Tokyo Olympic: जो हार कर जीते उसे 'अहमद' कहते हैं, जानिए 18 वर्षीय तैराक के इतिहास रचने की कहानी

बचपन में हम सभी ने कछुआ और खरगोश की दौड़ वाली कहानी जरूर सुनी होगी. जिसमें कछुआ की लगन ने उसे जीत दिलाई थी. बस ऐसी ही कुछ कहानी अहमद की भी है.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 27, 2021, 11:01 AM IST
  • जानिए इस तैराक की कहानी
  • टोक्यो ओलंपिक में रचा इतिहास
Tokyo Olympic: जो हार कर जीते उसे 'अहमद' कहते हैं, जानिए 18 वर्षीय तैराक के इतिहास रचने की कहानी

नई दिल्लीः उम्र महज एक आंकड़ा होता है, ये बात जापान के शहर टोक्यो में चल रहे ओलंपिक गेम्स के दौरान देखने को मिलती है. जहां कभी 13 साल की बच्ची तो कभी 56 साल के बुजुर्ग ने अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया है. ऐसी ही एक कहानी है अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया के तैराक अहमद हफनोई की जिन्होंने महज 18 साल की उम्र में  इतिहास रच दिया है. 400 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही वे टोक्यो ओलंपिक में ऐसा करने वाले पहले अफ्रीकी एथलीट बन गए हैं. आइए जानते हैं क्यों खास है अहमद का ये गोल्ड मेडल...

क्वालीफाइंग में सबसे धीमे ओलंपिक में सबसे तेज
बचपन में हम सभी ने कछुआ और खरगोश की दौड़ वाली कहानी जरूर सुनी होगी. जिसमें कछुआ की लगन ने उसे जीत दिलाई थी. बस ऐसी ही कुछ कहानी अहमद की भी है. दरअसल, अहमद क्वालीफाइंग राउंड में सबसे धीमे तैराक साबित हुए थे, लेकिन जब बारी टोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शन की आई तो उन्होंने हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हुए फाइनल राउंड में गोल्ड मेडल जीत लिया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिकी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया, जिनका तैराकी की दुनिया में एक लंबा इतिहास रहा है.

आठवें से पहले स्थान पर कब्जा
अहमद फाइनल राउंड में जाने वाले वे सबसे धीमे तैराक थे यानी क्वालीफ़ाइंग राउंड में वे आठवें स्थान पर थे. इस वजह से उन्हें आउटर लेन में जगह मिली थी, जहां से किसी तैराक के लिए जीतना मुश्किल होता है. लेकिन फ़ाइनल राउंड की तैराकी में वे क्वालीफ़ाइंग राउंड के प्रदर्शन को कहीं पीछे छोड़ चुके थे. उन्होंने तीन मिनट 43.36 सेकेंड के साथ गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा जमाया. 

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खुद भी रह गए थे हैरान
अहमद ने गोल्ड मेडल जीतने के बाद कहा कि पहले तो मैं फ़ाइनल में पहुंचकर ही अचरज में था और अब गोल्ड मेडल जीत कर हैरान हूं. जब मैंने वॉल को टच किया तो सबसे पहले ख़ुद को देखा. मैं अचरज से भरा हुआ था. मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. अहमद हफ़नोई ओलंपिक में तैराकी में गोल्ड मेडल जीतने वाले ट्यूनीशिया के दूसरे एथलीट है. उनसे पहले यह करिश्मा डबल चैम्पियन ऑस मेलुली ने किया है जो टोक्यो में 10 किलोमीटर मैराथन तैराकी इवेंट में हिस्सा लेंगे.

झंडे को देखा तो फफक पड़े
किसी भी खिलाड़ी की जिंदगी का शायद सबसे खुशनुमा पल वही होता है जब उसके प्रदर्शन की बदौलत उसके देश का झंडा ऊपर लहराता है. अहमद ने पहला गोल्ड मेडल जीतने के बाद कहा, "जब मैंने अपने देश के झंडे को देखा तो मेरी आंखों में आंसू आ गए थे, पीछे देश का राष्ट्रीय गान बज रहा था.

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