हिम्मत नहीं हारा ISRO, लॉन्च किया जाएगा Chandrayan-3

ISRO वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर कार्य फिर से शुरू कर दिया है. सूत्रों की माने तो नवंबर 2020 तक Chandrayaan-3 को चंद्रमा पर उतारी जाएगी. इसके लिए वैज्ञानिकों ने अबतक कई कमेटी का गठन कर चुके हैं.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 15, 2019, 02:48 PM IST
    • ISRO ने नवंबर 2020 तक की समय सीमा तय की
    • एक ओवरऑल पैनल और उसकी तीन सब कमेटी का गठन किया गया

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हिम्मत नहीं हारा ISRO,  लॉन्च किया जाएगा Chandrayan-3

नई दिल्ली: सितंबर 2019 में भले ही चंद्रयान 2 को पूर्ण रूप से सफलता नहीं मिली हो. पर हमारे भारतीय वैज्ञानिकों का जज्बा कहीं से कम नहीं हुआ है. सूत्रों की मानें तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization - ISRO) ने Chandrayaan-3 की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए ISRO ने नवंबर 2020 तक की समय सीमा तय की है. 

Chandrayaan-3 के मिशन को ध्यान में रखते हुए ISRO के वैज्ञानिकों ने कई कमेटियों का निर्माण किया है. जिसमें एक ओवरऑल पैनल और उसकी तीन सब कमेटी का गठन किया गया है. इस सिलसिले में अक्टूबर से लेकर अब तक तीन मीटिंग की जा चुकी है. जैसा कि बताया गया है इस मिशन में केवल लैंडर और रोवर ही होगा. क्योंकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर ठीक तरह से कार्य कर रहा है और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ऑर्बिटर करीब सात वर्षो तक सही से काम करेगा.

मंगलवार , समीक्षा कमिटी की बैठक की गई जिसके दौरान विभिन्न सब कमिटियों की सिफारिशों पर चर्चा भी की गई. इस बैठक में संचालन शक्ति, इंजिनियरिंग, सेंसर और नेविगेशन को लेकर प्रस्ताव पेश किए गए. वैज्ञानिकों का कहना है कि Chandrayaan-3 को लेकर काम तेजी से चल रहा है. 10 महत्वपूर्ण पहलुओं पर माइंड मैप तैयार किए जाने की बात भी ISRO द्वारा की जा रही है. लेकिन अभी लैंडर पर पेलोड की संख्या को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिए जाने की बात कहीं गई है.    गत प्रतास में  ISRO के प्लान के अनुसार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो पाई थी. लेकिन इस बार भारतीय वैज्ञानिक किसी प्रकार की चूक नहीँ होने देना चाहते हैं और अपने इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाना की लिए तैयारी में जुट चुके हैं.

हालांकि Chandrayaan-3 के मिशन को नवंबर 2020 तक पूरी किए जाने की बात पर पुष्टि नहीं की गई है. क्योंकि किसी वैज्ञानिक की तरफ से यह सूचना आई है कि लैंडर, रोवर, रॉकेट और पेलोड्स को तैयार करने में कम से कम तीन साल का समय तो लगेगा ही, लेकिन कितनी भी जल्दी काम किया जाए फिर भी 2 साल का समय लग जाएगा तो देखते हैं कि ISRO वैज्ञानिक कितनी जल्दी अपने मिशन को अंजाम तक पहुंचाते हैं.

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