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सौर ऊर्जा के नए प्रयोगों से इतिहास रच रहा है राजस्थान

जब देश-दुनिया जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रही है और पर्यावरण संरक्षण का मंत्र तक दिया जा रहा है,  तब भारत सौर ऊर्जा उत्पादन के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.   

सौर ऊर्जा के नए प्रयोगों से इतिहास रच रहा है राजस्थान

जयपुर: Solar Energy के उत्पादन के मामले में भारत ने निर्धारित समय से चार साल पहले ही अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है. अब नित इसमें नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं. राजस्थान जो भारत का Dry state कहा जाता है, वह सोलर ऊर्जा के अनोखा उपयोग से उदाहरण सेट करता नजर आता है. हाल ही में राज्य में Solar Pump  का इस्तेमाल सिंचाई के लिए न करके आटा चक्की, जानवरों के चारा काटने की मशीन के रूप में तो कभी कोल्ड स्टोरेज के लिए करना शुरू कर दिया है. इस तकनीक को Universal Solar Pump Controller के तहत घरेलू उपकरणों जैसे कि मिक्सर, ग्रिंडर व अन्य के लिए इस्तेमाल करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है.  

लीक से हटकर हो रहे हैं कई प्रयोग

राजस्थान में लीक से हटकर ऐसे कई अनोखे प्रयोग किए कर रहे हैं. पिछले दिनों राज्य कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने दुर्गापुर के Industrial Horticulture Innovation and Training Institute में इस तरह के बहुतों डेमो देखे, और कईयों को देखकर तो भौचक्के भी रहा गए. उन्हें वहां मौजूद लोगों ने तकनीक के काम करने और कुछ अहम पक्षों की जानकारी दी. USPC के विषय में मुख्यतः बताया गया कि यह न सिर्फ किसानों के सिंचाई की समस्याओं का इलाज कर सकता है बल्कि घरेलू उपकरणों को चलाने में मदद भी कर सकता है. यानी यह तकनीक एक पंथ कई काज से लैस है. हालांकि कृषि मंत्री ने फिर भी कहा कि राज्य सरकार पहले इसका पूरा अध्ययन करेगी और तब इसे प्रसारित करने या किसी निवेश के लिए अंतिम मुहर लगाएगी. 

USPC तकनीक का जल्द होगा विस्तारीकरण

राजस्थान में सौर ऊर्जा तकनीक से कई प्रयोग किए जा रहे हैं. राज्य सरकार की ओर से कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की पूरी सहायता भी कर रही है. बीज वितरण से लेकर सौर ऊर्जा चलित तकनीकों के बढ़ावे को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. 
USPC तकनीक का और भी विस्तारीकरण किया जाएगा और इससे किसानों की समस्याओं को खासकर सिंचाई की, उसे दूर करने का प्रयास भी किया जाना है. 

राजस्थान बन गया है सोलर पॉवर हब

मालूम हो कि राजस्थान की गहलोत सरकार ने सौर ऊर्जा नीति-2019 के तहत 2020-21 के वित्तीय वर्ष में राज्य में 25 GW बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है. राज्य सरकार ने ऐलान किया था कि अगले 5-6 सालों में नवीनकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों (Renewable Energy ) पर खास काम कर इसे कंपनियों की मदद से 50 GW तक पहुंचाया जाएगा. राजस्थान सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए Rajasthan Renewable Energy Corporation Limited का सहयोग भी मांगा है.
राज्य सरकार की सौर ऊर्जा नीति-2019 में विकेंद्रीकृत Grid Projects को विकसित करने पर भी बल दिया जा रहा है. छत के ऊपर सौर प्लेट लगाना, सोलर पार्क का निर्माण, सौर ऊर्जा चलित गाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा चलाना और उसके चार्जिंग के लिए स्टेशन बनाना, इन सभी को शामिल किया गया है. इस नीति से राज्य में सोलर प्रोजेक्टस को खास मजबूती भी मिलेगी. और क्योंकि राजस्थान में सौर ऊर्जा क्षेत्र के विकास की गुंजाइश बहुत ज्यादा है, तो राज्य सरकार इसपर काम भी कर रही है. 

सोलर ऊर्जा लक्ष्य को चार साल पहले पाया

सितंबर महीने में Ministry of Renewable Energy ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें लिखा था कि भारत ने अपने निर्धारित लक्ष्य को निर्धारित समय से चार साल पहले पा लिया है. दरअसल, लक्ष्य था कि देशभर में 2022 तक 20 GW सोलर पॉवर को स्थापित करने का जिसे 2018 के जनवरी में ही पूरा कर लिया गया. इसकी जानकारी Science and Technology विभाग के प्रमुख डॉ अखिलेश गुप्ता ने दी थी. इतना ही नहीं भारत ने एक और लक्ष्य रखा था कि 2022 तक देश को अपने सोलर पॉवर की क्षमता बढ़ा कर 100 GW  तक कर लेनी है. 

पर्यावरण की समस्याओं से दो-दो हाथ करने के लिए भारत की ओर से लागू की जा रहीं ये नीतियां उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुखर हो कर पर्यावरण संरक्षण का अगुआ बनाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकती हैं. भारत इसपर मुखर हो कर आवाज भी उठा सकता है क्योंकि रिपोर्टों में इसे जलवायु परिवर्तन में योगदान देने वाला छोटा देश जबकि इससे होने वाली समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला राष्ट्र हो सकता है.