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सियाचिन की बर्फीली वादियों का लुत्फ उठा पाएंगे भारतीय सैलानी

विश्व का सबसे ऊंचा जंग का मैदान तक अब मात्र सैनिकों के लिए ही नहीं बल्कि पर्यटक भी जा पाएंगे. जम्मू कश्मीर का सियाचिन ग्लैशियर जहां कब्जे के लिए भारत पाकिस्तान के बीच लगातार झड़प चलती रहती है. उसे सैलानियों के लिए भी खोल दिया गया है. 

सियाचिन की बर्फीली वादियों का लुत्फ उठा पाएंगे भारतीय सैलानी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया ऐलान, सियाचिन पहुंच पाएंगे पर्यटक

श्रीनगर: सियाचिन की बर्फीली वादियों का लुत्फ अब आम पर्यटक भी उठा सकते हैं. उन्हें विश्व की सबसे सुंदर घाटियों में से एक सियाचीन ग्लैशियर को देखने का मौका मिल सकता है. 

सियाचिन से मिलती है भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमा
सियाचिन ग्लेशियर हिमालय में पूर्वी काराकोरम रेंज पर स्थित एक ग्लेशियर है. और यह क्षेत्र भारत- पाकिस्तान सीमा रेखा(LOC) और भारत-चीन की सीमा रेखा(LAC)से लगी हुई है. सोमवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रिनशेन ब्रिज के उद्घाटन के लिए लद्दाख गए थे. राजनाथ सिंह के साथ जनरल रावत भी इस सम्मारोह में मौजूद थे. यह ब्रिज भारत की सीमा से लगभग 45 किलोमीटर दूर श्योक नदी पर चीन सीमा से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा दौलत बेग ओल्डी को जोड़ेगी. इस ब्रिज का नाम भारतीय सेना के कर्नल शेवांग रिनशेन के नाम पर रखा गया है. कर्नल शेवांग लद्दाख के ही निवासी थे.

पर्यटकों के लिए खोलने का ऐलान
इस उद्घाटन के दौरान रक्षामंत्री ने यह भी घोषणा कर दी कि अब सियाचीन ग्लेशियर पर्यटकोँ के लिए भी खोल दिया गया है. सरकार ने सियाचिन बेस कैंप से कुमार पोस्ट तक के पूरे क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोला है. इसे खोलने के पिछे रक्षामंत्री ने यह बात कहीं कि जब लोग यहां घूमने आएंगे और सैनिकों को इस विषम परिस्थितियों में देखेंगे तो उनमें भी राष्ट्र प्रेम की भावना ओर जगेगी. और साथ ही युवाओं में सेना भर्ती को लेकर भी जागरुकता फैलेगी. इससे पहले लद्दाख के सांसद ने इस क्षेत्र को पर्यटन के लिए खोलने की बात कहीं थी.

दुनिया का सबसे ऊंचा जंग का मैदान सियाचिन
सियाचीन ग्लेशियर कारकोरम क्षेत्र में लगभग 20 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित हैं. यह ग्लेशियर विश्व का सबसे ऊंचा बैटल फील्ड माना जाता है. कहा जाता है कि अधिक ठंड में यहां सैनिकों का शरीर सुन्न हो जाता है. 1984 में भारतीय फौजियों ने सियाचीन ग्लेशियर से पाकिस्तानी आर्मी को हटा दिया था. जिसके बाद वह खुद वहां काबिज हो गए. 1984 के बाद यहां पर्यटकों का आवागमन था लेकिन वहां की स्थिति को देखते हुए सेलानियों के भ्रमण पर रोक लगा दी गई. और इसे एक बार फिर से पर्यटकों के लिए खोलने का फैसला किया गया है.