कोरोना जैसे सभी वायरस खत्म कर देगा ये खास कपड़ा

कोरोना के खिलाफ जंग के लिए एक नया अविष्कार सामने आया है. जिसे स्विट्जरलैण्ड में रहने वाले भारतीय संजीव स्वामी ने किया है. यह एक खास तरह का कपड़ा है जो सभी तरह के बैक्टीरिया और वायरस को पॉजिटिव चार्ज के झटके से मार देता है. 

कोरोना जैसे सभी वायरस खत्म कर देगा ये खास कपड़ा

नई दिल्ली: कोरोना को खत्म करने के लिए दुनिया के हर कोने में कोशि जारी है. स्विट्जरलैण्ड की लेबोरेट्री Livinguard Technologies के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव स्वामी ने एक खास तरीके के पॉलीमर से बने वस्त्र की खोज की है. जिसमें मौजूद पॉजिटिव चार्ज किसी भी तरह के बैक्टीरिया या वायरस को समाप्त करने में सक्षम है. 
इस विशेष अविष्कार के बारे में एक वेबिनार आयोजित किया गया. जिसका संचालन  पद्मश्री और पद्मविभूषण से सम्मानित देश की महान वैज्ञानिक विभूति डॉ. रघुनाथ अनंत माशेलकर ने किया. 
इस वेबिनार में स्विट्जरलैण्ड से संजीव स्वामी जुड़े थे. वहीं देश के कई हिस्सों से लोग इसमें शिरकत कर रहे थे. 
 
ऐसे हुई कार्यक्रम की शुरुआत 
इस कार्यक्रम की शुरुआत में बोलते हुए डॉ. अनंत माशेलकर ने कहा कि जब उन्होंने लिविंग गार्ड टेक्नोलॉजी के बारे में जाना तो उन्हें पीएम नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की याद आ गई. यह संस्था साफ पेयजल और स्वच्छता के अपने कार्यों के लिए जानी जाती है. 
डॉ. अनंत ने बताया कि मैं पांच सालों तक सरकार की स्टैंडिंग कमिटी का अध्यक्ष रहा. मैं यह प्रयोग देखकर हैरान रह गया कि मात्र 1 डॉलर खर्च में 3 हजार लीटर पानी को शुद्ध करके पेयजल बनाया जा सकता है और वह भी बिना बिजली खर्च किए. यह कमाल लिविंग गार्ड टेक्नोलॉजी ने किया था. उन्होंने संजीव स्वामी की इस संस्था की तारीफ करते हुए बताया कि यह गांवो में भेदभाव को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.  क्योंकि बिजली नहीं इस्तेमाल होने से यह भारत के गांवों के दूरदराज के किसी भी इलाके में लगाया जा सकता है. 
डॉ. माशेलकर ने कहा कि मैं आज की चर्चा में उपस्थित हूं. मैं एक वैज्ञानिक के तौर पर यह समझाने का प्रयास करूंगा कि लिविंग गार्ड टेक्नोलॉजी के सीईओ संजीव स्वामी का बैक्टीरिया और वायरस मारने वाले कपड़े का यह अविष्कार कितना अनोखा और उपयोगी है.

बेहद किफायती अविष्कार
डॉ. माशेलकर ने संजीव स्वामी से पहला सवाल किया कि आपका यह अविष्कार इतना किफायती कैसे है? 

