हर बूंद सहेजने का तरीका सिखाता है यूपी का ये मंदिर

जल संरक्षण कितना जरूरी है, उसकी कीमत उन प्रदेशों को समझ आती है जहां पानी की समस्या विकराल हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देशवासियों से जल संरक्षण की अपील की थी. नई सरकार में इसके लिए एक अलग से मंत्रालय भी बनाया गया जिसका नाम है जलशक्ति मंत्रालय. अब यूपी के महाराजगंज में कुछ लोगों ने मिलकर जल संरक्षण की एक सामूहिक पहल का अनूठा प्रयास किया है.  

हर बूंद सहेजने का तरीका सिखाता है यूपी का ये मंदिर

लखनऊ: बात है उत्तरप्रदेश के महाराजगंज जिले के बड़हरा की, जहां भगवान जगन्नाथ के मंदिर परिसर में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता साफ नजर आती है. मंदिर 233 वर्ष पुराना है और जहां अब तक कुएं के पानी से सारे काम किए जाते हैं. फिर चाहे वह पीने की जरूरतों का ध्यान रखना हो या मंदिर परिसर की साफ-सफाई का जिम्मा. भगवान जगन्नाथ के इस प्राचीन मंदिर में कुएं के पानी का इस्तेमाल लगभग हर काम में लाया जाता है. प्रसाद बनाने के काम से लेकर मंदिर परिसर की साफ-सफाई तक. बचपन में आप ने किताबों में जल संरक्षण के कई तरीकों के बारे में विज्ञान की किताबों में पढ़ा होगा. कुएं जल संरक्षण का सबसे बड़ा स्त्रोत हैं, यह भी जानकारी आपको जरूर होगी. 

वॉटर हार्वेस्टिंग का संदेश दे रहा यह मंदिर

जिला प्रशासन ने इस मंदिर परिसर की तारीफ करते हुए कहा कि इस तरह से कुएं के पानी का इस्तेमाल कर के वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बढ़ावा दिए जाने की यह पहल काबिल-ए-तारीफ है. अधिकारियों ने कहा कि एक तरीका तो यह है कि आप अपने घरों की छतों पर वॉटर हार्वेस्टिंग के लिेए कुठ तकनीक तैयार कर रखें, ताकि पानी की बर्बादी से बचा जा सके. पुरान जमाने में पानी की बर्बादी बहुत ज्यादा नहीं होती थी, उस वक्त तक पानी की उपलब्धता के लिए लोग कुओं का इस्तेमाल करते थे. जलाशय का निर्माण कराया जाता था और बारिश के दिनों में पानी का संरक्षण किया जाता था. लेकिन अब विकास की इस दौड़ में पानी बचाने या स्टोर करने की विधियां इस्तेमाल में कम लाई जाती थी. ऐसे में महंतों और मंदिर के कर्मचारियों की ओर से अपनाई जा रही ये पहल जल संरक्षण का संदेश दे रही है. 

आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी फैलाई जा रही है जागरूकता

यह मंदिर महाराजगंज के निचलौल तहसील में है जिसे ओडिशा के पुरी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया था. उस समय से ही मंदिर परिसर में कुएं का अस्तित्व है. स्नान, पूजा, साफ-सफाई से लेकर पीने तक के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. और क्योंकि यह ग्राउंड वॉटर है तो इसके इस्तेमाल के अनुसार ही इसे निकाला जाना जल संरक्षण की दिशा में एक अच्छा कदम है. मंदिर के महंत रामानुज दास ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जल संरक्षण की मुहीम को आगे बढ़ाए जाने का प्रयास किया जा रहा है. इससे पहले भी मंदिर परिसर में कुएं के जल से ही सारे काम किए जाते रहे हैं और इसको लेकर आस पास के ग्रामीणों को भी जागरूक किया जाता है.

जलशक्ति मंत्रालय ने लॉन्च की फिल्म 'शिखर से पुकार'

मालूम हो कि जल संरक्षण के लिए कुएं, तालाब, पोखर, मानव निर्मित वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का जितना विकास होगा, उतना बेहतर कार्य हो सकता है. जलशक्ति मंत्रालय के मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इससे पहले जल संरक्षण के लिए कई मुहीम को हरी झंडी दिखा दी है. हाल ही में जलशक्ति मंत्रालय ने एक लघु फिल्म 'शिखर से पुकार' को लॉन्च किया. इस फिल्म में यह संदेश दिया गया है कि कैसे जल प्रदूषण और दुरूपयोग से परे जल संरक्षण किया जा सके.