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24 भारतीय किसानों की इजरायल में ट्रेनिंग! जानें- क्यों आधुनिक खेती का KING है ये देश?

झारखंड के किसान इजरायल में सामूहिक कृषि और डेयरी की जानकारी लेने के लिए पहुंचे हैं. जहां वो नई और आधुनिक तकनीक से होने वाली खेती को सीखेंगे. इजरायल को युवा किसानों का देश कहकर भी पुकारा जाता है.

24 भारतीय किसानों की इजरायल में ट्रेनिंग! जानें- क्यों आधुनिक खेती का KING है ये देश?

नई दिल्ली: झारखंड के 24 किसान नई तकनीक से खेती सीखने के लिए इजरायल गए हैं. 20 अक्टूबर तक ये किसान इजरायल में कृषि के नए और आधुनिक टेक्निक और अन्य विषयों की जानकारी लेंगे. जिसे अपनी जमीन पर उतारने की कोशिश की जाएगी.

आपको ये जान कर हैरानी होगी कि इस देश में महज 20 फीसदी जमीन ही खेती के योग्य है. इसके बावजूद भी यहां नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके दुनियाभर में मिसाल पेश करता है. यही वजह है जिसके चलते भारत के झारखंड सूबे से 24 किसानों का एक दस्ता वहां ट्रेनिंग लेने के लिए पहुंचा है. खबर ये भी है कि इसके अगले चरण में 24 महिला किसानों को भेजने की तैयारी की जा रही है.

जानकारी के अनुसार, 

इस बार गोड्डा, दुमका, लातेहार, देवघर गिरिडीह, पश्चिम सिंहभूम, साहिबगंज, रांची, गुमला ,धनबाद, गढ़वा और खूंटी जिले के किसानों को दौरे के लिए चयनित किया गया है. दौरे पर जाने से पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को सभी किसानों के साथ रात्रि भोज किया था.

इजरायल को युवा किसानों का देश भी कहा जाता है. इस देश ने खेती से जुड़ी कई समस्याओं पर न सिर्फ विजय पाई है बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाकर पेश कर दिया. अन्न उत्पादन और उसके रखरखाव के लिए पूरे विश्व में इजरायल की तूती बोलती है.

इसरायल फल और सब्जी का निर्यातक देश है. इजरायल में ड्रिप सिंचाई पद्धति से बड़े पैमाने पर फल और सब्जी की खेती की जाती है. चलिए इसी क्रम में आपको इजरायल की आधुनिक खेती की कुछ तकनीक से रूबरू करवाते हैं.

टपकन सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन)

  • ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल करके पानी और पैसा दोनों बचाया जा सकता है. इस तकनीक में ड्रिप को धीमा और संतुलित कर दिया जाए तो उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है. इजराइल की ये टपकन सिंचाई विधि अब कई देशों में इस्तेमाल की जा रही है. इजरायल से बाहर लगभग 700 ऐसे किसान परिवार हैं जो इस विधि से साल में अब तीन फसलें पैदा कर रहे हैं. जबकि सिर्फ पहले एक बार ही होता था.

अन्न कोष

  • इस देश ने आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करके अनाज को सुरक्षित रखने के लिए एक अन्न कोष का निर्माण किया है. ये एक तरह का बैग है जिसका निर्माण इंटरनेशनल फूड टेक्नोलॉजी कंसलटेंट प्रोफेसर श्लोमो नवार्रो ने किया है. ये बैग हवा और पानी दोनों से सुरक्षा मुहैया कराएगा. दरअसल, 50 फीसदी से ज्यादा फसलें उत्पादन के बाद कीड़े और फफूंद की वजह से सड़ हो जाती हैं. ऐसी स्थिति में अन्न कोष कारगार साबित हो रहा है

जैविक कीट नियंत्रण

  • ये एक प्रकार की कीट नियंत्रक दवा है, जिसके छिड़काव से कीड़े दूर रहते हैं. लेकिन, इसकी एक खास बात ये भी है कि इससे मक्खी और भौरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. कैलिफोर्निया में पैदा होने वाले करीब 60 प्रतिशत स्ट्रॉबेरी पर साल 1990 से इसी दवा का छिड़काव किया जा रहा है, और इसके प्रयोग के बाद से पैदावार में 75 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. इस वक्त 32 देशों में इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें जापान और चिली भी शामिल हैं.

