छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासनकाल में बर्बाद हो रहे हैं किसान

छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद से ही किसानों की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है. हालत इतनी खराब हो गई है कि किसान अपने खून पसीने से उगाई फसल को अपने हाथों से फेंकने के लिए मजबूर हो रहे हैं. 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासनकाल में बर्बाद हो रहे हैं किसान

रायपुर: छत्तीसगढ़ में लापरवाह और लचर प्रशासनिक व्यवस्था का खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है. कांग्रेस शासन की कुव्यवस्था का खमियाजा किसानों के साथ साथ छोटे व्यापारियों की जान भी सांसत मं पड़ गई है. 

धान की फसल फेंकने के लिए मजबूर किसान
सूरजपुर में जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के द्वारा अवैध धान भंडारण के खिलाफ की जा रही कार्यवाही अब किसानों और छोटे व्यवसायियों के लिए मुसीबत साबित हो रही है. खाद्य विभाग की कार्रवाई से डरे छोटे व्यापारी किसानों का धान लेने से साफ तौर पर मना कर रहे हैं, जिसकी वजह से किसानों को आर्थिक संकट सामना करना पड़ रहा है और किसान इतने आक्रोशित हो गए हैं कि अपना धान सड़क पर फेंक रहे हैं. लेकिन खाद्य विभाग बड़ी बेशर्मी से इस स्थिति से इंकार कर रहा है. 

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किसानों को नहीं मिल रहा दाम
खेतों में धान या तो पूरी तरह से पक चुके हैं या किसानों के द्वारा धान काट कर घर में इकट्ठा कर लिया गया है, लेकिन अभी तक सरकार के द्वारा धान खरीदी शुरू नहीं की गई है. जिसकी वजह से किसान खुले मार्केट में धान बेचकर अपनी जरूरतें पूरी करना चाहता है. लेकिन खुले बाजार में व्यापारी किसानों का धान खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं. क्योंकि उन्हें प्रशासन के छापे का डर है. जिसकी वजह से अब छोटे किसानों पर आर्थिक संकट गहराने लगा है और वे कभी आक्रोशित है अब वह गुस्से में अपना धान सड़क पर फेंक रहे हैं. 

व्यापारियों की अलग है मुश्किल
व्यापारियों का आरोप है कि जिला प्रशासन एवं खाद्य विभाग के द्वारा छापामार कार्यवाही के आड़ में व्यापारियों को डरा कर अवैध वसूली की जा रही है, अगर वह धान खरीदते हैं तो खाद्य विभाग के द्वारा उनके दुकान एवं मकान पर छापा मारकर उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है. जिसकी वजह से मंडी के सभी व्यापारियों ने धान खरीदने से किसानों को साफ तौर पर मना कर दिया है. 

खाद्य विभाग के अनुसार 22 नवंबर तक अवैध धान संग्रहण के 46 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 10 वाहनों सहित लगभग 4015 क्विंटल से ज्यादा अवैध धान जब्त किया गया. 

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सरकार की लापरवाही से किसानों की मुसीबत
किसान परेशानी में इसलिए हैं क्योंकि सरकार ने व्यापारियों द्वारा धान की खरीद पर रोक लगा दी है. लेकिन सरकार द्वारा खरीदारी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. सरकार की सख्ती के बाद छोटे किसान अपनी उपज बाजारों मे नही बेच पा रहे हैं. ग्रामीण अंचल के किसान दैनिक उपयोग का सामान खरीदने के लिए बाजार पहुचकर धान को बेचते है. ताकि उनके घर परिवार मे कुछ पैसे आ जाए. लेकिन बाजारों मे बैठने वाले लाईसेंसी व्यापारियों ने धान खरीदना बंद कर दिए है. नाराज किसान धान की खरीदी नही होने के वजह से बीच बाजार अपनी उपज फेंक रहे हैं. 

सरकार ने तय किया है 1 दिसंबर का वक्त
सरकार ने किसानों से धान खरीदने के लिए 1 दिसंबर तक का वक्त तय किया है. लेकिन अपनी फसल तैयार कर चुके सभी किसानों के पास यह संदेश अब तक पहुंच नहीं पाया है. जिसकी वजह से उन्हें धान बेचने में परेशानी हो रही है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए क्विंटल तय किया है.