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दिल्ली का प्रदूषण देखकर जर्मन चांसलर दुखी, पर्यावरण के लिए देंगी एक अरब यूरो

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण खतरनाक रुप ले चुका है. इसी दौरान जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने भी यहां का दौरा किया. लेकिन यहां पर्यावरण की बुरी हालत देखकर वह भी दुखी हुई हो गईं और प्रदूषण को दूर करने के लिए एक अरब की सहायता देने के लिए राजी हो गईं.   

दिल्ली का प्रदूषण देखकर जर्मन चांसलर दुखी, पर्यावरण के लिए देंगी एक अरब यूरो

नई दिल्ली: जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल भारतीय दौरे पर ऐसे समय पर आई जब दिल्ली की हवा में जहर घुला हुआ है. एंजेला गुरूवार को भारत पहुंची और शनिवार के दिन यात्रा का समापन हुआ. इसी बीच दिल्ली प्रदूषण की चरम सीमा पार कर चुकी थी. दिल्ली में फैले प्रदूषण को देखते हुए जर्मनी चांसलर ने भारत में एक अरब यूरो निवेश करने की घोषणा की. 

मर्केल ने घोषणा करने के साथ ही कहा कि वह पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल को कम प्रभाव करने के क्षेत्र में मदद करने के लिए सहमति जताई है. इस क्षेत्र में एक अरब यूरो निवेश करने की बात कहीं. दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए व इससे निपटने के लिए डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की बात की गई है. दिल्ली के अतिरिक्त तमिलनाडु में भी बसों में सुधार के लिए 20 करोड़ यूरो निवेश किया जाएगा. 

बसों के अलावा जर्मनी स्वास्थ एवं चिकित्सा और कृषि समेत कई अन्य कृत्रिम मेधा क्षेत्रों पर निवेश करने की बात कहीं गई है. इसके अलावा मर्केल ने चैंबर ऑफ कॉमर्स में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार समझौते को एक नए सिरे से शुरु करने की बात कहीं. इसका ज्रिक करते हुए जर्मनी की राजनीतिक संपादक मिषाएला कुइफनर ने एक ट्वीट भी किया. 

बता दें कि एंजेला मर्केल ने इस दौरे पर 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. जिनमें ग्रीन मोबिलिटी परियोजनाओं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और योग भी शामिल हैं. वर्तमान समय में जर्मनी की 1700 कंपनियां भारत में काम कर रही हैं. लेकिन मर्केला के इस दौरे के बाद जर्मनी कंपनियों के निवेश की संभावना बताई जा रही है.

भारत और जर्मनी के बीच यह बातचीत 2007 में शुरु की गई थी लेकिन आपसी मतभेद की वजह से 2012 में यह बातचीत रोक दी गई थी. यह दौरा हर दो साल में दोनों देशों भारत और जर्मनी के बीच मंत्रीस्तरीय वार्ता के लिए किया जाता है. इसी वार्ता के सिलसिले में मर्केल भारत आई थीं. इसके अतिरिक्त मार्केल जर्मनी में आकर काम करने के इच्छुक भारतीयों के लिए रिक्रूटमेंट प्रक्रिया को भी आसान बनाना चाहती हैं.