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जल्द ट्विटर की जगह ले सकता है Mastodon, नहीं होगी कोई पाबंदी

पिछले दिनों दो बड़े सोशल नेटवर्किंग साइट व्हाट्सएप्प और ट्विटर में कुछ गड़बड़ियां पाई गईं. जासूसी से लेकर अकाउंट सस्पेंड करने के मामलों ने लोगों को इन साइटों से कन्नी काटने को मजबूर कर दिया. व्हाट्सएप्प पर पेगासस स्पाईवेयर से पत्रकारों और मानवाधिकार एक्टिविस्टों की जासूसी करने का मामला सामने आया तो ट्विटर पर वकील संजय हेगड़े का अकांउट दो-दो बार सस्पेंड कर देने के बाद नेटीजंस ने इनसे दूरी बनानी शुरू कर दी. 

जल्द ट्विटर की जगह ले सकता है Mastodon, नहीं होगी कोई पाबंदी

नई दिल्ली: लोगों को व्हाट्सएप्प का विकल्प तो नहीं मिला है, लेकिन ट्विटर का विकल्प Mastodon के रूप में मिल गया है. मैस्टोडॉन ट्विटर की ही तरह एक सोशल नेटवर्क है जहां कुछ भी पोस्ट कर सकते हैं, फोटो और वीडियो को Publish  कर सकते हैं और दूसरों को फॉलो भी कर सकते हैं. भारत में ट्विटर के 30 मिलियन से भी ज्यादा इस्तेमाल करने वाले नेटीजंस हैं. जो ट्विटर की घृणास्पद बातें, धार्मिक ओछी टिप्पणियों और राजनीतिक प्रचार पर शिकंजा कसने वाले नए नियमों से बिल्कुल भी खुश नहीं लगते.

दो बार हुआ सस्पेंड हुआ हेगड़े का अकाउंट 

कील संजय हेगड़े के अकाउंट को हटाए जाने से ट्विटर यूजर्स में रोष दिख रहा है जो शायद मैस्टोडॉन के नए प्रयोग को प्रेरित कर रहा है. दरअसल, संजय हेगड़े का अकाउंट पहली बार 1936 में नाजी जर्मनी के दौर की एक फोटोग्राफ जिसमें एक जर्मन राष्ट्रवादी अगस्त लैंडमेसर नाजी को सैल्यूट कर रहा है, उसको रिट्वीट करन के लिए बंद कर दिया गया. इस रिट्वीट को ट्विटर ने हेट स्पीच और फोटो के नियमों का उल्लंघन माना. जबकि दूसरी बार 2017 की एक ट्वीट जिसमें संजय हेगड़े ने फांसी चढ़ाए जा रहे दो क्रांतिकारियों की कविता को रिट्वीट किया था. इस कविता में उन्होंने शीर्षक दिया था 'लटका दो उन्हें' जिसे ट्विटर ने कोड के विरूद्ध माना. 

ट्विटर के नियम अल्पसंख्यकों के खिलाफ !

इसी बीच एक और सोशल साइट मैस्टोडॉन जिसके फीचर्स ट्विटर की तरह ही है, उसपर यूजर्स का ध्यान गया. इसकी सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसे यूजर्स अपने सर्वर के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि इस सोशल नेटवर्क के बहुत से सर्वर होंगे. यूजर्स को जिस भी सर्वर से अकाउंट चलाने की इच्छा हो, वह यूज कर सकता है. मैस्टोडॉन का यहीं फायदा ट्विटर को नुकसान पहुंचा रहा है और भविष्य में और भी पहुंचा सकता है. दरअसल, भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के एक गुट का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म उन पर शिकंजा कस रहा है. हालांकि, ट्विटर ने अपनी ओर से सफाई देने की कोशिश भी की. ट्विटर की ओर से आधिकारिक बयान में कहा कि ट्विटर किसी भी विचारधारा और राजनीतिक आधार पर अपनी सामग्री पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाता. 

मैस्टोडॉन के फीचर्स से खुश हो रहे यूजर्स

कुछ विशेषज्ञों ने हालांकि यह कहा कि ट्विटर सरकार के खिलाफ किसी भी तरह के सामाग्री पर सख्त रवैया अपना रहा है और उन्हें कंट्रोल भी कर रहा है. इसको देखते हुए बहुत से लेखक और एक्टिविस्टों ने मैस्टोडॉन पर अकाउंट खोल लिए हैं. मैस्टोडॉन लोगों को ट्विटर का एक अच्छा विकल्प नजर आने लगा है. मैस्टोडॉन एक फ्री और सेल्फ होस्टेड सोशल नेटवर्किंग सेवा है जो यूजर्स को ट्विटर से अच्छे ऑप्शन दे रहा है. मैस्टोडॉन क्योंकि सबको अपने सर्वर से कंट्रोल करने की अनुमति देता है तो इसपर किसी तरह का कोड ऑफ कंडक्ट भी नहीं, ना हा कोई शर्तें हैं. इस विकल्प का फायदा मैस्टो़डॉन को होता दिख भी रहा है. यह सॉफ्टवेयर 2016 में लांच हुआ और 2017 से सर्विस में आया. शुरुआती दौर में ही इसके 2.2 मिलियन यानी 22 लाख से भी ज्यादा यूजर्स हैं. हालांकि, ट्विटर के पास फिलहाल 300 मिलियन यूजर्स हैं. लेकिन इस आंकड़े में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है.