रिकेट का भगवान, मास्टर-ब्लास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर के जज्बे और हौसले को पूरी दुनिया सलाम करती है. सचिन ने ये साबित किया है कि अगर जिंदगी में एक सफल व्यक्ति बनना है, तो सिर्फ एक ही मंत्र है कर्म, मेहनत, लगन, सहनशीलता, शालीनता ऐसे हजारों गुणों को अपने जीवन में उतारकर ही एक व्यक्ति महान बनता है.

पिता की मौत के बाद भी सचिन ने कुछ इस तरह...

सचिन के लिए क्रिकेट ही सबकुछ है, उन्होंने इस बात को खुद साबित किया है. वो दौर वर्ल्ड कप का था, जब सचिन के पिता का स्वर्गवास हो गया था. वो इस बात की खबर पाते ही घर आए, पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और वापस अपने देश के लिए खेलने पहुंच गए. उसके अगले ही दिन वाले मैच में सचिन ने शतक जड़कर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की.

कीर्तिमान के किंग हैं मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर

सचिन ने ढ़ेर सारे रिकॉर्ड्स तोड़े और सैकड़ों रिकॉर्ड्स पहली बार बनाए. रिकॉर्ड की कतार बहुत लंबी है, लेकिन कुछ तो वाकई अहम है.

* सचिन ने अपने इंटरनेशनल करियर में 100 शतक तो मारे हैं, लेकिन उसमें 49 वनडे और 51 टेस्ट क्रिकेट में है
मीरपुर में 16 फरवरी 2012 को बांग्लादेश के खिलाफ 100वां शतक जड़ा, पूरा का पूरा स्टेडियम झूम उठा
सचिन तेंदुलकर करीब 20 बार 90 से 99 रन के बीच आउट हो गए. हर बार वो निराश होकर ग्राउंड से वापस आते थे
24 फरवरी 2010 सचिन तेंदुलकर ने अपने एक दिवसीय क्रिकेट के 442वें मैच में 200 रन बनाकर ऐतिहासिक पारी खेली
वनडे इंटरनेशनल मुकाबले में सचिन ने ही सबसे अधिक 18000 से अधिक रन का रिकॉर्ड अपने नाम कर रखा है
वनडे इंटरनेशनल विश्व कप मुकाबले में सचिन ने साल 2003 के वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 673 रन बनाए थे
वनडे में सबसे अधिक बार सचिन को मैन ऑफ द सीरीज और मैन ऑफ द मैच से नवाजे जाने का रिकॉर्ड है
इंटरनेशनल मैचों में सबसे ज्यादा 30000 रन बनाने का कीर्तिमान सचिन के नाम ही है

सचिन को खेलते वक्त देखकर हर देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था. मैदान में हर खेल से पहले और हर कीर्तिमान के तुरंत बाद सचिन रमेश तेंदुलकर अपने सिर को आसमान की तरफ उठाते थे, आंखों को बंद करते. सचिन ने बताया था कि वो आसमान में सूरज भगवान को नमन करते हैं.

सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) जब भी पिच पर सामने वाली टीम को जवाब देना चाहते थे, तो वो अपने बल्ले के कमाल से देते थे. हर कीर्तिमान को हासिल करने के बाद वो अपने हेलमेट पर लगे तिरंगे को चूमते और फिर ये साफ कर देते थे कि वो भारत के सपूत हैं, जो देश का मान ऐसे ही बढ़ाता रहेगा. मैदान पर पूरा देश सचिन को बहुत 'मिस' करता है, क्योंकि सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक है, सिर्फ एक..

जो क्रिकेट का भगवान है! ...यूं ही नहीं महान बन गए सचिन तेंदुलकर, जानिए 'सफलता का मंत्र'

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