डायबिटीज घटाइये और बीमारियों से निजात पाइये! जानें: 6 उपाय

आज यानी 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है. लेकिन इस दिन हम आपको 6 ऐसे मुख्य तरीके बताते हैं, जो आपकी इस बीमारी को काबू में रखने के लिए मददगार साबित होगी.

डायबिटीज घटाइये और बीमारियों से निजात पाइये! जानें: 6 उपाय

नई दिल्ली: भारत एक ऐसी बीमारी की चपेट में है, जो हमारी खुद की बनाई गई है. प्रदूषण की ही तरह डायबिटीज भी मैन मेड डिजास्टर है. देश में दर्ज होने वाली मौत के कारणों में 1990 तक डायबिटीज शामिल नहीं था. हालांकि डायबिटीज के मरीज तो तब भी भारत में थे लेकिन 2019 आते आते यानी 29 सालों में डायबिटीज भारत में मौत का 7 वां कारण है. हिन्दुस्तान में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग डायबिटीज के शिकार होकर मौत के मुंह में जा रहे हैं.

सबसे पहले आपको डायबिटीज को काबू में रखने के 6 अहम उपाय बताते हैं कि कैसे आप अपनी बीमारी को कंट्रोल में रख सकते हैं. उसके बाद आपको नए डायबिटीज सर्वे में हुए बड़े खुलासे का पूरा हिसाब-किताब समझाएंगे.

उपाय नंबर 1.

सबसे पहले तो अपने डायबिटीज को काबू में रखने के लिए आपको अपने खाप-पान का खाया ख्याल रखना होगा. उचित डाइट लेने से इसमें सुधार की काफी संभावनाएं होती हैं.

उपाय नंबर 2.

अपने डायबिटीज को बेहतर रखने के लिए एक जरूरी बात ध्यान देने की आवश्यकता है. आपको बाहर का खाना और जंक फूड पूरी तरह से नजरअंदाज करना होगा.

उपाय नंबर 3

डायबिटीज का दूरा नाम सुगर भी है, जिसे मधुमेह भी कहा जाता है. ऐसे में आपको मिठे को पूरी तरह से तौबा करना पड़ेगा.

उपाय नंबर 4.

अगर आपको अपनी सेहत अच्छी रखनी है, और डायबिटीज पर कंट्रोल करना हो, तो रोजाना एक्सरसाइज काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

उपाय नंबर 5.

स्ट्रेस यानी मानसिक तौर पर तनाव इस बीमारी में घातक साबित हो सकता है.

उपाय नंबर 6.

अपनी नींद पूरी करना, यानी समय पर सोना आपके लिए डायबिटीज की स्थिति में लाभदायक साबित होती है.

नए डायबिटीज सर्वे में बड़ा खुलासा

भारतीयों की कसरत ना करने की आदत उन्हें डायबिटीज का मरीज बना रही है. हाल ही में किए गए एक सर्वे के नतीजे ये साफ कर रहे हैं कि भारत में हर 12 में से एक व्यक्ति डायबिटीज का मरीज है. डायबिटीज की वजह से किसी भी व्यक्ति को हार्ट अटैक, किडनी फेल्यर और आंखों की रोशनी जाने की वजह बन सकती है. हालांकि, ये ऐसी बीमारी है जिस पर दवा से ज्यादा लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव का असर होता है.

  • 12 में से हर एक भारतीय डायबिटीज का मरीज
  • भारत में तकरीबन 8 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार 
  • इनमें से 20 फीसदी से भी कम की डायबिटीज कंट्रोल में है

भारत का हर शहर डायबिटीज की चपेट में हैं. यानी देश का कोई भी ऐसा शहर नहीं बचा है जहां तक इस बीमारी ने अपनी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाई है. आंकड़ों के अनुसार साल 2040 तक करीब 13 करोड़ लोग इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं.

अगर हालात ऐसे ही रहे तो भारत जल्द ही डायबिटीज की ग्लोबल राजधानी बनने वाला है. इस बीमारी के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर आता है. और आधे लोगों को तो ये पता भी नहीं है कि वो डायबिटीज के शिकार हैं. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के 2017 के आंकलन के मुताबिक दुनिया भर में डायबिटीज के 7 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं. 2034 तक दुनिया में 13 करोड़ से ज्यादा मरीज डायबिटीज के होंगे.

ये भारत का डायबिटीज मैप है. इंपैक्ट इंडिया स्टडी के तहत किया गया भारत के 19 शहरों का सर्वे बता रहा है कि भारतीयों की डायबिटीज काबू से बाहर है. भारतीयों का शुगर कंट्रोल यानी डायबिटीज चेक करने के लिए 2018 से 2019 के बीच 1 हजार लैब सेंटर का डाटा स्टडी किया गया.

  • जनवरी से जून 2018 के बीच 24 लाख मरीजों में से केवल 9 लाख ने डायबिटीज के लिए जरूरी एचबीए1सी टेस्ट करवाया था. इनमें से 3.5 लाख की डायबिटीज काबू से बाहर थी.
  • इसी तरह जुलाई 2019 से सितंबर 2019 के बीच रजिस्टर हुए 18 लाख मरीजो में से केवल 4.25 लाख ने टेस्ट करवाए. इनमें से 1.66 लाख मरीजों की डायबिटीज़ काबू से बाहर थी.
  • 2018 से 2019 के बीच 5 बार डाटा इकट्ठा करके 19 शहरों का जो औसत आया उसके मुताबिक चंडीगढ़ को छोड़कर बाकी 18 शहरों में डायबिटीज का औसत 8 से ऊपर था.

इस स्टडी में ये आंकलन भी किया गया कि अगर कोई व्यक्ति अपने डायबिटीज के लेवल में एक प्रतिशत की कमी ले आए तो वो बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है.

एचबीए1सी के लेवल में एक प्रतिशत की कमी से- यानी डायबिटीज़ कंट्रोल करके 

  • Stroke यानी लकवे का खतरा 12 फीसदी कम किया जा सकता है.
  • हार्ट अटैक का खतरा 14 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.
  • किडनी की बीमारी का खतरा 33 फीसदी कम हो सकता है.
  • और शुगर की वजह से अंग कटने का खतरा 43 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

एचबीए1सी का स्तर 5 से कम होने पर व्यक्ति स्वस्थ माना जाता है. ये एक ब्लड टेस्ट है जो शरीर में शुगर का तीन महीने का औसत स्तर बताता है. लेकिन ऊपर जो मैप आपने देखा वो बता रहा है कि भारत के हर शहर में ये बीमारी कंट्रोल से बाहर है.

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लेकिन डायबिटीज के आधे से ज्यादा मरीज़ अपने टेस्ट नहीं करवाते, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इंसुलिन पर निर्भर डायबिटीज के मरीजों को साल में 4 बार और डायबिटीज के दूसरे मरीज़ों के लिए साल में कम से कम दो बार टेस्ट करवाना जरूरी है. घर पर शुगर यानी डायबिटीज का टेस्ट मॉनिटरिंग के लिए अहम है लेकिन ब्लड टेस्ट करवाकर आप अपने शरीर में ब्लड ग्लूकोज का तीन महीने का औसत स्तर जान सकते हैं.