संजीव स्वामी ने जवाब दिया कि तकनीक आसान होनी चाहिए.  तभी बड़े पैमाने पर उसका विस्तार से उपयोग हो सकेगा. इसका कई बार धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है. लिविंग गार्ड का यह प्रयास है कि इसे सबके लिए सुलभ होना चाहिए. 
संजीव के मुताबिक उनका नवीनतम अविष्कार एक विशेष तरह की डाई है जो कपड़ो पर मौजूद होती है. पॉलीकैटायोनिक टेक्नोलॉजी कही जाने वाली इस तकनीक के कारण कपड़ों की उपरी सतह पर 0.1 से 0.8 मिली वोल्ट का पॉजिटिव चार्ज उत्पन्न करती है. जो कि किसी भी प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और कुछ तरह के फंगस को खत्म कर देता है.     
 यह पॉजिटिव चार्ज कपडे की परत में छिपी रहती है. जब इससे कोई बैक्टीरिया या वायरस टकराता है तो एक्टिव होकर उसे खत्म कर देता है. 
इस खास टेक्सटाइल के प्रति स्क्वायर सेंटीमीटर में 24 से 26 बिलियम चार्ज होते हैं. जो बैक्टीरिया या वायरस के खिलाफ विस्फोटों की श्रृंखला जारी करते हैं. इस तरह यह वायरस या बैक्टीरिया जैसे माईक्रोन के खिलाफ काम करता है. 
इस तरह के खास टेक्सटाइल से फेस मास्क और हैंड ग्लब्स बनाए गए हैं. किसी भी सतह को साफ करने के लिए वाइप भी तैयार किया गया है.  

स्विट्जरलैण्ड में स्थित है लैब
ये लैब स्विट्जरलैंड के एक इलाके में स्थित है. जहां पर बैक्टीरिया के खिलाफ एक खास तरह का कपड़ा तैयार किया गया है. जो कि बिना किसी केमिकल या सैनिटाइजर के किसी भी जगह को बैक्टीरिया या वायरस से मुक्त कर सकता है. इस कंपनी में इंग्लैण्ड, चीन, पोलैण्ड, लिथुआनिया, भारत हर जगह से लोग काम करते हैं. 

कितना अलग अविष्कार है यह
डॉ. माशेलकर ने संजीव स्वामी से सवाल किया कि एक पॉलीमर साइंटिस्ट होने के नाते मैं जानना चाहता हूं कि आपकी पॉली कैटायोनिक केमिस्ट्री अलग कैसे है? 
संजीव स्वामी ने बताया कि यह तीन से 7 पॉली कैटायोनिक केमिस्ट्री का मेल है. जिसकी मदद के परफेक्ट चार्ज तैयार करने में मदद मिली जो कि बैक्टीरिया या वायरस को मार देता है. 
इस दौरान संजीव ने इस तकनीक से बना मास्क दिखाते हुए बताया कि इस मास्क के कपड़े से ट्यूबरकुलोसिस, साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे  बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते है. यह  इबोला और कोरोना जैसे कई खतरनाक  वायरसों को खत्म करने में सक्षम रहा. मुंबई के सायन अस्पताल में इसका परीक्षण किया गया था. 
जो भी इसका इस्तेमाल करेगा वह लंबे समय तक इसका उपयोग कर पाएगा. क्योंकि इसे बार बार धोने के बाद उपयोग किया जा सकता है. इसलिए इसका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
संजीव ने बताया कि मैने शुरुआत में हजारो किस्म के पॉलीमर का प्रयोग किया. लेकिन आखिर में जाकर कुछ खास तरह के पॉलीमर का चुनाव किया. 

पर्यावरण के लिए भी बेहद सुरक्षित है यह वस्त्र
डॉ. माशेवकर का सवाल था कि पर्यावरण की सुरक्षा और कीमत को लेकर आपका इस अविष्कार के बारे में क्या विचार है? 

