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तबाही मचाने वाला मॉनसून अर्थव्यवस्था के लिए लाएगा खुशखबरी

चार महीने जबरदस्त बरसात के बाद मॉनसून अब लौटने लगा है. भले ही भारी बारिश के कारण देश के कई इलाकों में तबाही का माहौल दिखा. लेकिन कृषि प्रधान भारत में मॉनसून के आखिर की यह बरसात रबी की अच्छी फसल के लिए उम्मीदें भी बंधाता है. आशा की जा रही है कि देश की अर्थव्यवस्था पर इसका अच्छा असर दिखेगा.  

तबाही मचाने वाला मॉनसून अर्थव्यवस्था के लिए लाएगा खुशखबरी
लहलहाएंगे खेत, अर्थव्यवस्था होगी शानदार

नई दिल्ली: नवरात्रि के  बाद मॉनसून की विदाई होने लगी है. इस साल मॉनसून के आखिरी महीनों में जमकर बारिश हुई. जिसकी वजह से देश के कई इलाकों में तबाही भी देखने को मिली. 

देर तक रहा मॉनसून का असर
मौसम विभाग ने बताया है कि मॉनसून का असर देर तक रहा. सामान्य हालातों में इसकी विदाई सितंबर पहले हफ्ते में होनी चाहिए थी. लेकिन मॉनसून इस बार 10 अक्टूबर तक टिका. लेकिन उत्तर पश्चिम भारत में प्रति चक्रवात के असर की स्थिति और नमी वाली स्थिति में लगातार कमी आने के कारण बुधवार को मॉनसून पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान से बुधवार को विदा हो गया. इस सप्ताह के आखिर तक मॉनसून पूरे देश से विदा हो जाएगा. 

मॉनसून ने देर से विदाई का रिकॉर्ड बनाया
मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार मॉनसून ने देर से विदाई में रिकॉर्ड बनाया है. इसके पहले सबसे विलंब में मानसून की विदाई 1961 में एक अक्टूबर को दर्ज की गई थी। इसके पहले साल 2007 में 30 सितंबर को विलंब से मानसून की विदाई हुई थी। लेकिन इस बार मॉनसून उससे भी लंबे समय यानी 10-11 अक्टूबर तक अपना रंग दिखाता रहा. 

आखिर की भारी बारिश से मची थी तबाही
इस बार मॉनसून के आखिरी समय में बारिश से देश के 22 राज्यों में 25 लाख से ज्यादा लोगों पर इसका असर दिखा. बुधवार को गृह मंत्रालय द्वारा रिलीज की गई जानकारी के मुताबिक बारिश के कारण सबसे ज्यादा 399 जानें महाराष्ट्र में गईं. बंगाल में 227, मध्य प्रदेश में 182, बिहार में 166, केरल में 181, गुजरात में 169 कर्नाटक में 106 और असम में 97 मौतें हुई. देश के 357 जिलों में बाढ़ और जमीन धसकने की घटनाएं सामने आईं. प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ और बारिश के कारण 738 लोग घायल हुए और 20,000 पशुओं की जान गई. 1.09 लाख घर पूरी तरह, 2.05 लाख आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए और 14.14 लाख हेक्टेयर में लगी हुई फसलों पर बुरा असर दिखा. 

लेकिन रबी की फसल के लिए अच्छी खबर
ज्यादा बारिश ने भले ही खेतों में लगी हूई फसल को नुकसान पहुंचाया है. लेकिन रबी की आने वाली फसल के लिए मॉनसून के आखिर की यह बारिश अच्छी खबर लेकर आई है. क्योंकि धरती में नमी की मात्रा अधिक हो गई है. जिसका रबी की फसलों पर इसका बहुत अच्छा असर पड़ेगा. जिन क्षेत्रों में सिंचाई के उपयुक्त साधन नहीं हैं, वहां भी जमीन की नमी के कारण अच्छी उपज होगी. खास तौर पर अरहर या चना जैसी दलहन फसलों की रोपाई के लिए नमी पर्याप्त मात्रा में मिलेगी. इस बार बारिश की वजह से दलहन की पैदावार ज्यादा इलाके में की जा सकती है.  

तिलहन की पैदावार भी होगी अच्छी
मॉनसून की आखिरी बारिश के दौर में गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जमकर बारिश हुई. इन इलाकों में तिलहन फसलों(जिनसे तेल निकाला जाता है) की बुआई तेज हुई है. अच्छी बारिश के चलते इस बार फसल ज्यादा भी होने की संभावना है. इस बार सरकार खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर होना चाहती है. इस बार की बरसात से तिलहन की फसल पर अच्छा असर दिख रहा है. हो सकता है कि इस बार सरकार खाद्य तेल उत्पादन का अपना लक्ष्य पूरा भी कर ले. 

देश का कोई इलाका नहीं रहा सूखा 
अच्छी खबर यह भी है कि देश का कोई भी इलाका सूखा नहीं रहा. पिछले कई मॉनसूनों में देखा जाता था कि देश के कुछ हिस्सों में बहुत ज्यादा बारिश होती थी. जबकि कुछ हिस्से सूखे रह जाते थे। लेकिन मौसम विभाग ने बताया है कि इस बार बारिश का वितरण सही रहा है. कोई भी क्षेत्र अतिवृष्टि या अनावृष्टि का शिकार नहीं हुआ है. देश के हर हिस्से में कमोबेश बारिश हुई जरुर है. जो कि खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत बेहतर है क्योंकि इससे देश के हर हिस्से के किसानों को लाभ होगा. 

अच्छी बारिश की वजह से ठंड भी पड़ेगी जबरदस्त
अक्टूबर की शुरुआत तक चली बारिश की वजह से तापमान औसतन दो से तीन डिग्री कम बना रहेगा। पिछले कुछ सालों से अक्टूबर के महीने में भी गर्मी देखी जा रही थी. यहां तक कि नवंबर के मध्य तक भी गर्म कपड़ों की जरुरत नहीं पड़ती थी. लेकिन अक्टूबर तक हुई बारिश की वजह से ठंड ने भी दस्तक दे दी है. जिसकी वजह से नवरात्रि में ही सर्दी शुरु हो गई है. उम्मीद की जा रही है कि दीपावली तक अच्छी खासी सर्दी शुरु हो जाएगी. 
मौसम विभाग ने भी अनुमान लगाया है कि देर तक हुई बारिश के कारण औसत तापमान में दो से तीन डिग्री तक की कमी बनी रह सकती है.