close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

यूपी में बनने जा रहा है विश्व का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने का दावा किया. इसका निर्माण उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेवर जिले में किया जा रहा है. नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच की दूरी लगभग 56 किलोमीटर की है.   

यूपी में बनने जा रहा है विश्व का सबसे बड़ा एयरपोर्ट

लखनऊ: लंबे समय से सुर्खियों में बने रहने वाले जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की 80 फीसदी जमीन आखिरकार अधिकृत कर ली गई.  बुधवार को किसानों का एक समूह लखनऊ पहुंचा. वहां उन्होंने  मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  को जमीन अधिकृत संबंधी कागजात दिया.

इस मौके पर प्रशंसन्नता जताते हुए योगी ने किसानों को शुक्रियादा किया और कहा कि जेवर और उसके आस-पास के क्षेत्र विकसित नहीं हैं. क्षेत्र के विकास के लिहाज से ही जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, ताकि जेवर और उसके आस-पास के क्षेत्र के विकास के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल सकें. साथ ही योगी ने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट उदहारण पेश करता है कि कैसे आपसी सहमति से विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है.

कब से शुरू की जाएगी सेवाएं ?
बता दें कि जेवर एयरपोर्ट की नींव यूपी सरकार ने 1 अक्टूबर 2018 को रखी थी.  हालांकि, इसका निर्माण कार्य 2020 से शुरू किया जाएगा और 2023 से हवाई सेवाओं का संचालन किए जाने की उम्मीद है.  इस एयरपोर्ट के निर्माण कार्य के लिए 5000 हेक्टेयर जमीन की पेशकश की गई है. 

जिला प्रशासन ने अबतक 1005 हेक्टेयर जमीन किसानों से ले चुके हैं, सरकार ने 92 हेक्टेयर जमीन पहले एयरपोर्ट के नाम कर चुकी है. लगभग 1239 हेक्टेयर जमीन किसानों से अधिकृत की जा रही है. अब कंपनी के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और नवंबर अंत तक इस काम को पूरी किए जाने की बात कही गई है. एयरपोर्ट के निर्माण कार्य के लिए किसी भी कंपनी का चयन करने के लिए 80 प्रतिशत जमीन को अधिकृत किया जाना था.  30 अक्टूबर को यह शर्त पूरी की जा चुकी है.  एयरपोर्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाया जाएगा. 

कितना आएगा खर्च ?
एयरपोर्ट का निर्माण चार चरणों में किया जाएगा. पहले चरण का निर्माण कार्य 1334 हेक्टेयर भूमि पर किया जाएगा, जिसमें लगभग 5000 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है. 

इसमें 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों को हवाई सेवाएं दी जाएंगी. सूत्रों की मानें तो जेवर एयरपोर्ट के चारों चरणों को मिलाकर लगभग 20,000-30,000 हजार करोड़ खर्च होने की बात कहीं जा रही है.  अंतिम चरण का निर्माण 2040 तक बताया जा रहा है और उस समय एयरपोर्ट की यात्री क्षमता सात करोड़ यात्री सालाना बताई जा रही है.

हाईटेक सिटी बसाने की है योजना
अर्नेस्ट एंड यंग ने सोमवार को यमुना प्राधिकरण में एयरपोर्ट सिटी बसाए जाने पर  प्रस्ताव दिया है. एयरपोर्ट सिटी का निर्माण विश्व के कई देशों में एयरपोर्ट के आसपास बसे शहरों की तरह ही किया जाएगा.  यमुना प्राधिकरण की होने वाली बोर्ड बैठक में एयरपोर्ट सिटी को पारित करा लिए जाने की  योजना है. बैठक में मंजूरी के बाद इसे प्रशासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

यह प्रोजक्ट एयरपोर्ट के चारो ओर लगभग 1.5-2 हजार हेक्टेयर जमीन पर बसाया जाएगा. जिसमें बायो-डायवर्सिटी पार्क, मेडिकल टूरिज्म, इंटीग्रेटिड टाउनशिप, लॉजिस्टिक, कंवेंशन सेंटर और एग्जीबिशन सेंटर को भी शामिल किया जाएगा.

कहां से कहां तक किया जा रहा है विस्तार
जेवर में बनाए जा रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट को रैपिड रेल से जोड़े जाने की योजना है. यमुना प्राधिकरण इस कार्य को करेगी.

राइट्स ने बताया है कि इसे दिल्ली में अशोक नगर से जोड़ा जाएगा.  दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को लेटर भेजकर ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-2  से जेवर एयरपोर्ट तक लाइट मेट्रो  का निर्माण करने की बात कही गई है.

यूपी में कितने एयरपोर्ट 
उत्तर प्रदेश में मौजूदा समय में केवल 2 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं. जिसमें से एक राज्य की राजधानी लखनऊ में चौधरी चरण सिंह और दूसरा बनारस में लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट है.

तीसरा अंतरराष्ट्रीय जेवर एयरपोर्ट बनने जा रहा है.

जमीन अधिकृत पर किसानों का विवाद
करीब एक साल से नोएडा एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन के मुआवजा दरों में वृद्धि को लेकर किसान संघर्ष समिति के सरकार का विरोध कर रही थी . विरोध की वजह किसानों को मुआवजे में मिलने वाली रकम थी. किसान संघर्ष समिति ने  मुआवजे की रकम के विरोध में टोल प्लाजा जाम किया था. 

लेकिन जेवर कस्बे व टोल प्लाजा के आसपास 10 थानों की पुलिसों ने मिलकर चक्का जाम नहीं होने दिया .  इस जाम के चलते 43 किसानों को गिरफ्तार कर जेल में भी बंद किया गया था. लेकिन बाद में बात-विचार कर दोनों पक्षों ने जमीन अधिकृती पर अपनी सहमति जताई और 80 फीसदी जमीन अधिकृत की जा चुकी है.