Tokyo Olympic 2021: पहलवानों से गोल्ड मेडल की उम्मीद, जानिये क्या कहता है कुश्ती का इतिहास

Tokyo Olympic 2021: एक बार फिर पूरे देश की निगाहें पहलवानों के बल, चपलता और कौशल पर जा टिकी हैं. टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व सात पहलवान करने जा रहे हैं. जिनमें चार महिला और तीन पुरुष पहलवान हैं. 

Written by - Adarsh Dixit | Last Updated : Jul 22, 2021, 07:25 AM IST
  • विनेश फोगट 53 किग्रा भारवर्ग फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भारतीय चुनौती पेश करेंगी
  • पुरुष वर्ग में बजरंग पुनिया भी ओलंपिक पदक जीतने के सबसे बड़े दावेदार हैं
Tokyo Olympic 2021: पहलवानों से गोल्ड मेडल की उम्मीद, जानिये क्या कहता है कुश्ती का इतिहास

नई दिल्ली: Tokyo Olympic 2021: टोक्यो ओलंपिक खेलों का आगाज होने जा रहा है. पिछले तीन ओलंपिक में भारत के शानदार प्रदर्शन में अगर किसी ने योगदान दिया है तो वो भारतीय पहलवान ही थे. जिन्होंने दुनिया के दिग्गज पहलवानों को मात देकर भारत का मान बढ़ाया. रियो में जब एक भी मेडल भारत के हाथ आते नहीं दिख रहा था और हर खेल में निराशा हाथ लग रही थी तभी साक्षी मलिक ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था.

पहलवानों से पदक की आस

ऐसे में एक बार फिर पूरे देश की निगाहें पहलवानों के बल, चपलता और कौशल पर जा टिकी हैं. टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व सात पहलवान करने जा रहे हैं. जिनमें चार महिला और तीन पुरुष पहलवान हैं. इनमें से एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता विनोश फोगाट और बजरंग पुनिया को पदक का सबसे बड़े दावेदार के रूप में देखा जा रहा है.

विनेश फोगाट पर पारिवारिक दबाव

विनेश फोगाट 53 किग्रा भारवर्ग फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भारतीय चुनौती पेश करेंगी और सीमा बिसला 50 किग्रा में पदक के लिये जद्दोजहद करेंगी.

इनके अलावा अंशुमलिक 57 किग्रा और सोनम मलिक 62 किग्रा भारवर्ग में चुनौती पेश करेंगी.

बजरंग पूनिया से पदक की आस

पुरुष वर्ग में बजरंग पूनिया 65 किग्रा भारवर्ग में दावा पेश करेंगे. इनके अलावा रवि दहिया 57 किग्रा भारतवर्ग और दीपक पुनिया 86 किग्रा भारवर्ग में अपनी भुजाओं का जोर दिखाएंगे. भारतीय कुश्ती दल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सातों ही पहलवान हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं.

रियो ओलंपिक टूट गया था विनेश का सपना

विनोश फोगट पहलवान महावीर फोगाट की भतीजी हैं और उनके ऊपर फोगाट परिवार की की परंपरा को आगे ले जाने का भार है. रियो ओलंपिक में भी विनेश को पदक का दावेदार माना जा रहा था लेकिन मैच के दौरान चोटिल होने के कारण रियो में उनका पदक जीतने का सपना टूट गया था.

इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए साल 2018 में आयोजित गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों और जकार्ता एशियाई खेलों में 50 किमी भारवर्ग स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया.

एशियाई खेलों में विनेश स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला पहलवान बनी थीं. ओलंपिक से पहले अल्माटी में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक पदक के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है.

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राष्ट्रमंडल खेलों में बजरंग ने जीता था सोना

वहीं पुरुष वर्ग में बजरंग पुनिया भी ओलंपिक पदक जीतने के सबसे बड़े दावेदार हैं. विनेश की तरह बजरंग ने साल 2018 में आयोजित एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में 65 किग्रा भारवर्ग स्पर्धा के स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे.

उसके बाद बुडापेस्ट में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में वो रजत पदक अपने नाम करने में सफल रहे थे. ऐसे में ओलंपिक पदक जीतते ही वो भारतीय कुश्ती के इतिहास में केडी जाधव, सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त के क्लब में शामिल हो जाएंगे.

नूर सुल्तान में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके दीपक पुनिया भी पदक जीतने के दावेदारों में से एक हैं. वो 86 किग्रा भारवर्ग में चुनौती पेश करेंगे. इसके अलावा एशियाई चैंपियनशिप में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके रवि कुमार दहिया भी ओलंपिक के दंगल में पदक जीतने जितना दम दिखा सकते हैं.

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