प्रधानमंत्री ने किया था आरंभ का शुभारंभ, अब आईएस अधिकारी करेंगे गरीब बच्चों की मेंटरशिप

आपने प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के बारे में सुना होगा, जिसमें सदन के चुने गए प्रतिनिधि अपने संसदीय क्षेत्र के किसी एक गांव को गोद लेते हैं और उसका जीर्णोद्धार करते हैं. अब उसी तर्ज पर मोदी सरकार की एक और योजना है जिसमें सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर आईएस आईपीएस बनने की तैयारी में जुटे प्रशिक्षु बच्चों को गोद लेंगे और उनकी पढ़ाई में मेंटर की भूमिका निभाएंगे.   

प्रधानमंत्री ने  किया था आरंभ का शुभारंभ, अब आईएस अधिकारी करेंगे गरीब बच्चों की मेंटरशिप

नई दिल्ली: पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर आरंभ प्रोग्राम का शुभारंभ किया था. इस प्रोग्राम की व्यवस्था कुछ यूं है कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर भविष्य के आईएस व आईपीएस बनने जा रहे प्रशिक्षु समाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर, पिछड़े औऱ जनजातीय बच्चों की प्रोफेशनल शिक्षा और काउंसिलिंग का जिम्मा उठाएंगे. इस प्रोग्राम में दसवीं की परीक्षा पास कर चुके बच्चों को Mentee के रूप में यानी कि जिसे प्रशिक्षण और गाइडेंस की जरूरत है, उसे रखा गया है. इस प्रोग्राम की शुरूआत प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों गुजरात के केवड़िया में सरदार पटेल की प्रतिमा के पास किया. फिलहाल इसके तहत गुजरात के जनजातीय समुदाय के 425 छात्रों को चिन्हित किया गया है जो खासकर भरूच और छोटा उदयपुर जिले से आते हैं. 

मेंटरशिप प्रोग्राम से संवारा जाएगा भविष्य

इस प्रोग्राम का मुख्य नारा रखा गया है Nrture the Future जिसे सरल शब्दों में समझें तो भविष्य को बेहतर गाइडेंस के साथ उज्जवल बनाने की कवायद है. इसे एक मेंटरशिप प्रोग्राम के रूप में देखा जा रहा है. आईएस-आईपीएस प्रशिक्षु जीवनपर्यंत उस गोद लिए बच्चे के मेंटर की भूमिका में रहेंगे. इससे न सिर्फ देश के भविष्य को संवारा जाएगा बल्कि कल को एक बड़ी जिम्मेदारी निभाने जा रहे सिविल सर्विस के प्रशिक्षु के अंदर भी समाजिक दायित्व को जगाया जा सकता है. 

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गुजरात के केवड़िया से पायलट टेस्ट

फिलहाल इस प्रोग्राम को पायलट प्रोग्राम के रूप में गुजरात के केवड़िया के बच्चों को साथ जोड़कर टेस्ट किया जा रहा है. मोदी सरकार ने इस पहल को आगे बढ़ाने की अपील की है. इस प्रोग्राम की मदद से आने वाले सालों में तकरीबन 1 लाख छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए एक विशेष पोर्टल भी बनाया जाएगा ताकि बच्चों को जोड़ने की प्रक्रिया से लेकर उनके गाइडेंस तक की सारी जानकारी पारदर्शिता के साथ एक किया जा सके. इस मुहिम में अभी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के प्रशिक्षुओं को शामिल किया गया है जो आईएस-आईपीएस बनने के लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं. जल्द इसके देश के अलग-अलग राज्यों में कार्यरत सरकारी सेवार्थियों तक जोड़ा जाएगा. 

सरदार पटेल के सिद्धांतों से प्रेरित है प्रोग्राम

दिलचस्प बात यह है कि आखिर इस प्रोग्राम को सरदार पटेल की जयंती पर 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के करीब लांच क्यों किया गया ? दरअसल, यह तो सबको पता है कि सरदार पटेल आजाद भारत के पहले गृह मंत्री थे. लेकिन सरदार पटेल ने जिसदिन गृह मंत्री पद संभाला उसी दिन दिल्ली के मेटकैफे हाउस में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पहले बैच के अधिकारियों को संबोधित किया था. उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि "भारत अभी-अभी आजाद हुआ है और हमें इसलिए सुराज्य जिसे आज गुड गवर्नेंस के अंग्रेजी नाम से जाना जाता है, उसके साथ सरकार चलाना है. उन्होंने अंग्रेजी राज में प्रशासनिक अधिकारियों के तौर-तरीकों पर बात करते हुए कहा था कि आपके पहले जो अंग्रेजी प्रशासनिक अधिकारी थे, उनकी व्यवस्था और उन तक पहुंच आमलोगों के पहुंच से बाहर थी लेकिन आपकी यह जिम्मेदारी है कि आप आमजनों के बीच में रहकर अपने समाजिक दायित्वों का बखूबी पालन करेंगे." 

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जल्द पहुंच होगी समूचे देश में

भारत सरकार के इस प्रोग्राम से जितने भी बच्चे जुड़ेंगे उन्हें आधार से लिंक किया जाएगा. आधार से लिंक करने के पीछे सरकार का तर्क है कि अगर कभी भविष्य में इनसे किसी कारणवस संपर्क न हो सके तो आधार के जरिए कुछ जानकारी निकाली जा सके. गु़ड गवर्नेंस की तर्ज पर शुरू की गई इस योजना को जल्द पूरे देश में फैलाया जाएगा. शुरूआत जनजातीय समुदाय के बच्चों से की गई है लेकिन जल्द ही इसे उन तबकों तक पहुंचाया जाएगा जिसके पास संसाधनों की काफी कम है.