कोरोना पर कन्फ्यूजन दूर करने वाली रिपोर्ट, जानिए 8 बड़ी सच्चाई

दुनिया में हाहाकार मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर अफवाहों का भी बाजार गर्म है. इस महामारी के बारे में कई तरह के दावे और मिथक भी वायरस की तरफ फैल रहे हैं जिसका सच से दूर-दूर तक नाता नहीं है.

कोरोना पर कन्फ्यूजन दूर करने वाली रिपोर्ट, जानिए 8 बड़ी सच्चाई

नई दिल्ली: कोई कहता है, ये करो तो कोरोना वायरस दूर भागेगा तो कोई कहता है, ये खाओ तो कोरोना वायरस पास नहीं फटकेगा. कोरोना वायरस को लेकर लोगों में भारी कन्फ्यूजन है इसलिए ये जरूरी है कि इस गलतफहमी को दूर किया जाए. कोरोना के नाम पर जो दावे किए जा रहे हैं, उसकी सच्चाई से आपको रूबरू कराते हैं.

कोरोना पर दावों का रियलिटी टेस्ट

1). एक बड़ा दावा ये किया जाता है कि गर्मियों में कोरोना वायरस भाग जाएगा. लेकिन ये दावा गलत है क्योंकि पहले भी वायरस से जुड़ी महामारियों के मामले में ऐसा नहीं था. वायरस मौसम के हिसाब से घटता-बढ़ता नहीं है. ऐसे भी जब भारत में गर्मियां शुरू होती हैं तब दक्षिणी गोलार्ध में सर्दियां रहती हैं जबकि कोरोना वायरस का प्रभाव वैश्विक है.

2). एक दावा ये किया जा रहा है कि गर्मियों में मच्छर काटने पर कोरोना वायरस तेजी से फैलेगा, ये भी दावा गलत है. कोरोना वायरस का इन्फेक्शन श्वसन नली में आने वाली बूंदों से फैलता है न कि खून से. ऐसे में मच्छरों के काटने की वजह से कोरोना वायरस फैलने के दावे में सच्चाई नहीं दिखती.

3). एक मिथक ये है कि कोरोना वायरस गले में जिंदा रहता है इसलिए ढेर सारा पानी पीने से वायरस पेट में आमाशय में चला जाएगा और वहां मौजूद एसिड उसे खत्म कर देगा, ये दावा भी गलत है. ये सही है कि वायरस गले से होते हुए रास्ते शरीर में दाखिल हो सकता है लेकिन ये होस्ट सेल्स में प्रवेश कर जाता है जिसे पानी पीकर दूर नहीं भगाया जा सकता.

4). एक दावा ये भी किया जाता है कि जो भी 10 सेकंड तक बगैर परेशानी के सांस रोक लेगा, उसे कोरोना नहीं होगा. ये दावा भी गलत है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि कोरोना वायरस से पीडित कई नौजवान 10 सेकंड से भी ज्यादा समय तक सांस रोक कर रख सकते हैं लेकिन वैसे बुजुर्ग जो वायरस से पीड़ित नहीं हैं, वो कुछ सेकंड के लिए भी सांस नहीं रोक सकते.

5). ऐसा भी दावा किया जाता है कि साबुन और पानी के मुकाबले हैंड सैनेटाइजर ज्यादा बेहतर है, लेकिन ये दावा सरासर गलत है. साबुन और पानी न सिर्फ हाथों से गंदगी साफ करता है बल्कि त्वचा से वायरस को भी खत्म कर देते हैं. इसलिए सैनेटाइजर न मिले तो चिंता करने की जरूरत नहीं है.

6). एक मिथक ये भी चल रहा है कि ब्लड डोनेट करना चाहिए क्योंकि ब्लड बैंक ही कोरोना वायरस टेस्ट कर लेगा. ये दावा भी गलत है क्योंकि ब्लड बैंक कोरोना वायरस की जांच नहीं कर रहा. ब्लड डोनेशन अच्छा काम तो है लेकिन कोरोना की टेस्टिंग के बहाने ब्लड डोनेट करने का कोई मतलब नहीं है. 

7). बड़े जोर-शोर से ये भी दावा किया जाता है कि लहसुन खाने से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा, लेकिन ये दावा गलत है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO का कहना है कि लहसुन में भले ही एंटी माइक्रोबियल प्रोपर्टीज होती हैं. लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि इससे कोरोना वायरस का मुकाबला किया जा सकता है.

8). सबसे बड़ा दावा ये भी किया जाता है कि फेस मास्क से कोरोना वायरस पास नहीं फटकेगा. लेकिन ये दावा भी गलत है क्योंकि कोई भी मास्क 100 फीसदी वायरस प्रूफ नहीं होते और सबसे बड़ी बात ये कि वायरस आंखों के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकता है और मास्क आंखों को नहीं ढंकता.

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कोरोना वायरस को लेकर जितने मुंह, उतनी बातें फैलती जा रही हैं। ऐसे में हमने इन दावों और मिथकों की जो हकीकत पेश की है, उससे लोगों को जागरूक होने में मदद मिलेगी.

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