डेयरी फार्मिंग

  • यहां नई तकनीकी का इस्तेमाल करके डेयरी फार्म स्थापित किया गया है. जिसमें होफ हैशरोन डेयरी फार्म, एसएई एफिकिम और एससीआर प्रीसाइज डेयरी फार्म ने मवेशियों के झुंड प्रबंधन का नया तरीका निकाला और इसका प्रयोग अपने डेयरी उत्पादन में बखूबी कर रहे हैं. प्रोजेक्ट के माध्यम से 30 हजार गायों को जोड़ा जा चुका है, जिसका कार्यक्षेत्र 12 राज्यों में फैला हुआ है. इसके माध्यम से प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध की सप्लाई हो रही है. चीन भी इससे प्रभावित होकर इससे संबधित मंत्रालयों के लोगों को सीखने के लिए इजरायल भेजता है.

सॉफ्टवेयर से किसानों की मदद 

  • एग्रीकल्चर नॉलेज ऑनलाइन (AKOL) ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है, जिससे किसानों की हर समस्या का निवारण हो सकता है. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर किसान इजरायल के विशेषज्ञों से मदद ले सकता है. सॉफ्टवेयर के जरिए किसान अपनी फसले बेच सकते हैं और ग्रुप के साथ चर्चा भी कर सकते हैं.

गर्मी में पैदा कर रहे आलू

  • लगभग 30 साल के रिसर्च के बाद हिब्रू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेविड लेवी ने आलू की एक ऐसी प्रजाति का आविष्कार किया जो कि भीषण गर्मी में भी पैदा होती है. आलू दुनिया में खाई जाने वाली प्रमुख खाद्य फसलों में से एक है. गर्मी में इसकी पैदावार नहीं हो पाती थी. लेकिन, इस तकनीक से अब ऐसी जगहों पर भी आलू की बढ़िया पैदावार हो रही है और किसान लाभ कमा रहे हैं. 

ताल-या वाटर टेक्नोलॉजी

  • ताल-या वाटर टेक्नोलाजी के माध्यम से ऐसे प्लास्टिक ट्रे का निर्माण किया गया है, जिससे हवा से ओस की बूंदे एकत्र की जा सकती है. ये ट्रे प्लास्टिक को रीसाइकिल करके बनाया जाता है. जिसमें यूवी फिल्टर और चूने का पत्थर लगाकर पेड़ों के आसपास इसे लगाया जाता है. रात के वक्त इस ट्रे में ओस की बूंदें इकट्ठा हो जाती हैं और ट्रे बूंदों को पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है. इस विधि के माध्यम से पौधों की 50 प्रतिशत पानी की जरूरत पूरी हो जाती है.

कीटनाशक के साथ फसलों का बचाव

  • हिब्रू विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम ने मैक्हेटेसहिम एगन ने ऐसे कीटनाशक की खोज की जो फायदेमंद कीटों को नुकसान नहीं पहुंचाता और फसलों को सुरक्षित भी रखता है. इजरायल का ये कीटनाशक बहुत ही मंद गति से नुकसानदायक कीड़ों को मारता है, जिससे मिट्टी की उर्वरकता बनी रहती है.

रेगिस्तान में 'मछली पालन'

  • मछलियों को अत्यधिक पकड़ा जाना खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन जाता है, मछली ही हजारों लोगों के लिए प्रोटीन का मुख्य जरिया है. लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए जीएफए (ग्रो फिश एनव्हेयर) के एडवांस्ड तकनीकी को अपनाया गया है. इजरायल के जीरो डिस्चार्ज सिस्टम ने मछली पालन के लिए बिजली और मौसम की बाध्यता को खत्म कर दिया. इस तकनीकी में एक ऐसा टैंकर बनाया जाता है जिनपर मौसम और अन्य समस्याओं का असर नहीं पड़ता है.

अब ऐसे में भारत इन 24 किसानों के लिए ये एक सुनहरा है, जब वो वहां, इन सभी तकनीक को अपनी खेती में उतारने की ट्रेनिंग लेंगे.