इंग्लैंड की 'हत्या' से जुड़ी है एशेज की कहानी, चौंका देगा 139 साल पुराना किस्सा

कई बार दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त जुबानी जंग भी देखी गई है क्योंकि इसका इतिहास 'हत्या' से जुड़ा है. 

Written by - Adarsh Dixit | Last Updated : Dec 7, 2021, 05:31 PM IST
  • 29 अगस्त ने बदल दिया इतिहास
  • चौंका देगा 139 साल पुराना किस्सा

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इंग्लैंड की 'हत्या' से जुड़ी है एशेज की कहानी, चौंका देगा 139 साल पुराना किस्सा

नई दिल्ली: एशेज सीरीज का आगाज 8 दिसंबर से ब्रिसबेन के गाबा मैदान पर हो रहा है. दोनों टीमों के लिए ये सीरीज किसी युद्ध से कम नहीं होती.

हर टीम के खिलाड़ी पूरे जोश और जुनून के साथ एक दूसरे के खिलाफ मैदान पर उतरते हैं. कई बार दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त जुबानी जंग भी देखी गई है क्योंकि इसका इतिहास 'हत्या' से जुड़ा है. 

हम आपको बताते हैं कि एशेज सीरीज का इतिहास क्या है और किन परिस्थितियों में इस सीरीज की शुरुआत की गई थी. 

इस तरह पड़ा एशेज नाम

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच होने वाली इस चर्चित सीरीज का नाम एशेज क्यों पड़ा, इसके पीछे एक बड़ी वजह है. दरअसल ये कहानी शुरू होती है 1882 से. अगस्‍त, 1882 में ऑस्‍ट्रेलियाई टीम इंग्‍लैंड के दौरे पर थी. क्रिकेट का जन्म जिस देश में हुआ उस इंग्‍लैंड का जलवा इस खेल में उस समय चरम पर था. 

29 अगस्त ने बदल दिया इतिहास

29 अगस्‍त वह दिन था जब लंदन के ओवल मैदान पर ऑस्‍ट्रेलिया को इंग्‍लैंड में पहली जीत का स्‍वाद चखने को मिल ही गया. इससे पहले कभी यहां पर कंगारुओं को जीत नहीं मिली थी. हैरत की बात ये है कि इस टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत लगभग तय नजर आ रही थी लेकिन अचानक कंगारुओं ने मैच में वापसी की और जीत हासिल की. इंग्लैंड की धरती पर पहली बार इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया ने धूल चटाई थी. इंग्लैंड के लोग इस अपमान को बर्दाश्‍त नहीं कर पाए.

अखबार की हेडलाइन से मिला नाम 'एशेज'

इसके बाद स्पोर्टिंग टाइम्स अखबार ने इस पर चुटकी लेते हुए ‘इंग्लिश क्रिकेट की मौत’  हेडलाइन से एक लेख लिखा था और इसमें यह लिखा गया था कि इंग्‍लैंड क्रिकेट की लाश का दाह-संस्‍कार किया जाएगा और राख ऑस्‍ट्रेलिया ले जाएगी.

राख को इंग्लिश में Ashes कहते हैं. कहा जाता है कि इंग्लैंड की करारी हार के बाद अंग्रेज कप्तान को बेल्स (गिल्लियां) या बॉल में से किसी एक चीज को जलाकर उसकी राख भेंट की गई थी जो इंग्लैंड क्रिकेट की हत्या का संकेत थी. 

दो महीने बाद इंग्‍लैंड की टीम ऑस्‍ट्रेलिया में थी. हॉन इवो ब्लिग इस टीम के कप्‍तान थे और उन्‍होंने वादा किया था कि Ashes यानी राख वापस लेकर आएंगे.

तब ऑस्‍ट्रेलिया के कप्‍तान रहे डब्‍ल्‍यू एल मर्डोक ने भी कह दिया कि वह कुछ भी करेंगे मगर Ashes को हाथ से नहीं जाने देंगे. इसके बाद जब इंग्लैंड ने अगली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया तो वो राख असल में इंग्लैंड को भेट की गई क्योंकि इंग्लैंड ने अपनी पुरानी हार का बदला लिया था. 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक बेल्स (गिल्लियां) को जलाया गया और उसकी राख को मशहूर अर्न (एक प्रकार का बर्तन) ट्रॉफी में रखा गया. जीतने वाली टीम को जश्न मनाने के लिए उस अर्न की एक डिजाइन हर साल इनाम में दी जाती है.

इसी प्रतिस्पर्धा ने एशेज को जन्म दिया और इसके बाद से परंपरागत रूप से हर साल 5 मैचों की टेस्ट सीरीज आयोजित होती है और इसे ही एशेज सीरीज कहा जाता है. 

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