घाटी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट जो किसानों दे रहा जल संरक्षण का संदेश

जम्मू कश्मीर में हालात को सामान्य बनाने के लिए राज्य प्रशासन तो काम कर ही रही है, लेकिन जिला प्रशासन भी अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रही है. जिला प्रशासन ने उधमपुर में जीविका मिशन की शुरुआत की है जिससे कि खेतों की सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति के साथ-साथ जल संरक्षण के तौर-तरीकों को बढ़ाया जा सके.   

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 29, 2019, 05:20 PM IST
    • तालाबों और ड्रिप इरिगेशन के जरिए सिंचाई का मिल रहा लाभ
    • सीजनल सब्जियां ही नहीं अब उगाई जा सकेंगी मुख्य फसलें भी
    • ड्रीम प्रोजेक्ट का अन्य क्षेत्रों में भी होगा विस्तारीकरण

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घाटी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट जो किसानों दे रहा जल संरक्षण का संदेश

श्रीनगर:  प्रदेश में किसानों के जीवनयापन, सूखे की समस्या से निपटने के लिए उधमपुर में जिला प्रशासन ने 'जीविका' नााम से एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है. प्रशासन का कहना है कि सिंचाई के परंपरागत और आधुनिक दोनों ही तरीकों को अपना कर बहु-फसली खेती करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से जल संरक्षण कर छोटे और मझोले किसानों को लाभ पहुंचाने के लिहाज से काफी  प्रभावी कदम माना जा रहा है.

जीविका मिशन के तहत, सभी विभागों के कर्मचारी और कामगर जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मनरेगा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और गांव देहात में चल रही किसी भी सरकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करेंगे ताकि पानी को न्यायिक तरीके से बचाते हुए बेहतर काम किया जा सके.

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तालाबों और ड्रिप इरिगेशन के जरिए सिंचाई का मिल रहा लाभ

इस जीविका योजना को पूरी तरीके से अपनाने वाला चक-रखवाला उधमपुर का पहला गांव बना. इस प्रोजेक्ट के तहत तालाबों की खुदाई से लेकर पानी के उचित प्रयोग के लिए ड्रिप-सिंचाई तंत्रों को अपनाया जाने लगा है. इससे जो गरीब से गरीब लोग हैं, उनके जीवनस्तर में सुधार की गुंजाइश बढ़ेगी. बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक उधमपुर के अलग-अलग पंचायतों में तकरीबन 840 तालाबों का निर्माण करा लिया गया है. ज्यादातर तालाब और पोखर मनरेगा के कामगरों ने बनाए हैं.
 
सीजनल सब्जियां ही नहीं अब उगाई जा सकेंगी मुख्य फसलें भी

चक गांव के एक किसान मुल्ख राज कहते हैं कि वे एक किसान हैं और पिछले 30 साल से सीजनल सब्जियों को उगा कर अपना जीवनयापन करते हैं. उन्होंने कहा कि वहां के ज्यादातर किसानों की तरह वह भी खेती के लिए बारिश के पानी पर निर्भर थे लेकिन अब जीविका के तहत गांव में ही तालाबों की खुदाई के बाद उनके लिए सिंचाई आसान हो गई है. इसके अलावा ड्रिप सिंचाई के तहत उनके लिए पानी की समस्या नहीं रही बल्कि इससे वे पानी बचा भी लेते हैं. इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ी है बल्कि परिवार की देखरेख भी अच्छे से कर पा रहे हैं. इसके लिए वह भारत सरकार और जिला प्रशासन का धन्यवाद भी करते हैं. 


 
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ज्यादतर किसानों के यहीं हालात हैं. सब के सब सीजनल खेती यानी कि सब्जियों को उगा कर ही किसी तरह से पेट पालने को मजबूर रहते थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट के बाद उनके लिए एक उम्मीद बंधी है कि सिंचाई की समस्या को दूर कर ज्यादा से ज्यादा फसलें भी उपजाई जाए और जल संरक्षण की दिशा में भी काम होता रहे. 

ड्रीम प्रोजेक्ट का अन्य क्षेत्रों में भी होगा विस्तारीकरण

उधमपुर के कृषि विभाग के सब-डिविजनल अधिकारी हरबंस सिंह कहते हैं कि जीविक एक ड्रीम प्रोजेक्ट है वहां के डिप्टी कमिशनर डॉ. पियूष सिंगला का. चक रखवाला में एक और प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया है ताकि पानी की कमी की समस्या का इलाज हो सके. तालाब बनाने और ड्रिप-सिंचाई तंत्रों के अपनाए जाने से एक-एक बूंद का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा फसलों के उगाने की तर्ज पर काम किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि जीविका प्रोजेक्ट के तहत चक रखवाला लाभ लेने वाला पहला गांव है. अब इस प्रोजेक्ट का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारीकरण किया जा रहा है.  

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