पर्यावरण में ढुलमुल रुख रखने वाले ट्रंप, भारत पर गंदगी बहाने का आरोप लगा रहे हैं

ट्रंप ने कहा था, भारत, रूस और चीन जैसे देशों में अच्छी हवा और पानी तक नहीं हैं. पर्यावरण को लेकर इन देशों के प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं. इन देशों में प्रदूषण और सफाई को लेकर कोई सोच नहीं है.यहां एक बड़ी समस्या है. तुलनात्मक रूप से हमारे पास ज़मीन का छोटा टुकड़ा है. अगर आप चीन, रूस और भारत जैसे और देशों से तुलना करें तो यह देश सफाई और धुएं पर नियंत्रण के लिए कई कदम नहीं उठा रहे हैं. 

पर्यावरण में ढुलमुल रुख रखने वाले ट्रंप, भारत पर गंदगी बहाने का आरोप लगा रहे हैं

नई दिल्लीः अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर पर्यावरण के मुद्दे पर भारत को घेरा है, इस बार उनकी टिप्पणी देश के लिए अपमानजनक है. हालांकि प्रदूषण और गंदगी को लेकर उनकी चिंता ठीक है, लेकिन जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर अमेरिका का खुद का रुख इस मुद्दे को नजरअंदाज करने वाला रहा है, लेकिन उन्होंने भारत पर निशाना साधते हुए कहा है कि भारत की गंदगी लॉस ऐंजिलिस में भारत की गंदगी पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि समुद्र में उनकी ओर से गंदगी डालने से अमेरिका तक यह प्रदूषित पानी पहुंच पा रहा है. 

 इकनॉमिक क्लब ऑफ न्यूयॉर्क में बोल रहे थे ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप इकनॉमिक क्लब ऑफ न्यूयॉर्क में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत, चीन और रूस की गंदगी बहती हुई लॉस ऐंजिलिस तक पहुंच रही है. यहां एक बड़ी समस्या है. तुलनात्मक रूप से हमारे पास ज़मीन का छोटा टुकड़ा है. अगर आप चीन, रूस और भारत जैसे और देशों से तुलना करें तो यह देश सफाई और धुएं पर नियंत्रण के लिए कई कदम नहीं उठा रहे हैं. यह सभी देश अपनी गंदगी समंदर में डाल रहे हैं. और यही गंदगी लॉस ऐंजिलिस में भारत से बहकर आ रही है. 

वाकई, अमेरिका महज छोटा जमीन का टुकड़ा ?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कथित ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच यानी जीपीजीपी का हवाले से यह कह रहे थे. इसे पैसिफिक ट्रैश वॉर्टेक्स भी कहा जाता है. नौवाहनों की गंदगी समंदर के साथ हवाई और कैलिफोर्निया तक पहुंचती है. इनमें प्लास्टिक, केमिकल अवशेष के साथ अन्य गंदगियां पहुंचती हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यह गंदगी भारत से नहीं बल्कि चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस से पहुंच रही है, क्योंकि जीपीजीपी का प्राथमिक स्रोत भारत नहीं है. ट्रंप अमरीका को ज़मीन का छोटा टुकड़ा कह रहे हैं जबकि दुनिया का यह चौथा सबसे बड़ा देश है जो कि भारत से चार गुना बड़ा है.

इसके अलावा अमेरिका एक बड़ी औद्योगिक शक्ति है, उसकी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था इसी पर आधारित है, जाहिर है कि उद्योग-धंधे हैं तो औद्योगिक अपशिष्ट भी हैं, अगर आज अमेरिका ने अपशिष्ट शोधन का कोई रास्ता खोज भी लिया है तो इसके पहले वह सालों तक अपशिष्ट को जल स्त्रोतों में ही बहाता रहा है. 

पहले भी भारत पर उठाया था सवाल
इससे पहले ट्रंप ने इसी साल जून में भारत पर प्रदूषण को लेकर हमला बोला था. तब ट्रंप ने कहा था, भारत, रूस और चीन जैसे देशों में अच्छी हवा और पानी तक नहीं हैं. पर्यावरण को लेकर इन देशों के प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं. इन देशों में प्रदूषण और सफाई को लेकर कोई सोच नहीं है. उन्होंने कहा था, अमरीका दुनिया के सबसे स्वच्छ देशों में से एक है. हालात और बेहतर ही हो रहे हैं. वहीं भारत, चीन और रूस जैसे देशों को स्वच्छता और प्रदूषण की समझ तक नहीं है. भारत समेत कई देशों में बहुत अच्छी हवा भी नहीं है. न ही बहुत साफ पानी. उन्होंने कहा कि मैं कई शहरों के नाम ले सकता हूं, लेकिन उनके नाम नहीं लूंगा, आप इन शहरों में जाने पर आप सांस तक नहीं ले सकते.

ग्रेटा थनबर्ग ने भी लताड़ा था
सबसे छोटी स्वीडन की स्वीडन की 16 साल की पर्यावरण ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने विश्व नेताओं को दो टूक कहा था कि आप सभी जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने में विफल रहे हैं. ग्रेटा ने कहा कि आपने अपने खोखले बयानबाजी से मेरे बचपन और उसके सपने को छीन लिया.

ग्रेटा ने चेताया था कि विश्व के नेताओं को अब भी कार्रवाई करनी चाहिए, साथ ही पर्यावरण के लिए विशेष योजनाएं बनाने के लिए भी कहा. ग्रेटा ने महाशक्तियों को भी इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की थी. कहा था कि यह पूरी तरह से गलत है. मुझे यहां नहीं होना चाहिए था. मुझे महासागर पार स्कूल में होना चाहिए था.

ट्रंप खुद जलवायु और पर्यावरण जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करते हैं
इस समय जब सभी देश जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर स्थितियों को झेल रहे हैं तो अकेले भारत पर किसी तरह का इल्जाम लगाना गलत है, ट्रंप का खुद का रवैया पर्यावरण के मामले को लेकर बहुत ढीलाढाला रहा है. ग्रेटा थनबर्ग के भाषण के दौरान ट्रंप नहीं थे. जलवायु परिवत्न पर संदेह रखने वाले ट्रंप उस समारोह में नहीं दिखे थे. वह केवल कुछ ही देर के लिए दीर्घा में मौजूद थे.

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