देश की इतनी बड़ी बेइज्जती के जिम्मेदार हैं हम और आप

भारत में भूख की समस्या गंभीर होती जा रही है. वैश्विक भूख सूचकांक(ग्लोबर हंगर इंडेक्स) में भारत साल 2015 के 93 वें नंबर से फिसलकर 102 पायदान के शर्मनाक स्तर पर आ चुका है. लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगी कि यह समस्या विशुद्ध रुप से हम और आप जैसे आम नागरिकों की पैदा की हुई है. अगर हम खुद को सुधार लें तो देश में शायद किसी के भी भूखा सोने की नौबत ना आए. आईए बताते हैं कैसे-  

देश की इतनी बड़ी बेइज्जती के जिम्मेदार हैं हम और आप
खाने की बर्बादी रोकें तो सबको मिलेगा भोजन

नई दिल्ली: हमारे देश में भूखे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. ये स्थिति पूरे देश के लिए शर्म का कारण है. पिछली बार जहां हमारा देश ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 93वें स्थान पर था, वहीं इस साल 9 अंक फिसलकर 102 पर पहुंच गया है. हालात इतने बदतर हैं कि भूखे लोगों की संख्या के मामले में हम पाकिस्तान(94 वां स्थान), नेपाल(73 वां स्थान), श्रीलंका(66वां स्थान), बांग्लादेश(88 वां स्थान) से भी नीचे गिर गए हैं. दक्षिण एशिया के यह सभी देश भारत से हर मामले में पीछे हैं. लेकिन अपने नागरिकों को स्वस्थ भोजन प्रदान करने के मामले में उन्होंने हमें पीछे छोड़ दिया है. 

नजर डालतें हैं उन आंकड़ों पर जिन्हें देखकर सबको आनी चाहिए शर्म
ग्लोबल हंगर इंडेक्स बताता है कि भारत में 6 महीने से 23 महीनों के सिर्फ 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकृत भोजन उपलब्ध हो पाता है. यानी 90 फीसदी से ज्यादा हमारे नौनिहालों को अच्छी क्वालिटी का भोजन ही उपलब्ध नहीं हो पाता है. जीएचआई इंडेक्स में भारत को 100 में से मात्र 30.3 अंक मिले हैं यानी मात्र एक तिहाई. पूरे दक्षिए एशिया में भारत सबसे पीछे है.


सबसे बुरी बात तो यह है कि जीएचआई की लिस्ट में दुनिया भर के 117 देश हैं जिनमें भारत की पोजिशन 102 है. यानी हमसे बुरी स्थिति में मात्र 15 देश हैं. साल 2015 के 93वें पायदान के बाद से पिछले चार सालों से हमारा प्रदर्शन निरंतर निराशाजनक ही रहा है. जीएचआई की लिस्ट में हमारा देश साल 2018 में 103,  2017 में 100,  2016 में 97 नंबर पर था. यह स्थिति बेहद बुरी है. 

नहीं सुधरे भारत के लोग तो होगी और बुरी बेइज्जती
वैश्विक बूख सूचकांक में भारत की स्थिति इतनी बदतर होने का प्रमुख कारण है हम भारतीयों की खान पान की आदतें. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि जिस देश में करोड़ो लोग भूखे पेट सोते हैं, उसी देश में कुल खाद्य उत्पादन का 40 फीसदी बर्बाद हो जाता है. पके हुए भोजन का एक तिहाई हिस्सा कूड़े और नालियों में बहा दिया जाता है. आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष 88 हजार 800 करोड़ रुपए की कीमत का भोजन बर्बाद होता है. यानी हम लोग हर रोज 244 करोड़ कीमत का खाना बर्बाद करते हैं. हर भारतीय पूरे साल में औसतन 6 से 11 किलो अनाज बर्बाद करता है. 


इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट के मुताबिक हमारे देश में हर साल 23 करोड़ टन दाल, 12 करोड़ टन फल एवं 21 करोड़ टन सब्जियां ढंग से वितरित ना होने की वजह से हर साल खराब हो जाती हैं.
कुपोषण और भुखमरी से जूझ रहे भारत में हर साल 450 करोड़ का सिर्फ गेहूं बर्बाद हो जाता है. 

थाली में खाना छोड़ने से पहले सोचें
आम तौर पर उच्च मध्य वर्गीय लोग खाने की थाली में खाना छोड़ देते हैं. ऐसा करने वाले लोगों को सोचना चाहिए कि हमारे देश में 5 वर्ष की उम्र तक पहुंचते पहुंचते 10 लाख बच्चे भूख और कुपोषण का शिकार बनकर मौत के मुंह में समा जाते हैं. लगभग 20 करोड़(194 मिलियन) लोग खाना नहीं मिलने के कारण भूखे पेट सोते हैं. हालत ये है कि जितना खाना पूरे साल में इंग्लैण्ड जैसा देश खाता है, उससे ज्यादा हम बर्बाद कर देते हैं. 

भारत की आध्यात्मिक परंपरा का पालन करें
हमारे देश में अन्न को ईश्वर का वरदान मानने की परंपरा है. आज भी देश के कई इलाकों में लोग भोजन ग्रहण करने के पहले ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं. लेकिन उसी देश में आधुनिकता और आडंबर के कारण शादियों में सैकड़ो व्यंजन परोसे जाते हैं. शादी ब्याह जैसे सामूहिक भोजों में थाली भरकर खाना लेने के बाद उसे बड़ी बेरहमी से कूड़ेदान में डाल देते हैं.
इस तरह की हरकतें अन्न को ईश्वरीय वरदान मानने वाले देश में की जाती हैं.

आज भले ही आपके पास भोजन की भरमार है, लेकिन यह ना भूलें कि ठीक उसी समय आपके इर्द गिर्द कोई खाने के लिए तरस रहा है. 

क्या है समाधान?
इतना तो तय है कि भारत में जितने भोजन की बर्बादी होती है, अगर उसे सहेज कर जरुरतमंद लोगों तक पहुंचा दिया जाए तो कुपोषण और भुखमरी की समस्या का समाधान हो जाएगा. अनाज और सब्जियों की बर्बादी के लिए तो कोल्ड स्टोरेज की श्रृंखला खड़ी करने की जरुरत है. जिसके लिए सरकार को कदम उठाने होंगे. 
लेकिन एक सजग नागरिक होने के नाते यह हमारा धर्म है कि हम अपनी थाली में खाना छोड़ें नहीं. उतना ही थाली में लें जितना खा सकें. शादी ब्याह में बर्बाद होने वाला खाना भुखमरी के शिकार लोगों के बीच वितरित करें. हमें इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भूख से व्याकुल जिन करोड़ो भारतीयों को उल्लेख है वह हमारे आस पास ही हैं. 
 
जरुरत है तो बस मानवीय नजरिए से आंखें खोलकर देखने की. 

आज भी सनातन परंपरा के मुताबिक हम भोजन की प्राप्ति के लिए माता अन्नपूर्णा को धन्यवाद देते हैं-   अन्नपूर्णा सदा पूर्णा पार्वती परमेश्वरी