संजीव स्वामी ने जवाब दिया कि मैं पहले पर्यावरण की ही बात करूंगा. अगर  लाखों लोग यूज एंड थ्रो फेस मास्क की जगह मेरे बनाए मास्क का प्रयोग करते हैं तो 36 हजार टन कम कचरा उत्पन्न होगा.     
लाइव गार्ड कंपनी के मास्क को हफ्ते में एक बार धोने की जरुरत होती है और इसे 40 बार धोकर प्रयोग किया जा सकता है. यह अपने आप में 36 हजार टन सिंगल यूज मास्क के बराबर होगा.  
कीमत की बात करें तो इस मास्क की कीमत हर एक इस्तेमाल के लिए  मात्र 10 रुपए से भी कम होगी. जो कि सिंगल यूज मास्क के बराबर है. खास बात ये है कि साधारण मास्क में किसी तरह के बैक्टरिया या वायरस को खत्म करने की क्षमता नहीं होती है. इस मास्क को 200 रुपए में बाजार में लाया गया है. जिसे कम से कम 30 बार धोकर प्रयोग किया जा सकता है. इस तरह प्रति इस्तेमाल इसका खर्च लगभग 6 से 7 रुपए होगा. जो कि बाजार में उपलब्ध 10 रुपए के सिंगल यूज मास्क से सस्ता है. 
हम मास्क को छूने के बाद अपनी आंखों या नाक का स्पर्श कर लेते हैं. इस तरह हम खुद ही स्वयं को संक्रमित कर सकते हैं. लेकिन ये समस्या हमारे बनाए मास्क के साथ नहीं है. क्योंकि यह बैक्टीरिया और वायरस को खत्म भी करता है.  हमारा बनाया हुआ मास्क पर्यावरण के लिए सुरक्षित होने के साथ ही बेहद सस्ता भी है.
सभी के लिए उपयोगी है अविष्कार 
डॉ.माशेलकर ने सवाल किया कि आपकी कंपनी का नाम लाइफ गार्ड है. यानी जिंदगी बचाने वाला, क्या ये सफाईकर्मियों और कचरा चुनने वालों के लिए भी उपयोगी है?

संजीव स्वामी ने जवाब दिया कि यह कोई एलीट प्रोडक्ट नहीं है. यह सभी के इस्तेमाल के लिए है. हमारा लक्ष्य है कि ये अगले कुछ महीनों में सभी के पास पहुंच जाए. फिलहाल हम अमेरिका और अमेरिकी सेना के लिए मास्क बना रहे हैं.  दुबई, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड,  पुर्तगाल और इटली में हम ये मास्क भेज रहे हैं. 
इसके अलावा कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील में इसका प्रोडक्शन शुरु होने वाला है. लिविंग गार्ड टेक्नोलॉजी मास्क बनाने वाली कंपनी नहीं है. हमने इसके लिए खास तरीके के पॉलीमर का अविष्कार किया है. इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन स्विट्जरलैण्ड की ही एक दूसरी कंपनी करती है.  पूरी दुनिया में मास्क की सप्लाई करने के लिए हमें सप्लाई चेन तैयार करने की जरुरत है. 

क्या मेक इन इंडिया के मानदंडों पर खरा है यह नया उत्पाद
इसके बाद डॉ. माशेलकर ने सवाल किया कि हमारे प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की बात की है. क्या हम इसका निर्माण भारत में कर सकते हैं? 

इसपर संजीव स्वामी का जवाब था कि  मैं एक भारतीय हूं और मुझे इसपर गर्व है. इस मास्क का निर्माण भारत में हो रहा है. इसके लिए भारतीय लोग काम कर रहे हैं और यह भारत के लिए ही है. 
टेक्सटाइल का अविष्कार भले ही स्विट्जरलैण्ड की लैब में हुआ. लेकिन इसके रेशों को शोधन नवी मुंबई में ही किया गया है. हम इसके लिए महाराष्ट्र सरकार के बेहद आभारी हैं. जिसने लॉकडाउन के दौरान भी हमारी यूनिट को मास्क के लिए कपड़ा तैयार करने की इजाजत दी. हम भारत में सप्लाई के लिए तैयारी कर रहे हैं.     

किसी भी दुष्प्रभाव से मुक्त है यह वायरस फ्री कपड़ा
डॉ. संजीव स्वामी ने बताया कि इस प्रोडक्ट को बाजार में आने से पहले स्विस मिलिट्री लैब, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में पूरी रह चेक किया गया कि क्या इसका मानवीय शरीर पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ेगा. जिसके बाद इसे बाजार में लाने का फैसला किया गया. 


इस मास्क का इस्तेमाल केवल कोरोना वायरस के खिलाफ ही नहीं बल्कि यलो फीवर, इबोला जैसे बैक्टीरिया और वायरस आधारित बीमारियों के खिलाफ भी किया जा सकता है. 
संजीव स्वामी ने बताया कि लाइव गार्ड के वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है कि इस खास कपड़े से बना मास्क कहां कहां उपलब्ध है. यह मास्क भारत में भी मिल जाएगा. 

ये पूरा वेबिनार आप यहां सुन सकते हैं---