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गांवों में ही युवाओं को रोजगार देने की तैयारी, कृषि क्षेत्र को विकसित करेगी सरकार

 योजना के तहत गांवों में 3000 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी. मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोलने के लिए कृषि की पढ़ाई किए युवा, स्वयं सहायता समूहों, को-ऑपरेटिव्स को तरजीह दी जाएगी. एक मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोलने का मतलब है कम से कम 3 लोगों को रोजगार मिलना. 

गांवों में ही युवाओं को रोजगार देने की तैयारी, कृषि क्षेत्र को विकसित करेगी सरकार

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के साथ सरकार देश की बिगड़ रही आर्थिक व्यवस्था से भी लड़ रही है. इसकी प्लानिंग के तहत कई बड़ी योजनाएं लागू की जा चुकी हैं. लॉकडाउन की स्थिति के कारण बड़ी संख्या में शहरों से गांवों की ओर पलायन हुआ है. अब आगे की स्थिति ऐसी भी हो सकती है कि बड़ी संख्या में युवा रोजगार खोजेंगे. ऐसे में सरकार ने इसका हल खोज लिया है. 

ऑर्गेनिक फसल उगाने पर जोर
कोरोना की वजह से सरकार का लक्ष्य अब गांवों में ही रोजगार दे देने का है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंत्रालय को आदेश दिया है 1 लाख से अधिक गांवों में ऑर्गेनिक फसल उगाने को लेकर जागरूकता मिशन मोड में अभियान चलाया जाए. इन गांवों में मिट्टी की क्वालिटी अच्छी करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाए. आदेश में कहा गया है कि हर खेत की मिट्टी की हेल्थ का रिकॉर्ड हो, कोई भी खेत न छूटे.

एक प्रयोग शाला से 3 लोगों को रोजगार
इस योजना के तहत गांवों में 3000 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी. मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोलने के लिए कृषि की पढ़ाई किए युवा, स्वयं सहायता समूहों, को-ऑपरेटिव्स को तरजीह दी जाएगी. एक मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोलने का मतलब है कम से कम 3 लोगों को रोजगार मिलना. यानी लगभग 9000 लोगों को गांवों में ही रोजगार दिया जाएगा. 

केमिकल युक्त खाद पर रोक है लक्ष्य
इस बारे में कृषि मंत्रालय में हाल ही में एक बड़ी बैठक हुई है. जिसमें कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा कृषि राज्य मंत्री पुरषोत्तम रूपाला, कैलाश चौधरी और मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल मौजूद थे. सरकार चाहती है कि रासायनिक फर्टिलाइजर का मनमाना ढंग से प्रयोग रुके ताकि मिट्टी में पोषकतत्वों की कमी न हो और रासायनिक फर्टिलाइजर्स का बुरा असर मिट्टी की हेल्थ पर न पड़े.

वहीं युवाओं को गांव में ही रोजगार मिल जाए उन्हें शहर की तरफ न भटकना पड़े. 

2015 से चल रही है सॉइल हेल्थ कार्ड योजना
जिन युवाओं को मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोलना है वो कृषि महाविद्यालय ICAR के संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र और राज्य के सॉइल कंजर्वेशन विभाग से संपर्क में रहें. खेत की मिट्टी की हेल्थ इंसानों की हेल्थ से सीधी जुड़ी हुई है. वहीं मिट्टी की क्वालिटी ठीक होने पर पैदावार भी बढ़ती है.

इससे किसानों को भी पता चल सकेगा कि खेत में किस फर्टिलाइजर की जरूरत है और उनका खर्च भी बचेगा. सरकार 2015 से सॉइल हेल्थ कार्ड योजना चला रही है जिसमें खेतों की मिट्टी का परीक्षण मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में होता है‌. 

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रखा जाएगा खेतों की मिट्टी का रिकॉर्ड
मिट्टी में पौधों के लिए बड़े पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम और सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, लौह, तांबा, मैंगनीज तथा बोरॉन की जरूरत होती है. मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं को ICAR और राज्य के कृषि महाविद्यालय और कृषि विज्ञान सेंटर से जोड़ दिया जाता है ताकि खेतों की मिट्टी का रिकॉर्ड रखा जा सके. 

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