प्रेम दिवस पर छात्राओं की आदर्श प्रतिज्ञा

वैलेंटाइन्स डे पर इस कॉलेज की छात्राओं ने कमाल की प्रतिज्ञा ली है. इस तरह की बड़ी जोरदार प्रतिज्ञा  बरसों पहले भीष्म पितामह ने ली थी कि वे कभी विवाह नहीं करेंगे जबकि इन छात्रों ने प्रतिज्ञा ली है कि वे दहेज़ के लालचियों से विवाह नहीं करेंगी..  

प्रेम दिवस पर छात्राओं की आदर्श प्रतिज्ञा

नई दिल्ली. वैलेंटाइन्स डे तो प्रेम का दिवस है. यह शुद्ध और सात्विक प्रेम के लिए भले ही न जाना जाता हो किन्तु इसके विपरीत प्रेम ही न करना तो कोई समझदारी की बात नहीं हुई. हां, अगर इसके पीछे कारण ये बताया जाए कि करियर बनाने के लिए प्रेम न करें तो ठीक भी है. लेकिन तब भी प्रतिज्ञा कभी प्रेम न करने की बजाये करियर बनने तक प्रेम न करने की होनी चाहिए. महाराष्ट्र के अमरावती शहर में छात्राओं को दिलाई गई है ऐसी ही एक शपथ.

''हम कभी प्रेम नहीं करेंगे''

वैलेंटाइन्स डे के मौक़े पर दिलाई गई ये प्रेम विरोधी प्रतिज्ञा. महाराष्ट्र के अमरावती में एक महिला कॉलेज की छात्राओं को उनकी प्राध्यापकों ने ये शपथ दिलाई है. उन्होंने छात्राओं से कहा कि प्रतिज्ञा करो कि हम कभी प्रेम नहीं करेंगे. उन्होंने कहा तो छात्राओं ने शपथ ले भी ली. अब निभाएंगी कितनी और कितने दिन, ये बात देखने वाली होगी. यह मामला अमरावती के चांदूर रेलवे सिटी में विमेन्स आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज का जो विदर्भ यूथ वेल्फ़ेयर सोसाइटी की ओर से चलाया जा रहा है.

''दहेज़ मांगने वाले नहीं करेंगी शादी''

जो दूसरी शपथ इन छात्राओं को दिलाई गई वो आदर्श शपथ है. यद्यपि इस शपथ के पालन से इन छात्राओं के पालकों को इनकी शादी के समय समस्या आ सकती है लेकिन आदर्श के मार्ग पर कष्ट तो उठाना ही पड़ता है. वैलेंटाइन्स डे के मौक़े पर इन छात्राओं को जो दूसरी शपथ दिलाई गई उसमें उन्होंने कहा कि हम जीवन में कभी उस व्यक्ति से विवाह नहीं करेंगी जो दहेज़ की मांग करता हो. 

''हम लव मैरिज भी नहीं करेंगी कभी''

इस कॉलेज की छात्राओं की प्रतिज्ञा में लव मैरिज न करने की शपथ भी शामिल थी. अगर कुल शपथ को देखें तो इस प्रकार इन लड़कियों ने शपथ ली - "मैं शपथ लेती हूं कि अपने माता-पिता पर मैं पूरा विशवास रखूंगी. इस कारण अपने आसपास हो रही घटनाओं को दृष्टि में रख कर कभी प्यार नहीं करूंगी और न ही प्रेम-विवाह करूंगी. इसके अलावा मैं दहेज मांगने वाले व्यक्ति से कभी शादी नहीं करूंगी. अगर वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के समक्ष आत्मसमर्पण करके मेरे माता-पिता दहेज देकर मेरी शादी करते हैं तो जब मैं मां बनूंगी, तब अपनी बहू से दहेज नहीं मांगूंगी और उस समय   अपनी बेटी की शादी में भी दहेज नहीं दूंगी. मैं शपथ लेती हूँ कि सशक्त भारत और स्वस्थ समाज के लिए अपने सामाजिक दायित्व के तौर पर अपना कर्तव्य निभाऊंगी.''

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